अजमेर की महिला जेल की लेडी जेलर दो महिला बंदियों को झाड़ू-पोछा लगवाने के लिए फ्लैट पर लेकर गई थी। कार्रवाई के डर से उसने अधिकारियों के सामने मेडिकल इमरजेंसी का झूठ बोला था। जेल से लेकर फ्लैट तक के 50 मिनट के CCTV फुटेज में इसकी पूरी कहानी सामने आई है। आरोपी जेलर बंदियों को हॉस्पिटल के बजाय वो सीधे फ्लैट पर लेकर पहुंची। इसी बीच जेल सुपरिंटेंडेंट को इसकी सूचना मिल गई। आनन-फानन में जेलर दोनों बंदियों को लेकर वापिस जेल पहुंची। इससे पहले जेल स्टाफ ने उन्हें कैदियों को बाहर ले जाने से रोकने की कोशिश की। लेकिन जेलर दिव्या चौधरी ने धौंस दिखाते हुए नौकरी से निकलवाने की धमकी दे डाली। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- CCTV में पुलिस को क्या पता चला, लेडी जेलर और बंदियों ने क्या स्टेटमेंट दिए और कैसे झूठ पकड़ा गया? आखिर क्यों घटना के करीब 25 दिन बाद FIR दर्ज की गई? सबसे पहले जानिए- जांच में क्या सामने आया? दिव्या चौधरी ने बनाया बहाना : जेलर दिव्या चौधरी ने शुरुआती पूछताछ में उच्च अधिकारियों को बताया- 12 जुलाई दोपहर बाद अचानक महिला बंदियों सना और किरण को मेडिकल इमरजेंसी हो गई थी। इस कारण जल्दबाजी में वह दोनों को चेकअप के लिए लेकर गई थी।जब दिव्या से रजिस्टर में एंट्री नहीं करने को लेकर सवाल पूछा तो जवाब मिला- जल्दबाजी में थी इसलिए एंट्री नहीं कर सकी। उच्च अधिकारियों को शक हुआ तो जांच करवाई गई। ऐसी कोई मेडिकल इरमजेंसी की पुष्टि उस दिन मिले सीसीटीवी फुटेज से नहीं हुई। महिला बंदियों ने भी इसकी पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने कैदियों को किसी से मिलवाने वाले एंगल पर भी जांच की। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। जांच में निकला सच : आखिरकार जांच अधिकारी को जेलर दिव्या चौधरी ने बताया कि वह निजी कार्य (झाड़ू-पोंछा) के लिए दोनों बंदियों को अपने फ्लैट पर लेकर गई थी। बंदी सना और किरण : कैदी किरण और सना को पुलिस ने इस केस में मुख्य गवाह बनाया है। पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया- जेलर मैडम और जेल प्रहरी सोनिया उन्हें अपने साथ लेकर गई थी। हम लोग एक फ्लैट पर गए थे। कुछ देर बाद ही मैडम ने जेल वापस चलने के लिए कहा और हम वहां से निकल गए। करीब 50 मिनट तक जेल से बाहर रहे। यहां चौंकाने वाली बात ये है कि दोनों कैदियों ने स्टेटमेंट कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि इनकी तबीयम खराब थी या किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी थी। अब जानिए- कैसे हुआ ये पूरा घटनाक्रम अजमेर के सिविल लाइंस थानाधिकारी शंभू सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने जेल परिसर के अंदर का CCTV फुटेज लिया है, यही फुटेज दोनों के खिलाफ अहम सबूत हैं। 12 जुलाई 2026 को जेलर दिव्या चौधरी जेल प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ दोनों महिला कैदियों सना और किरण को अपनी पर्सनल कार में बैठाकर अपने फ्लैट पर गई थी। दोपहर बाद दोनों जेल से निकली थी। दिव्या चौधरी का फ्लैट जेल से करीब 3 किलोमीटर दूर ARG कॉलोनी में है। दिव्या के जेल से कैदियों को घर ले जाने की कुछ देर बाद ही जेल सुपरिंटेंडेंट आर अनंतेश्वर जेल पहुंचे। जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने जेलर दिव्या चौधरी से बंदियों को लेकर तत्काल जेल में लाने के लिए कहा। इसके बाद दिव्या चौधरी दोनों महिला बंदियों के साथ दोबारा जेल पहुंची। भास्कर के पास इसकी Exclusive टाइमलाइन भी मौजूद है… 25 दिन तक जेल में दबी रही बात 12 जुलाई को घटना होने के बाद जेल विभाग ने 3 दिन बाद ही दिव्या चौधरी और सोनिया चौधरी को सस्पेंड कर दिया था। उसका मुख्यालय जयपुर कर दिया था। लेकिन अपने स्तर पर 24-25 दिन तक जांच करता रहा। कोई FIR दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद 5 अगस्त को जेल प्रहरी महिपाल मांगलोदा से एक रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में देकर एफआईआर दर्ज कराई गई। लेकिन इस बीच महिला जेलर दिव्या चौधरी और जेल प्रहरी सोनिया चौधरी फरार हो चुकी थी। सीसीटीवी फुटेज और साइबर सेल की मदद दोनों की ट्रैकिंग शुरू की गई। 6 अक्टूबर को कोटा से आरोपी जेलर दिव्या चौधरी (37) को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि सोनिया चौधरी अभी फरार है। जेल से बंदी को बाहर ले जाने का क्या है नियम लीगल एक्सपर्ट प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि जेल नियमों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति कोर्ट आदेश पर जेल के अंदर जाता है तो उसे बाहर तभी निकाला जाएगा जब कोर्ट आदेश करेगी। मेडिकल इमरजेंसी में भी कैदी को अस्पताल ले जाने की गाइडलाइन है। जेल स्टाफ चालानी गार्ड को जेल में बुलाकर संबंधित कैदी की सुपुर्दगी करता है। अगर बंदी की स्थिति गंभीर है तो जेल स्टाफ चालानी गार्ड का इंतजार नहीं करता। अधिकारियों को जानकारी देकर रजिस्टर में एंट्री कर बंदी को तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है। जेल प्रहरी सोनिया चौधरी दोनों को बिना एंट्री के जेल से बाहर लेकर आई। इस दौरान सुरक्षा में तैनात गार्ड ने रोकने की कोशिश की तो बाहर खड़ी जेलर दिव्या चौधरी ने उसे नौकरी छुड़वाने की धमकी दी, जिसके बाद वह पीछे हट गया। जेल नियमों के अनुसार विभागीय जांच के बाद इस प्रकार के केस में कर्मचारी को सस्पेंड कर FIR दर्ज कराई जाती है। जिसके बाद जब तक कोर्ट फैसला नहीं सुनाती तब तक आरोपी सस्पेंड ही रहते हैं। आरोप सिद्ध होने पर कोर्ट सजा सुना देती है तो कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया जाता है। 3 महीने पहले भी आ चुका ऐसा ही मामला सामने जुलाई में जयपुर की महिला बंदी सुधार गृह की डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज विश्नोई को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया था। सरोज विश्नोई के खिलाफ शिकायतें मिली थीं कि वे एक महिला कैदी को अपने साथ रखती थीं। महिला बंदी का ऑफिस के कामों में कर्मचारियों की तरह हस्तक्षेप था। सरोज विश्नोई पर पैसे लेकर बंदियों को नियम विरूद्ध सुविधाएं उपलब्ध करवाए जाने की भी शिकायतें थीं। …. यह भी पढ़ेंः हत्या में बंद कैदियों को घर ले गई थी जेलर:दोनों महिलाओं ने प्रेमियों संग मिलकर मर्डर किया, एक को उम्रकैद, दूसरी की चल रही ट्रायल अजमेर महिला जेल की जेलर दिव्या चौधरी को जिन दो महिला बंदियों से घर पर काम कराने में अरेस्ट किया गया, उन महिला बंदियों के मामले भी चौंकाने वाले हैं…(CLICK कर पढ़ें)

