अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा छोड़ी:2 पुराने मामलों में नोटिस मिलने से नाराज; विधानसभा अध्यक्ष पर लगाए आरोप

अजमेर में नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। 2 बार के मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी छोड़ दी है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से 2 नोटिस दिए जाने से वह नाराज थे। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी आरोप लगाए। गहलोत ने गुरुवार को एक वीडियो जारी कर कहा- वासुदेव देवनानी से मेरे राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। इस कारण वे हमेशा से कोशिश करते हैं कि दूसरे को झुका दें, समाप्त कर दें। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय दबाव में लेने के लिए इस प्रकार के पत्र स्वायत्त शासन विभाग से जारी करवाए हैं। गहलोत ने कहा- चुनाव के दौरान कांग्रेस इस प्रकार के प्रश्न उठा सकती है तो जाने-अनजाने में भाजपा कठघरे में आएगी। ये देवनानी और मेरी लड़ाई है। मैं नहीं चाहता कि हम दोनों की लड़ाई के बीच में भाजपा पर किसी प्रकार का प्रश्न चिह्न बने। इसके साथ ही धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी से नागौर चुनाव के प्रभारी पद से मुक्त करने की बात कही। बता दें कि धर्मेंद्र गहलोत अजमेर नगर निगम में 2 बार (साल 2005 और 2015 में) मेयर रहे थे। डीएलबी ने 18 अगस्त को दिया नोटिस धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो में कहा- भारतीय जनता पार्टी का आभार, जिन्होंने नागौर नगर परिषद के आगामी चुनाव के लिए मुझे प्रभारी नियुक्त किया। ये उत्तरदायित्व मैं नहीं निभा पाऊंगा। इसके पीछे कारण यह है कि स्वायत्त शासन विभाग ने 18 अगस्त को दो मामलों में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गहलोत ने कहा- दोनों लेटर स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी किए गए हैं, जो मुझ पर आरोप लगाते हैं। अजमेर की जनता और अन्य लोग जानते हैं कि एक शिकायत 2021 की है, जब मैं महापौर नहीं था। एक मामला महापौर के समय का है, जो 6-7 साल पुराना है। मिटने को तैयार, झुकने को नहीं धर्मेंद्र गहलोत ने कहा- इस प्रकार के जो लेटर डीएलबी से जारी करवाए हैं, यह मेरी छवि को धूमिल करने के लिए हैं। मैं मन पर पत्थर रखते हुए इस बात का निर्णय ले रहा हूं कि जब तक ये मामला निस्तारित नहीं हो जाए। नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। साथ ही जो नागौर का दायित्व दिया गया है, उससे भी प्रदेश नेतृत्व मुक्त करें। गहलोत ने कहा- मैं देवनानी को खुली चुनौती देता हूं। उन्होंने मुझे अभी अच्छी तरह से पहचाना नहीं। मैं उन वीर कुमार का चेला हूं, जो आज तक किसी के सामने नहीं झुका। धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, लेकिन झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा- ये धर्मेंद्र गहलोत और वासुदेव देवनानी के बीच की लड़ाई है, ये लड़ाई जारी रहेगी। भारतीय जनता पार्टी से इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं। 17ए में स्वीकृति इस मामले को लेकर हो सकती है करीब 6 साल पहले धर्मेंद्र गहलोत के मेयर रहते हुए 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी वाला मामला काफी चर्चित रहा था। राज्य सरकार की ओर से तत्कालीन महापौर गहलोत को राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस को उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। गहलोत पर आरोप था कि उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर निगम के उपायुक्त से 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी दिलवा दी। इस मामले की शिकायत राज्य सरकार को मिलने पर तत्कालीन एडीएम सिटी अशोक योगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था।
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