ठगी के मास्टरमाइंड ने बेंगलुरु में सीखा साइबर फ्रॉड:लड़कियों के नाम से सिम खरीदी, किराए के अकाउंट में पैसा डलवाया

कोटा में गिरफ्तार हुए ठगी के मास्टरमाइंड, जोधपुर निवासी आरोपी मोहम्मद अशफाक ने बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर से साइबर ठगी का तरीका सीखा था। इसके बाद वह भोपाल, इंदौर और मुंबई में इसी नेटवर्क से जुड़ा। जब उसे कमाई का रास्ता समझ में आ गया, तो उसने अपने रिश्तेदारों को साथ लेकर कोटा में अपना पूरा सेटअप खड़ा कर दिया। साइबर फ्रॉड के मामले में पकड़े गए आरोपी ने कोटा में कॉल सेंटर को इस तरह तैयार किया था कि बाहर से यह एक सामान्य जॉब सेंटर जैसा नजर आता था, लेकिन अंदर बैठी लड़कियां रोजाना सैकड़ों लोगों को फोन कर उन्हें निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाती थीं। पोस्ट ग्रेजुएट है ठगी का मास्टरमाइंड डीएसपी गंगासहाय शर्मा ने बताया- साइबर ठगी के आरोप में पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अशफ़ाक (28) निवासी पालड़ी रनावता (थाना भोपालगढ़, जिला जोधपुर) सहित उसके चार अन्य साथियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में आवेश (18) निवासी अशोक कॉलोनी के पास (बीकानेर), सैयद अली (24) निवासी डी-64, तेलियों का मोहल्ला, रूंखजवाना (जिला नागौर), जावेद अली (22) निवासी ग्राम रुण (थाना मूंडवा, जिला नागौर) और मजीद खान (35) निवासी ग्राम बिराई (तहसील बावड़ी, थाना खेड़ापा, जिला जोधपुर) शामिल हैं। ये सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 102 मोबाइल फोन, 11 लैपटॉप, डेस्कटॉप, हार्ड डिस्क, कई डायरियां व रजिस्टर और साइबर ठगी के 65 हजार रुपए सहित अन्य उपकरण बरामद किए हैं। बेंगलुरु से सीखा ठगी का ककहरा, कई शहरों में फैलाया जाल डीएसपी गंगासहाय शर्मा ने बताया- ठगी का मास्टरमाइंड मोहम्मद अशफ़ाक पोस्ट ग्रेजुएट है। उसने साल 2020-21 में बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम किया था, जहाँ उसने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर फ्रॉड करना सीखा। इसके बाद उसने भोपाल के एक कॉल सेंटर में भी इसी तरह की ठगी की। कुछ समय इंदौर और मुंबई में रहकर भी उसने साइबर फ्रॉड से जुड़ा काम किया।
इसके बाद उसने भोपाल में खुद का कॉल सेंटर शुरू किया, लेकिन पुलिस की पकड़ में आने के डर से वह करीब डेढ़ साल पहले कोटा आ गया। यहाँ आकर उसने दोबारा अपना पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया। प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क और गुमानपुरा में ऑफिस डीएसपी गंगासहाय शर्मा ने बताया- कोटा आने के बाद आरोपी ने सबसे पहले स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क किया। इसके बाद उसने गुमानपुरा इलाके में रतलामी कचौरी सेंटर के पास ‘उमेश सदन’ में एक ऑफिस किराए पर लिया। आरोपी को पता था कि पुरुषों की आवाज़ पर फोन करने से लोग निवेश के लिए जल्दी तैयार नहीं होते, जबकि लड़कियों की आवाज़ में बातचीत होने पर सामने वाला आसानी से भरोसे में आ जाता है।
इसी रणनीति के तहत उसने प्लेसमेंट एजेंसी और OLX के जरिए लड़कियों को नौकरी पर रखना शुरू किया। कॉल सेंटर में लड़कियों को सामान्य नौकरी (जैसे डेटा एंट्री या कस्टमर केयर) के नाम पर लाया जाता था, लेकिन बाद में उन्हें साइबर ठगी के काम में धकेल दिया जाता था। 7 दिन की ट्रेनिंग, बोर्ड पर लिखे होते थे सवाल-जवाब डीएसपी गंगासहाय शर्मा ने बताया- आरोपी अशफ़ाक खुद पहले कॉलिंग का काम कर चुका था, इसलिए उसे अच्छी तरह पता था कि ग्राहकों से किस तरह बात करनी है और उनके सवालों का जवाब किस अंदाज में देना है। कॉल सेंटर में बाकायदा एक बोर्ड लगाया गया था, जिस पर ग्राहकों द्वारा पूछे जाने वाले संभावित सवाल और उनके जवाब लिखे रहते थे। लड़कियों को ट्रेनिंग के दौरान समझाया जाता था कि बातचीत की शुरुआत कैसे करनी है, ग्राहक की आर्थिक स्थिति और निवेश में उसकी रुचि को कैसे भांपना है और उसे ट्रेडिंग के लिए कैसे राजी करना है। पुलिस के मुताबिक, करीब 7 दिन की कड़ी ट्रेनिंग के बाद लड़कियों को कॉलिंग के काम पर लगा दिया जाता था। लड़कियों के नाम की सिम खरीदी, उनके अकाउंट यूज किए पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोपी ने कॉल सेंटर में नौकरी पर रखी लड़कियों के नाम सिम खरीदी। पुलिस के अनुसार, इन सिम का इस्तेमाल आरोपी खुद करता था। आरोपी ने नौकरी पर रखी लड़कियों के बैंक खातों में भी पैसे डलवाए थे। अब पुलिस इन खातों में हुए लेन-देन और सिम कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी जुटा रही है। 52 लड़कियों के लिए कीपैड फोन, आरोपी के पास 6 मोबाइल कॉल सेंटर में लड़कियों को ग्राहकों से बातचीत के लिए 52 कीपैड मोबाइल फोन उपलब्ध करवाए गए थे। आरोपी खुद करीब 6 मोबाइल फोन ऑपरेट करता था। पुलिस अब इन मोबाइल और सिम कार्ड की कॉल डिटेल, संपर्क और अन्य तकनीकी जानकारी खंगाल रही है। इससे नेटवर्क में जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। रोज 100 कॉल का टारगेट, 5 से 10 लोग जाल में फंसते लड़कियों को रोजाना करीब 100 लोगों को कॉल करने का टारगेट दिया जाता था। इनमें से करीब 5 से 10 लोग निवेश के लिए तैयार हो जाते थे।आरोपी लोगों की जल्दी पैसा कमाने की चाहत को अपना हथियार बनाता था। कॉल के बाद लोगों को फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता। इस वेबसाइट पर आईडी बनवाई जाती और फिर स्टॉक व फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर रकम जमा करवाई जाती। यानी पहले फोन पर भरोसा पैदा किया जाता, फिर फर्जी वेबसाइट दिखाई जाती और इसके बाद निवेश के नाम पर पैसा ट्रांसफर करवाया जाता। विदेशी डोमेन वाली फर्जी वेबसाइट, फर्जी सर्टिफिकेट आरोपी ने साइबर ठगी के लिए फर्जी वेबसाइट भी तैयार करवाई थी। वेबसाइट का डोमेन विदेश में रजिस्टर्ड बताया जा रहा है। आरोपी को उम्मीद थी कि विदेशी डोमेन होने के कारण पुलिस के लिए वेबसाइट और डोमेन से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान नहीं होगा। इतना ही नहीं लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने विदेशी फर्जी सर्टिफिकेट भी बनावा रखा था। जिसे अपनी वेबसाइट पर डाल रखा था। अब पुलिस वेबसाइट, डोमेन रजिस्ट्रेशन, सर्वर और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। 10 से 30% कमीशन पर बैंक खाते किराए पर लिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए आरोपी ने कई बैंक खाते किराए पर ले रखे थे। कुछ बैंक खाते खरीदे भी गए। आरोपी अकाउंट होल्डर के चेक, नेट बैंकिंग और एटीएम तक अपने पास रखता था। किराए पर लिए गए खातों के लिए 10 से 30 प्रतिशत तक कमीशन तय था। ठगी की रकम खाते में आने के बाद अकाउंट होल्डर पैसा निकालता, अपना कमीशन काटता और बाकी रकम आरोपी को दे देता था।
वहीं, खरीदे गए बैंक खातों को आरोपी खुद ऑपरेट करता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसे कितने लोगों ने बैंक खाते उपलब्ध करवाए थे और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। 2-3 लड़कियों को बनाया ‘ट्रेनर’, नई लड़कियों का करती थीं ब्रेनवॉश आरोपी ने कॉल सेंटर में काम करने वाली 2-3 लड़कियों को बाकी कर्मचारियों से अलग तरीके से तैयार किया था। इन्हें नई लड़कियों को काम समझाने और उन्हें साइबर ठगी के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, एक लड़की पिछले करीब 5-6 महीने से आरोपी के साथ काम कर रही थी। काम सीखने के बाद वह खुद दूसरी लड़कियों को ट्रेनिंग देने लगी थी। इस तरह आरोपी ने कॉल सेंटर के अंदर ही एक छोटा ट्रेनिंग सिस्टम तैयार कर लिया था। आरोपी जॉब पर रखी लड़कियों को हर महीने 6 से 7 हजार रूपए महीना सैलरी देता था इसके अलावा ठगी की रकम पर भी अलग से कमीशन देता था। हर महीने 4 लाख से ज्यादा का खर्चा आरोपी ने गुमानपुरा में दो व छावनी इलाके में बिल्डिंग किराए पर ले रखी थी। तीनों का किराया 30-30 हजार रूपए बताया। तीनों जगह पर कॉल सेंटर चलाता था। इसके अलावा आरोपी ने बोरखेड़ा इलाके में नीलकंठ अपार्टमेंट में किराए से फ्लैट भी ले रखा था। जहां आरोपी अपनी पत्नी व तीन बेटियों के साथ रह रहा था। उसके रिश्तेदार भी उसी अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रह रहे थे। आरोपी जॉब रखी गई 50 से ज्यादा लड़कियों को हर महीने 6-7 हजार रूपए सैलरी देता था। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी हर महीने 4 लाख से ज्यादा खर्च करता था। पुलिस पूछताछ में आरोपी के पास दो अलग-अलग आधार कार्ड होने की बात भी सामने आई है। इनमें एक इंदौर और दूसरा जोधपुर का बताया जा रहा है। —————————- ये खबर भी पढ़ें-
कोटा में 3 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े, 5 गिरफ्तार:फर्जी वेबसाइट पर दिखाते थे लाखों का मुनाफा, 102 मोबाइल, 11 लैपटॉप जब्त
Back To Top