9 साल पुराने वनकर्मी मर्डर केस में दो को उम्रकैद:शव खुर्द-बुर्द करने का भी दोष साबित, सपत्ति की भी हड़पने के मामले में 3 साल की अलग से कैद

जोधपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने नौ साल पुराने हत्या के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला लोहावट थाना क्षेत्र में वन विभाग कर्मी की हत्या कर शव को खुर्द-बुर्द करने से जुड़ा हुआ था। न्यायालय ने दोनों दोषियों को हत्या, साक्ष्य मिटाने और मृतक की संपत्ति के दुरुपयोग सहित अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। मामला 25 अगस्त 2017 को रामसागर पीलवा निवासी भगवानाराम जाट की रिपोर्ट पर लोहावट पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि उनके भाई भंवराराम सदरी वन विभाग में कार्यरत थे। 8 अगस्त 2017 को वह घायल हिरण को वन विभाग की चौकी लोहावट में छोड़ने आए थे। इसके बाद भंवराराम लोहावट बाजार पहुंचे, जहां उन्होंने शराब की दुकान से शराब खरीदी। शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच उन्हें सुखदेव पुत्र रामुराम राव विश्नोई और जीतू हरिजन पुत्र ओमप्रकाश, दोनों निवासी लोहावट विशनवास, के साथ जाते हुए देखा गया था। गुमशुदगी के बाद सामने आई हत्या की कहानी भंवराराम के घर नहीं लौटने पर उनकी गुमशुदगी रिपोर्ट लोहावट थाने में दर्ज कराई गई थी। बाद में परिजनों को जानकारी मिली कि सुखदेव और जीतू हरिजन ने कथित रूप से भंवराराम की सोने की अंगूठी, नकदी और एटीएम कार्ड लूटने के उद्देश्य से उनकी हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगा दिया। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। हत्या की धारा में आजीवन कारावास की सजा जिला एवं सत्र न्यायाधीश चक्रवर्ती सिंह महेचा ने सुनवाई के बाद सुखदेव विश्नोई और जीतू हरिजन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोनों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने दोनों दोषियों को धारा 201 के तहत शव को खुर्द-बुर्द करने के मामले में 5 साल का कठोर कारावास और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा दी। जुर्माना नहीं भरने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास होगा। इसके अलावा धारा 404 के तहत मृत व्यक्ति की संपत्ति का बेईमानी से उपयोग करने के मामले में 3 वर्ष का कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक विजय कुमार ओझा ने न्यायालय में पैरवी की। न्यायालय के फैसले के बाद नौ साल पुराने हत्या मामले में दोनों आरोपियों को दोषी करार देकर सजा सुनाई गई।
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