जयपुर में ‘खजाने’ के लालच में हवेलियों की खुदाई:बेचने से पहले खुद तुड़वा रहे मकान मालिक, जेसीबी के बजाय मजदूर हाथ से निकाल रहे पत्थर

जयपुर के 300 साल पुराने परकोटे में मकान तोड़ना किसी खजाने की तलाश से कम नहीं रह गया है। एक मकान की खुदाई में चांदी की सिल्ली और पुराने सिक्के मिलने के बाद लोगों के मन में भी अपनी हवेली/मकान के नीचे सोना-चांदी दबे होने की उम्मीद जाग गई है। पुराने मकान को ध्वस्त कर नया निर्माण कराने से पहले लोग बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। पहले जर्जर हो चुकी हवेली या मकान को गिराने का काम पहले ज्यादातर ठेकेदारों को दिया जाता था। अब मकान मालिक अपनी निगरानी में ये काम करवा रहे हैं। सीसीटीवी से मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पुराने मकानों को तोड़ने के लिए जेसीबी नहीं चल रही। मजदूरों से एक-एक दीवार, पत्थर और ईंट निकलवा रहे हैं। नतीजा- 10 दिन में पूरा होने वाला काम एक महीने तक चल रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भास्कर टीम ने चौड़ा रास्ता, तितलियों का रास्ता, धाबाई जी का रास्ता, ठठेरों का रास्ता, गोपालजी का रास्ता, घी वालों का रास्ता, जौहरी बाजार इलाके में पड़ताल की। स्थानीय मजदूर मकान मालिक के सुपरविजन में काम कर रहे थे। जेसीबी या अन्य मशीन के बजाय मजदूरों से एक–एक दीवार तुड़वाई जा रही थी। रिपोर्टर ने कुछ मकान मालिकों से बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी कैमरे पर आने को तैयार नहीं हुआ। 76 साल के बुजुर्ग ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब से एक हवेली में खुदाई के दौरान चांदी की सिल्ली और सिक्के मिले हैं, लोगों ने मकान बेचने से पहले डिमोलिश करना शुरू कर दिया है। लोग पहले खुद की मौजूदगी में मकान तुड़वा रहे हैं। ये संतुष्टि होने के बाद कि जमीन में गढ़ा हुआ खजाना नहीं है…बिल्डर या अन्य लोगों को बेच रहे हैं। 10 दिन के काम में महीना लगने लगा परकोटे में हवेलियां और पुराने मकाने में तोड़फोड़ का ठेका लेने वाले रामबाबू 20 साल से परकोटे में काम कर रहे हैं। बोले- खुदाई में चांदी निकलने के बाद से लोगों ने मकान में तोड़फोड़ कराने का तरीका बदल दिया है। पहले जेसीबी से 10 दिन में काम हो जाता था। अब हवेली मालिक मजदूरों से एक-एक पत्थर निकालने के लिए बोलते हैं। 10 दिन के काम में एक महीने से ज्यादा लग रहा है। कुछ लोग तो तोड़फोड़ के दौरान आसपास की दीवारों पर हाई क्वालिटी कैमरे पर लगवा रहे हैं, माॅनिटरिंग के लिए। सब को लगता है कि उनके भी मकान में चांदी-सोना निकलेगा। हवेली में बेसमेंट नहीं था फिर भी 20 फीट खोदी जमीन स्थानीय व्यापारी लाला राम ने बताया कि उनके परिचित ने एक लाख रुपए गज के हिसाब से 400 गज में बनी हुई हवेली खरीदी थी। बेचने वाली पार्टी ने खुद हवेली को डिमोलिश कराया। हवेली में बेसमेंट नहीं था, फिर भी खजाने की उम्मीद में जमीन को 20 फीट गहराई तक खुदवाया। क्यों है दबा हुआ खजाना मिलने की उम्मीद? जयपुर का परकोटा केवल पुरानी इमारतों, संकरी गलियों और ऐतिहासिक बाजारों का इलाका नहीं हैं। यहां की कई हवेलियां और मकान पीढ़ियों से एक ही परिवार के पास हैं। कई मकानों का निर्माण रियासतकाल में हुआ था। उस दौर में परकोटे के भीतर राजपरिवार से जुड़े लोगों, व्यापारियों, साहूकारों और अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े परिवारों की बड़ी-बड़ी हवेलियां बनीं। तब सोना-चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं था, व्यापार और संपत्ति का भी बड़ा माध्यम था। लोगों के पास नकदी, चांदी के सिक्के, सोने के आभूषण और कीमती धातुओं की संपत्ति होना असामान्य नहीं था। इसके अलावा बैंकिंग व्यवस्था हर परिवार तक नहीं पहुंची थी। कई परिवार अपनी संपत्ति घरों में सुरक्षित रखते थे। कीमती सामान को जमीन के नीचे दबाकर रखने की परंपरा भी थी। समय के साथ मकानों का स्वरूप बदलता रहा, लेकिन उनके पुराने तहखाने, बंद कमरे और जमीन के नीचे बने हिस्से आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय हैं। ऐसे में एक हवेली में चांदी मिलने की घटना के बाद लोगों के मन में उम्मीद जाग गई कि हो सकता है कि उनके मकान या हवेली के नीचे भी पूर्वजों की कोई संपत्ति हो। खजाना मिल गया तो क्या होगा? सरकार को बताना होगा : आपके पूर्वजों ने घर में 100 साल पहले या सैकड़ों साल पहले भी जमीन के भीतर खजाना छिपाया हो और एक दिन अचानक आपको मिल जाए तो आपको ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के तहत सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। जमीन के ऊपर या खुदाई में आपको मिलने पर भी खजाना कानूनी रूप से आपका नहीं हो जाता है। खजाने पर सरकार का हक : कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। वहीं राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। गड़ा हुआ खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों को राज्य में लागू करने के लिए बनाए गए हैं। कानूनी प्रवधानों के तहत ही गड़े खजाने पर सबसे पहला हक राज्य सरकार का है। क्या खजाना जिसका हक हो, उसका हो सकता है? हां, कानून के तहत हो सकता है। शर्त यह है कि व्यक्ति साबित कर दे कि ये खजाना उसके पूर्वजों का है, भले ही 100 साल से कम पुराना हो। खजाना किसी और को मिला हो, लेकिन कोई और यदि खजाना अपने बुजुर्गों का होने के तथ्य ले आए और कानूनी जांच में साबित कर दे तो सरकार उसे सौंप सकती है। 250 साल पुरानी हवेली से निकली थी चांदी की सिल्लियां जयपुर के माणक चौक थाना इलाके में 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की दीवार से खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया था। डीसीपी नॉर्थ करन शर्मा ने बताया कि हवेली मालिक राहुल सेठी ने माणकचौक थाने में इसकी FIR दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया कि 17 जुलाई को पुराने निर्माण को तोड़ने के दौरान तिजोरी निकली। तिजोरी में खजाना था जिसे ठेकेदार लेकर चला गया। गुप्त खजाने में करीब 10 से 15 चांदी की सिल्लियां थी, जिनमें से प्रत्येक का वजन लगभग 40 से 45 किलोग्राम था। इसके अलावा 14 से 15 सोने के सिक्के और करीब 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के भी थे। पुलिस ने जांच की और महेश उर्फ छोटू खटीक ने अपने साथी अनुज, जगदीश, रजत, ओमप्रकाश उर्फ पप्पू को गिरफ्तार कर चांदी की सिल्लियां रिकवर की। …. ये खबर भी पढ़िए… घर से स्कूल-कोचिंग जाने निकलीं 156 लड़कियां गायब, 47 नाबालिग:पुलिस ढूंढकर लाई तो सामने आया सच, सोशल मीडिया से अनजान शख्स के कॉन्टैक्ट में आईं राजस्थान में लड़कियों के लापता होने की ये महज 2-3 घटनाएं नहीं। जून से अब तक 156 लड़कियां गायब हुई हैं। कई घर लौट आईं तो किसी को पुलिस ढूंढकर लाई। लेकिन चिंताजनक बात ये है कि इनमें से 47 नाबालिग हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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