स्कूल में ‘कॉकरोच’, ‘ढक्कन कानून’ पर हल्लाबोल:पूर्व मंत्री ने खोली MLA की ‘पोल’; करप्शन की ‘बाढ़’ में बह गया पुल!

नमस्कार, सरकारी स्कूलों में परमिशन लेकर वीडियोग्राफी करने का फरमान निकला तो दिल्ली वाले कॉकरोच स्कूल में घुस गए। वहीं विधानसभा के बाहर विपक्षी दलों ने भी खूब हल्ला मचाया। झुंझुनूं में नवलगढ़ विधायक ने यूनिवर्सिटी चुनाव का जिक्र किया तो पूर्व मंत्री ने तंज कर दिया। वहीं बारां में ‘करप्शन की बाढ़’ चर्चा में है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. सरकारी स्कूल में ‘कॉकरोच’, सड़क पर विपक्ष निकाय और पंचायत के चुनाव सिर पर आ गए। ऐसे में शिक्षा विभाग के एक आदेश ने हंगामा खड़ा कर दिया। आदेश में कहा गया कि सरकारी स्कूल में वीडियो-फोटो शूट करना है तो पहले संस्था प्रधान की लिखित परमिशन लेनी होगी। मंत्रीजी ने कहा कि छात्रों की निजता को ध्यान में रखकर फैसला किया है। अब जरा याद कीजिए कि दिल्ली में कॉकरोच पार्टी के मंच से क्या कहा गया था? कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान के बाद राजस्थान के शिक्षा मंत्री का नंबर है। कुछ दिन से कॉकरोच पार्टी के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों में जाकर हालात देख रहे हैं। वहीं से उन्होंने कहा था कि सरकारी स्कूलों में जाओ, जो भी अव्यवस्था देखो उसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दो। इस बयान के बाद राजस्थान शिक्षा विभाग का आदेश आ गया- परमिशन वाला। इसे इस तरह देखा गया कि सरकारी स्कूलों की अव्यवस्थाओं को छुपाने के लिए यह फरमान जारी किया गया है। कॉकरोच पार्टी ने हाल ही राजस्थान के शिक्षा विभाग से 10 बेस्ट स्कूलों की लिस्ट मांगी थी। इधर, दिल्ली के जेन-जी आंदोलन के बाद राजस्थान में सरकारी स्कूल के ‘अल्फाओं’ ने शोर मचा रखा था। अलवर के थानागाजी में जोधावास स्कूल में बच्चों के प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले। ऐसे में कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष अपनी टीम लेकर जोधावास पहुंच गए। कुल मिलाकर माहौल बन गया। इसी बीच विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों को लेकर निकले सरकारी फरमान के खिलाफ कांग्रेस भी सड़क पर उतर आई। दिग्गज नेताओं ने फरमान को ‘ढक्कन कानून’ करार दिया। कुल मिलाकर विरोधी खेमा माहौल बना रहा है और कॉकरोच स्कूलों में घुस रहे हैं। शिक्षा महकमे के मंत्रीजी मच्छरों पर लट्‌ठ टिकाने के बाद शायद यही प्रयोग कॉकरोचों पर करने वाले हैं। 2. विधायक और पूर्व मंत्रीजी की ‘अदावत’ सियासत में अदावत न हो तो न सियासत का मजा आता है और न अदावत का। झुंझुनूं के नवलगढ़ में भी दिग्गज नेताओं की अदावत चल रही है। एक तरफ हैं मौजूदा विधायक विक्रम जाखल। तो दूसरी तरफ हैं पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा। जाखल भी चोट खाकर बैठे हैं और राजकुमार भी चोट खाकर बैठे हैं। जाखल के परिवार के नजदीकी लोगों ने बिजली लाइन से जुड़े एक मामले में विरोध किया था और नीचा दिखाने वाली बातें की थी। कहा था कि विधायक पारिवारिक दुश्मनी निकाल रहे हैं। ऐसे में विधायक जी अपनों से ही चोट खाए बैठे हैं। दूसरी तरफ पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा हैं जिनका ड्रीम प्रोजेक्ट अतिक्रमण का ठप्पा लगाकर सुपुर्दे खाक कर दिया गया। खेल स्टेडियम धूल धूसरित होने के बाद उनकी अदावत में निखार आ गया। एक कार्यक्रम में विधायक जाखल ने दावा किया था कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में रणवीर गुढ़ा को तीनों चुनाव जिताए थे। रणवीर का चुनावी दफ्तर राजकुमार जी के बाजू में ही लगाया था। इस वजह से राजकुमार जी की हालत ‘थर-थर’ हो गई थी। बयान को लेकर राजकुमार शर्मा ने जुबानी खड़ग निकाला और बोले- उन्होंने कभी यूनिवर्सिटी की शक्ल भी देखी है क्या? 10वीं की मार्कशीट भी है क्या उनके पास? जिनका वो जिक्र करते हैं उनके ड्राइवर के रूप में जरूर गए होंगे। सबको पता है। इस पर जाखल जी भी चुप रहने वाले नहीं हैं। जरूर शब्दों की तलवार पर धार लगा रहे होंगे। 3. चलते-चलते.. इस बार सावन में इंद्रदेव काफी कंजूसी कर रहे हैं। लगता है स्वर्गलोक में चुनाव नहीं होते। चुनाव के जरिए स्वर्ग का राजा चुना जाता तो इंद्र के लिए सिंहासन बचाने का संकट पैदा हो जाता। स्वर्ग द्वार के पास महिलाएं घड़े फोड़कर प्रदर्शन करती। चुनाव से पहले नेतागण जनता पर वादों की झड़ी लगा देते हैं। पहले तो इंद्रदेव भी सावन में झड़ी लगाया करते थे। लेकिन झड़ी लगाने की कला शायद वे भूल ही गए। अब तो जोर से पानी बरसता है और चमाचम धूप निकल आती है। इंद्रदेव भी क्या ही करें। धरती लोक वालों ने धरती का सत्यानाश कर रखा है। नदी जंगल पहाड़ सब खा गए। विकास के नाम पर विनाश कर दिया। देवता भी क्या करें? जब इंसान ही कुदरत का गला घोंटने को तैयार है तो इंद्रदेव का क्या कसूर? बारां में अभी डेढ़ महीने पहले पार्वती नदी पर बने नए पुल का फीता कटा। दोनों किनारों के लोग खुश थे। खुशी उस वक्त काफूर हो गई जब जोरदार बारिश में नए पुल का एक तरफ का हिस्सा पानी के साथ बह गया। इस घटना को लेकर एक मुसाफिर ने इंद्रदेव को दोष दिया- बारिश ने 50 करोड़ में बने नए पुल का कबाड़ा कर दिया। दूसरे ने बचाव पक्ष वाली दलील दी- इंद्रदेव को क्यों कोसते हो भाई? यहां जरूर करप्शन की बाढ़ आई होगी। इनपुट सहयोग- राजकुमार शर्मा (नवलगढ़, झुंझुनूं), शुभम निमोदिया (बारां)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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