जयपुर के भाजपा प्रदेश कार्यालय में 11 जून को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यक्रम के दौरान हुई बिजली गुल (ब्लैकआउट) के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में सस्पेंड किए गए हीरापुरा 400 केवी जीएसएस के इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाबू सिंह का कहना है कि घटना वाले दिन ग्रिड के ब्रेकर की स्थिति खराब थी। अफसरों ने बिना शटडाउन के चालू लाइन में ही सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF-6) गैस भरने का दबाव बनाया था। अगर कर्मचारी ऐसा करते तो ब्रेकर फट जाता, जिससे कई कर्मचारियों की जान जा सकती थी और निगम को करोड़ों रुपए का नुकसान होता। पहले PHOTOS में समझें क्या हुआ था उस दिन ’50-60 फीट दूर से ही आ रही थी डरावनी आवाज, हम डर गए थे’ दैनिक भास्कर से बातचीत में इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया- 11 जून को भीषण गर्मी थी और लोड बहुत ज्यादा था। इसी दौरान ग्रिड का ब्रेकर लॉकआउट (ऑन-ऑफ न होना) में आ गया। साहब ने मुझसे कहा कि इसमें SF-6 गैस कम हो गई है, जाकर चेक करो। जब मैं पास जाने लगा तो 50-60 फीट दूर से ही इतनी तेज और डरावनी आवाज आ रही थी कि मैं डरकर वापस आ गया। मैंने अपने पूरे कार्यकाल में कभी ऐसी आवाज नहीं सुनी थी। बाबू सिंह ने कहा- हमने सैकड़ों बार ब्रेकर में गैस भरी है, लेकिन चालू लाइन में ऐसा करना मौत को दावत देने जैसा था। हमारा शटडाउन मांगना अधिकारियों को नागवार गुजरा। सिस्टम ने यह मान लिया कि हम काम नहीं करना चाहते। यानी सेफ्टी के साथ काम करने की बात को गलत और बिना शटडाउन के मरने वाले तरीके को सही मान लिया गया। अब समझते हैं उस दिन यार्ड में क्या हुआ था? ‘डेढ़ साल से कर रहे थे शिकायत, जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं?’ बाबू सिंह ने आरोप लगाया कि कोटा लाइन का यह ब्रेकर पिछले डेढ़ साल से खराब चल रहा था। इसमें से लगातार राख और गैस निकल रही थी। उन्होंने कहा- हमने AEN बी.एल. मीणा, भरत जी और आशीष जी को कई बार लिखित और मौखिक तौर पर बताया था कि इसे बदलवा दीजिए, वरना बड़ा हादसा हो जाएगा। पिछले 3-4 दिनों से तो आवाज बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। उन्होंने सवाल उठाया किAEN बी.एल. मीणा, AEN मेंटेनेंस और कंट्रोल रूम की प्रभारी सुमन स्वामी मैडम की जिम्मेदारी इस ब्रेकर को फ्री करके देने की थी। लेकिन बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं तो एक अदना सा कर्मचारी हूं, ट्रिपिंग कब आएगी यह मैं तय नहीं करता। मुझे जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए टारगेट किया गया है। बिजली विभाग और भाजपा मुख्यालय पर भी उठाए सवाल सस्पेंडेड कर्मचारी ने पूरे घटनाक्रम के मैनेजमेंट पर दो बड़े सवाल खड़े किए हैं… जिम्मेदार बोले- हमारा इंटरनल मैटर है इस पूरे विवाद और आरोपों पर जब दैनिक भास्कर ने सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने वाले चीफ प्रोफेशनल ऑफिसर अमिताभ गुप्ता से बात की। उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, यह हमारा इंटरनल मामला है। मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। मामले में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उनके कार्यालय से ‘मंत्री जी बैठक में हैं’ कहकर कॉल काट दिया गया। क्या है पूरा मामला? 11 जून को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का मीडिया संवाद कार्यक्रम चल रहा था। इस दौरान 13 मिनट में 3 बार बिजली गुल हुई थी। रेल मंत्री को अंधेरे में ही मीडिया को संबोधित करना पड़ा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में लापरवाही सामने आने के बाद राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम ने सहायक इंजीनियर (AEN) विपिन वर्मा और इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह को 13 जून को सस्पेंड कर दिया था, जबकि जयपुर सिटी के अधीक्षण इंजीनियर (SE) आर.पी. गुप्ता को चार्जशीट जारी की गई थी। —– ये खबरें भी पढ़िए… रेल मंत्री के कार्यक्रम में बिजली गुल हुई थी,AEN-इलेक्ट्रीशियन सस्पेंड:दो दिन पहले हीरापुरा ग्रिड पर ट्रिपिंग के कारण BJP ऑफिस में कटी थी लाइट रेल मंत्री के कार्यक्रम में 3 बार गुल हुई बिजली:अश्विनी वैष्णव ने 13 मिनट तक अंधेरे में किया संबोधित; ऊर्जा मंत्री हॉल से बाहर निकले भाजपा प्रदेश कार्यालय में बिजली गुल होने की होगी जांच:ऊर्जा मंत्री बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जिम्मेदार अधिकारी या अभियंता पर होगी कार्रवाई

