मानसून सीजन शुरू होने के बाद भी अब तक उदयपुर में अच्छी बारिश नहीं हुई तो चिंता सताने लगी। इस बीच मेवाड़ की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को उदयपुर के ओल्ड सिटी इलाके में महिलाओं ने इंद्रदेव को खुस करने के लिए अनोखी परंपरा निभाई। शुक्रवार शाम भोईवाड़ा की राजमाली समाज की महिलाएं मटकियां लेकर पिछोला झील से सटे गणगौर घाट पहुंचीं। यहां सरोवर की पूजा-अर्चना की गई और घूघरी का भोग अर्पित किया गया। शोभायात्रा निकाली पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सिर पर जल से भरी मटकियां रखकर शहर की गलियों से होकर धार्मिक गीतों और मंगलगान के बीच शोभायात्रा निकाली। महिलाएं भगवान से अच्छी बारिश, शहर की खुशहाली, परिवारों की सुख-समृद्धि और सभी के मंगल की प्रार्थना करती हुई आगे बढ़ीं। दुकानों व मंदिरों के सामने मटकियां फोड़ीं इसके बाद महिलाएं जुलूस के रूप में गणगौर घाट से जगदीश चौक जाने वाले रास्ते पर बाजार की ओर निकलीं और रास्ते में दुकानों व मंदिरों के सामने मटकियां फोड़ीं। मटकियां फूटते ही कई दुकानदार घबराकर दूर हट गए, जबकि कुछ ने पहले ही अपनी दुकानें बंद कर दीं। हर साल निभाई जाती है यह परंपरा महिलाओं का मानना है कि दुकानों के सामने मटकियां फोड़ने पर दुकानदारों की नाराज़गी और गालियां इंद्रदेव तक पहुंचती हैं। मान्यता के अनुसार, इससे इंद्रदेव प्रसन्न या क्रोधित होकर जमकर बारिश बरसाते हैं। इसी आस्था के साथ हर साल यह परंपरा निभाई जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह वर्षों पुरानी लोक परंपरा है। मान्यता है कि जल से भरी मटकी फोड़ने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है। साथ ही यह अनुष्ठान प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, समृद्धि और समाज में सुख-शांति की कामना का प्रतीक माना जाता है।

