नमस्कार, जंतर-मंतर वाले ऐलान के बाद से कॉकरोचों की धरपकड़ चल रही है। अलवर के कठूमर में तो पुलिस ने कॉकरोच की चप्पल तक उड़ा ली। उधर सीकर में पंचायत चुनाव लड़ने की इच्छुक लड़की ने कुंआरों के साउथ अफ्रीका से दुल्हन लाने का वादा कर डाला। अजमेर में थप्पड़ वाली अफसर मैडम सरेंडर हो गई हैं और यात्रा पर निकले भाटीजी ने नन्हे फैन को खास आशीर्वाद दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कॉकरोच की ‘चप्पल चोरी’ कॉकरोचों ने ऐलान किया कि वे जंतर-मंतर पर जुटेंगे। दूर-दराज से कॉकरोच चल पड़े। विदेशों में बैठे कॉकरोच भी आ पहुंचे। इससे पहले कॉकरोच ने परीक्षा का मुद्दा उठाया था। जेनजी-अल्फा उनके साथ हो गए। उन्होंने मंत्री पर हल्ला बोल दिया था। मंत्रीजी कुर्सी से गिर पड़े। कॉकरोचों ने शानदार जश्न मनाया। तब सरकार को आइडिया नहीं था कि कॉकरोच कुर्सी भी खा सकते हैं। लेकिन इस बार सरकार ने ‘हिट’ का फुल इंतजाम कर रखा था। जंतर मंतर से पहले ही सरकार कॉकरोचों को ढूंढ-ढूंढकर छू मंतर करने लगी। दिल्ली को तो किला ही बना दिया। हर बॉर्डर पर सिपाही तैनात कर दिए। अंकुश ऐसा लगाया कि तमाम क्रांतिवीर जहां थे वहीं रह गए। सिक्योरिटी भी ऐसी टाइट कि परिंदा भी पर नहीं मार सका। चहुंओर खामोशी पसर गई। एक इंकलाबी कॉकरोच राजस्थान के कठूमर में था। दावा है कि पुलिस उसे सोते को उठा लाई। दस मिनट के लिए फोन मांगा लेकिन काफी देर तक दिया नहीं। कॉकरोच की चप्पल तक जब्त हो गई। उसने आरोप लगाते हुए बोला- अब तक आपने वोट चोरी सुना होगा। लेकिन कठूमर पुलिस ने तो मेरी चप्पल चोरी कर ली है। श्रीगंगानगर में नवयुवक कॉकरोच ने वीडियो बनाते हुए कहा- मुझे आशंका है कि पुलिस मुझ तक भी पहुंच सकती है, हाउस अरेस्ट कर सकती है। शैतान को याद किया और शैतान हाजिर वाली कहावत चरितार्थ करते हुए पुलिस आ धमकी और हाउस अरेस्ट तो नहीं लेकिन हाउस से अरेस्ट कर लिया। कॉकरोचों के सरदार को तो लैंड ही नहीं करने दिया। प्लेन से ही हाईजैक कर लिया। 2. भाटी ने दिया एप्पल वाला ‘आशीर्वाद’ 2007 में आई फिल्म ओम शांति ओम में मयूर पुरी साहब ने सुप्रसिद्ध संवाद लिखा। संवाद था- कहते हैं अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो… तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। ऐसा ही कुछ नागौर के नन्हे नवाब सूर्यांश के साथ हुआ। 6-7 साल का सूर्यांश विधायक रविंद्र सिंह भाटी का फैन है। खेल-खेल में भी वह भाटीजी का नाम लेता है। उसने मिट्टी में टिफिन दबाकर स्विमिंग पूल तैयार किया था। उसके उद्घाटन के लिए पत्थर के टुकड़े को मोबाइल बनाकर भाटीजी से बात करने का नाटक किया। वीडियो को सोशल मीडिया पर इतना पसंद किया गया कि नेताजी ने नन्हे फैन से वीडियो कॉल कर संवाद किया। नेतागण के जीवन में इस तरह की बातें होती रहती हैं। समय आगे बढ़ा। बात आई-गई हो गई। हाल ही विधायक रविंद्र सिंह भाटी EWS सरलीकरण की यात्रा निकालते हुए नागौर के परबतसर पहुंचे। वहां उन्हें अपना नन्हा फैन सूर्यांश याद आया। कार की छत पर चढ़कर वे नुक्कड़ सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान परिजन सूर्यांश को कंधे पर बैठाकर सभा में पहुंचे। मेरा एक छोटा भाई है सूर्यांश। अरे सूर्यांश तू कहां है? मेरे लिए मेरे भाई ने प्यारा सा स्विमिंग पूल तैयार किया था। अरे सूर्यांश मेरे पास आ जा मेरे भाई। आप सब लोगों ने स्विमिंग पूल वाला वीडियो देखा या नहीं देखा। जैसे ही बच्चे को कार की छत पर पहुंचाया गया। भाटी ने गोद में उठाकर उसे उछाला और प्यार से गोद में ले लिया। नेताजी और फैन की बातचीत शुरू हुई- तो स्विमिंग पूल जोरदार बनाया।
हां।
अब मैं आ गया हूं।
आ जाना नहाने।
यानी स्विमिंग पूल का काम कंपलीट हो चुका है?
हां।
उद्घाटन कर दें?
कर दीजिए। सूर्यांश का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें उसने एक सेब दिखाते हुए कहा- कल मुझे भाटी साहब ने ये (एप्पल) आशीर्वाद दिया है। अब सोच रहा हूं इसे खाऊं या न खाऊं। घरवाले तो कह रहे हैं कि खा ले। लेकिन मेरा मन नहीं करता इसे खाने को। 3. कानून के हाथ और वकील के गाल उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि वे कानून के रक्षक हैं। उनके हाथ स्वयं कानून का अवतार हैं जो कि बहुत लंबे होते हैं। जो कोई कानून को हाथ में लेता है तो कानून के हाथ तुरंत उन हाथों तक पहुंच जाते हैं और फिर कानून हाथ में लेने वाले हाथों को कानून के लंबे हाथ बढ़िया सबक सिखाते हैं। अजमेर के किशनगढ़ की बात है। बाजार में भीड़भाड़ थी। एक युवक के मुताबिक वह सब्जी लेने गया था। इस दौराान ट्रैफिक पुलिस की सीओ मैडम उसकी कार के पास आईं। कार को हर एंगल से देखने के बाद ट्रैफिक सीओ इस नतीजे पर पहुंचीं कि कार बाजार की सड़क का अतिक्रमण कर रही है। कार का मालिक, यानी वह युवक जब अपने वाहन के पास आया तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि किसी अफसर का गुस्सा मगज फोड़कर बाहर निकल जाए। ट्रैफिक सीओ ने हाथ लंबे होने का फायदा उठाते हुए युवक के गाल पर कानूनी तमाचा जड़ दिया। युवक का दावा है कि उसने बता दिया था कि वह वकील है। शास्त्रों में वकील और पुलिस का 36 का आंकड़ा माना गया है। ऐसे में जब भरे बाजार एक वकील के गाल पर पुलिस का थप्पड़ पड़ा तो वह एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के गाल पर मारा गया सामान्य तमाचा नहीं रहा। बल्कि उसका फलक फैलकर बड़ा और महत्वपूर्ण हो गया। कहा गया कि यह समस्त पुलिस विभाग की ओर से समस्त वकीलों के गाल पर मारा गया चांटा है। जिसे समस्त वकील कदापि बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। कानून ने हमेशा की तरह न्याय की मांग कोर्ट में करने के बजाय सड़क पर करना ठीक समझा। वकील एकता जिंदाबाद हो गई और पुलिस तुम्हारी तानाशाही नहीं चलेगी नामक नारे से आसमान में छेद कर दिया गया। ऐसा माहौल बना कि पुलिस को अपने हाथ लंबे होने पर अफसोस होने लगा। आखिरकार काले कोट के सामने खाकी वर्दी को सरेंडर होना पड़ा। मैडम ने अपनी भूल मानते हुए सॉरी कह दिया। कानून के जो लंबे हाथ झट से वकील के गालों तक पहुंच गए थे, उन्हें अपने ही कानों तक पहुंचे में थोड़ा वक्त लग गया। 4. चलते-चलते.. पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही वादों के नाम पर सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर महिलाएं-युवतियां वोट के बदले कुंआरों के शादी कराने का वादा कर रही हैं। हाल ही झुंझुनूं की एक सोशल मीडिया कंटेट क्रिएटर अनिता सैनी ने सरपंच का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए वादा किया कि जीती तो एक महीने के अंदर कुंआरे लड़कों की शादी करा दूंगी। अब शेखावाटी इलाके से एक और ऐसा ही दावा किया गया है। सीकर में श्रीमाधोपुर में अनंतपुरा की नजदीकी ढाणी चंद्रावती की लड़की ने सरपंच का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। साथ ही वादा किया कि इलाके के 120 से 130 कुंआरे लड़कों की शादी कराऊंगी। शादी का खर्च भी उठाऊंगी। यहां कुंआरे लड़के शादी के लिए यूपी-बिहार की लड़कियां लाते हैं, मैं साउथ अफ्रीका से दुल्हन लाऊंगी। चुनाव लड़कर वाकई समाज सेवा का भाव है तो राजनीति में ऐसे युवाओं का स्वागत होना चाहिए। लेकिन अगर सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने, फॉलोअर्स बढ़ाने या सब्सक्रिप्शन कमाने के लिए कुंआरे युवाओं-प्रौढ़ों के साथ मजाक किया जा रहा है तो यह ठीक बात नहीं। किसी की उम्मीद जगाकर मखौल बना देना कहां का न्याय है? बाकी 1967 में उपकार नामक चित्रपट में इंदीवर साहब ने गीत के माध्यम से पहले ही खुलासा कर दिया था कि- कसमें वादे प्यार वफा सब बातें हैं, बातों का क्या। इनपुट सहयोग- रोहित पारीक (किशनगढ़, अजमेर), प्रकाश तंवर (नागौर), काका सिंह (श्रीगंगानगर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
हां।
अब मैं आ गया हूं।
आ जाना नहाने।
यानी स्विमिंग पूल का काम कंपलीट हो चुका है?
हां।
उद्घाटन कर दें?
कर दीजिए। सूर्यांश का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें उसने एक सेब दिखाते हुए कहा- कल मुझे भाटी साहब ने ये (एप्पल) आशीर्वाद दिया है। अब सोच रहा हूं इसे खाऊं या न खाऊं। घरवाले तो कह रहे हैं कि खा ले। लेकिन मेरा मन नहीं करता इसे खाने को। 3. कानून के हाथ और वकील के गाल उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि वे कानून के रक्षक हैं। उनके हाथ स्वयं कानून का अवतार हैं जो कि बहुत लंबे होते हैं। जो कोई कानून को हाथ में लेता है तो कानून के हाथ तुरंत उन हाथों तक पहुंच जाते हैं और फिर कानून हाथ में लेने वाले हाथों को कानून के लंबे हाथ बढ़िया सबक सिखाते हैं। अजमेर के किशनगढ़ की बात है। बाजार में भीड़भाड़ थी। एक युवक के मुताबिक वह सब्जी लेने गया था। इस दौराान ट्रैफिक पुलिस की सीओ मैडम उसकी कार के पास आईं। कार को हर एंगल से देखने के बाद ट्रैफिक सीओ इस नतीजे पर पहुंचीं कि कार बाजार की सड़क का अतिक्रमण कर रही है। कार का मालिक, यानी वह युवक जब अपने वाहन के पास आया तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि किसी अफसर का गुस्सा मगज फोड़कर बाहर निकल जाए। ट्रैफिक सीओ ने हाथ लंबे होने का फायदा उठाते हुए युवक के गाल पर कानूनी तमाचा जड़ दिया। युवक का दावा है कि उसने बता दिया था कि वह वकील है। शास्त्रों में वकील और पुलिस का 36 का आंकड़ा माना गया है। ऐसे में जब भरे बाजार एक वकील के गाल पर पुलिस का थप्पड़ पड़ा तो वह एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के गाल पर मारा गया सामान्य तमाचा नहीं रहा। बल्कि उसका फलक फैलकर बड़ा और महत्वपूर्ण हो गया। कहा गया कि यह समस्त पुलिस विभाग की ओर से समस्त वकीलों के गाल पर मारा गया चांटा है। जिसे समस्त वकील कदापि बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। कानून ने हमेशा की तरह न्याय की मांग कोर्ट में करने के बजाय सड़क पर करना ठीक समझा। वकील एकता जिंदाबाद हो गई और पुलिस तुम्हारी तानाशाही नहीं चलेगी नामक नारे से आसमान में छेद कर दिया गया। ऐसा माहौल बना कि पुलिस को अपने हाथ लंबे होने पर अफसोस होने लगा। आखिरकार काले कोट के सामने खाकी वर्दी को सरेंडर होना पड़ा। मैडम ने अपनी भूल मानते हुए सॉरी कह दिया। कानून के जो लंबे हाथ झट से वकील के गालों तक पहुंच गए थे, उन्हें अपने ही कानों तक पहुंचे में थोड़ा वक्त लग गया। 4. चलते-चलते.. पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही वादों के नाम पर सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर महिलाएं-युवतियां वोट के बदले कुंआरों के शादी कराने का वादा कर रही हैं। हाल ही झुंझुनूं की एक सोशल मीडिया कंटेट क्रिएटर अनिता सैनी ने सरपंच का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए वादा किया कि जीती तो एक महीने के अंदर कुंआरे लड़कों की शादी करा दूंगी। अब शेखावाटी इलाके से एक और ऐसा ही दावा किया गया है। सीकर में श्रीमाधोपुर में अनंतपुरा की नजदीकी ढाणी चंद्रावती की लड़की ने सरपंच का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। साथ ही वादा किया कि इलाके के 120 से 130 कुंआरे लड़कों की शादी कराऊंगी। शादी का खर्च भी उठाऊंगी। यहां कुंआरे लड़के शादी के लिए यूपी-बिहार की लड़कियां लाते हैं, मैं साउथ अफ्रीका से दुल्हन लाऊंगी। चुनाव लड़कर वाकई समाज सेवा का भाव है तो राजनीति में ऐसे युवाओं का स्वागत होना चाहिए। लेकिन अगर सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने, फॉलोअर्स बढ़ाने या सब्सक्रिप्शन कमाने के लिए कुंआरे युवाओं-प्रौढ़ों के साथ मजाक किया जा रहा है तो यह ठीक बात नहीं। किसी की उम्मीद जगाकर मखौल बना देना कहां का न्याय है? बाकी 1967 में उपकार नामक चित्रपट में इंदीवर साहब ने गीत के माध्यम से पहले ही खुलासा कर दिया था कि- कसमें वादे प्यार वफा सब बातें हैं, बातों का क्या। इनपुट सहयोग- रोहित पारीक (किशनगढ़, अजमेर), प्रकाश तंवर (नागौर), काका सिंह (श्रीगंगानगर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

