23 जिलों में सूखे जैसे हालात, आधा मानसून सीजन निकला:जवाई और बीसलपुर बांध में पानी बढ़ने की बजाए कम हुआ; जानिए- अगस्त कैसा रहेगा

मानसून का आधा सीजन (जून-जुलाई) निकल गया। लेकिन बारिश सामान्य से भी कम हुई है। राज्य में 31 जुलाई तक सामान्य से 11 फीसदी कम बरसात हुई है। राजस्थान के 23 जिलों में सूखे जैसे हालाते हैं। यहां सामान्य से कम बारिश हुई। वहीं, जवाई और बीसलपुर जैसे बड़े बांध भरने की बजाए खाली हो रहे हैं। वहीं, मौसम विभाग ने अगस्त में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। अगस्त के दूसरे सप्ताह से जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर में मौसम करीब-करीब साफ रहेगा। सबसे पहले- मानसून की एक सुखद तस्वीर अब जानिए- क्यों इस साल कमजोर है मानसून मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के सीनियर साइंटिस्ट हिमांशु शर्मा ने बताया- इस बार प्रशांत महासागर में अलनीनो कंडीशन और हिंद महासागर में बना इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी न्यूट्रल कंडीशन ने मानसून को कमजोर किया है। अलनीनो कंडीशन के कारण बंगाल की खाड़ी में जो मानसून सीजन में बारिश के लिए सिस्टम (लो-प्रेशर सिस्टम) बनते है, वह कम और कमजोर बन रहे हैं। उत्तर-मध्य और पश्चिमी भारत के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की बारिश इसी बंगाल की खाड़ी से आने वाले सिस्टम के असर से होती है। इसके अलावा पश्चिमी हवा भी इस बार स्ट्रांग है। जो पूर्वी हवा को आने से प्रभावित कर रही है। यही कारण है कि इस बार साउथ-वेस्ट मानसून भारत में कमजोर रहा है। प्री-मानसून अच्छी बरसात, लेकिन बाद में कम राज्य में मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस समयावधि में होने वाली बारिश को मानसून की बारिश में गिना जाता है। इस बार मानसून 2 जुलाई को राजस्थान में आया। उससे पहले 1 जून से प्री-मानसून की बारिश का दौर शुरू हुआ। जून में प्री-मानसून के दौरान बारिश सामान्य रही। प्री-मानसून सीजन में एक के बाद एक सिस्टम लगातार आने से बारिश का दौर प्रदेश में जारी रहा। पूरे राजस्थान जून में के महीने में औसत बरसात 55MM होती है, जबकि इस बार वास्तविकता में 55.6MM बरसात हुई थी। इसी तरह जुलाई के पूरे महीने में राजस्थान में औसत बरसात 161.4MM होती है, लेकिन इसके मुकाबले इस बार जुलाई में केवल 137.3MM बरसात ही हुई है। राजस्थान में संभागवार बारिश की स्थिति अजमेर संभाग में अच्छी बरसात हुई अजमेर संभाग के अजमेर, नागौर जिलों में सामान्य से थोड़ी ज्यादा बरसात हुई। यहां सबसे ज्यादा बरसात नागौर में 242.3MM हुई, जो जिले की औसत बरसात 202.8MM से 19 फीसदी ज्यादा है। जबकि अजमेर में सामान्य से 10 फीसदी ज्यादा रही। इधर टोंक, भीलवाड़ा में सामान्य से क्रमश: 4 फीसदी, 9 फीसदी कम हुई। बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार बरसात से यहां बांध का गेज भी स्थिर बना हुआ है। जयपुर संभाग के सिर्फ सीकर और झुंझुनूं में अच्छी बारिश हुई जयपुर संभाग की स्थिति देखे तो इस बार सामान्य से कम ही बारिश रही। संभाग के सीकर, झुंझुनूं जिलों में लगातार बारिश जारी रहने से यहां औसत से थोड़ी ज्यादा बरसात हुई। सीकर में अच्छी बरसात हुई। जबकि जयपुर, दौसा, अलवर में कम। जयपुर में सामान्य से 21 फीसदी कम और अलवर में 19 फीसदी कम बरसात हुई है। दौसा में ठीक बरसात होने से मोरेल बांध भी फुल हो गया। भरतपुर संभाग में मानसून कमजोर भरतपुर संभाग में भी मानसून कमजोर ही रहा। सवाई माधोपुर, करौली में औसत की 75 फीसदी से भी कम बरसात हुई। हालांकि भरतपुर में बारिश ठीक रही, लेकिन सामान्य से 15 फीसदी कम बरसात हुई। कोटा संभाग के बांध मध्यप्रदेश की बारिश के कारण खुले कोटा संभाग में बरसात बहुत कम रही। कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ चारों ऐसे जिले रहे, जहां जुलाई अंत तक सामान्य की 75 फीसदी बरसात भी नहीं हुई। सबसे कम बरसात कोटा जिले में हुई। यहां दो माह में औसत बरसात 357.9MM होती है, लेकिन इस बार यहां केवल 225.9MM ही हो सकी। मध्य प्रदेश में हुई तेज बारिश से यहां परवन, कालीसिंध नदियों का जलस्तर बढ़ गया। कालीसिंध का गेट खोलकर पानी भी छोड़ना पड़ा। उदयपुर संभाग में अच्छी बरसात हुई उदयपुर संभाग और उसके आसपास के एरिया में भी कई जगह अच्छी बरसात हुई। लेकिन डूंगरपुर, बांसवाड़ा में सूखे जैसी स्थिति रही। उदयपुर के लसाड़ियां में 22 से 23 जुलाई के बीच 11 इंच तक बरसात हुई। बीकानेर संभाग में सामान्य से ज्यादा पानी बरसा बीकानेर संभाग की स्थिति देखे तो हनुमानगढ़ छोड़ दे तो शेष तीन जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी बरसा है। हनुमानगढ़ में कम बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ी है। यहां 31 जुलाई तक कुल 102.2MM ही बरसात हुई, जो सामान्य 140.9MM से 27 फीसदी कम है। जोधपुर और बाड़मेर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई जोधपुर संभाग में भी मानसून की स्थिति कमजोर रही। यहां जोधपुर, बाड़मेर को छोड़कर शेष जिलों में औसत से कम बरसात हुई है। हालांकि दो दिन सिरोही में तेज बरसात से यहां बरसाती नदियां बहती दिखीं। माउंट आबू से झरने चलने लगे। लेकिन जालोर, पाली के एरिया में कम बारिश से यहां कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हो गए। बरसात नहीं होने से पाली का प्रमुख जवाई बांध का पानी स्टोरेज भी 4 फीसदी तक कम हो गया। मानसून में भी बांध भरने के बजाए हो रहे खाली राजस्थान में कमजोर मानसून का असर बांधों पर देखने को मिल रहा है। यहां कुछ प्रमुख बड़े बांधों का जलस्तर मानसून आने के बाद बढ़ने के बजाए गिरा है। पाली के जवाई बांध में जहां 1 जुलाई को मानसून आने से पहले जलस्तर 10.12 आरएल मीटर ​था, वह 31 जुलाई तक गिरकर 9.27 आरएल मीटर पर आ गया। इसी तरह टोंक के बीसलपुर बांध का जलस्तर भी कम हुआ है। 1 जुलाई तक बांध का जलस्तर 313.64 था, जो अब घटकर 313.58 आरएल मीटर पर आ गया। हालांकि बीसलपुर बांध के कैचमेंट ​एरिया में हुई है। अच्छी बरसात से यहां कुछ समय पानी की आवक भी हुई। भीलवाड़ा के मेजा बांध का गेज मानसून से पहले 6.16 आरएल मीटर था, वह घटकर अब 6.01 पर आ गया। डूंगरपुर के सोमकमला अंबा का गेज भी 10.55 आरएल मीटर से गिरकर 10.45 पर आ गया। अगर अगस्त, सितंबर में अच्छी बारिश नहीं हुई और बीसलपुर, जवाई बांध में पानी नहीं आया तो जयपुर, अजमेर, पाली जिलों में पीने के पानी और सिंचाई के लिए संकट खड़ा हो सकता है। आगे क्या- अगस्त-सितंबर में भी संकेत अच्छे नहीं मौसम विज्ञान केन्द्र नई दिल्ली ने अगस्त और सितंबर में बारिश का जो फोरकास्ट जारी किया है, उसमें राजस्थान में दोनों माह में अच्छी बारिश के कोई संकेत नहीं है। पूरे राजस्थान में इन दोनों माह में सामान्य से कम ही बारिश का अनुमान जताया है। (नोट- राजस्थान में मानसून के आंकड़े मौसम विभाग द्वारा 33 जिलों के आधार पर जारी किए जाते हैं।)
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