नमस्कार, मंत्री खर्रा जी का ढर्रा नहीं बदल रहा है। उन्हें बार-बार गुस्सा आ रहा है। सतीश बंसल जी की जेन-जी से ‘तालमेल’ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें डीग जिलाध्यक्ष बना दिया है और डीडवाना के पूर्व विधायक जी ने बैक-फुट पर तगड़ा शॉट लगा दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. खर्रा साहब को फिर आया गुस्सा पिछली दफा यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा जी को अपने पीए पर गुस्सा आ गया था। पीए दूर खड़ा ‘पटेलाई’ कर रहा था, जो मंत्रीजी को पसंद नहीं आई। पटेलाई करने का अधिकार सिर्फ मंत्रीजी को है। ऐसे में उनकी मौजूदगी में उनका अधीनस्थ पटेलाई करे, ये कैसे बर्दाश्त हो सकता है? इस बार सीकर के एक मैरिज गार्डन में मंत्रीजी को गुस्सा आ गया। हुआ यूं कि मैरिज गार्डन में दो कार्यक्रम एक साथ चल रहे थे। एक तरफ भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री ओमप्रकाश बिजारणियां का नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम चल रहा था। दूसरी तरफ भाजपा की संगठनात्मक बैठक की तैयारी हो रही थी। मंत्रीजी नागरिक अभिनंदन में मंच से संबोधन दे रहे थे। दूसरी तरफ संगठनात्मक बैठक के लिए कार्यकर्ताओं को बुलाने के लिए अनाउंसमेंट किया जा रहा था। अनाउंसमेंट ने मंत्रीजी के संबोधन को डिस्टर्ब कर दिया। मंत्रीजी चिल्ला पड़े- अरे बंद कर दो एक बार, क्या भच-भच कर रहा है बीच में? इसके बाद भी माइक थामे पदाधिकारी ने सोचा बात पूरी कर लूं। उसने फिर कुछ कहा और मंत्रीजी का पारा चढ़ गया। जोर से बोले-अरे बंद कर इसको, बिना मतलब की बकवास करता है। सवाल ये कि मंत्रीजी को बार-बार गुस्सा आ क्यों रहा है? उनके पास नगरीय विकास विभाग है। नगरीय विकास की ऐसी-तैसी बारिश ने कर रखी है। ऊपर से निकाय चुनाव आ रहे हैं, तो हर कोई आंदोलन के मूड में है। गर्मी बढ़ना लाजिमी है। 2. नेताजी का ‘पुराना’ डांस नेताजी को पार्टी ने जिलाध्यक्ष बनाकर उपकृत किया। लेकिन नेताजी इसका जश्न भी न मना सके। नेताजी से जलने वालों की कमी नहीं होती। तो हुआ यूं कि नेताजी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने की सूचना और संबंधित पत्र जैसे ही सोशल मीडिया के जरिए सामने आया। इसी के साथ किसी ने उनके डांस का पुराना वीडियो भी शेयर कर दिया। वीडियो में एक बाला बालों को झटके दे-देकर डांस कर रही है। नेताजी दोनों हाथों को उत्तर-दक्षिण दिशाओं में उठाकर लड़खड़ाते कदमों से बाला का साथ देने का का प्रयास कर रहे हैं। लड़खड़ाना, बड़बड़ाना, थरथराना, झूमना, घूमना, गिरना, घेरना…इन्हीं सब मिले-जुले प्रयासों को दर्शकों ने डांस का नाम दे दिया था। बाद में काफी हुज्जत हुई और सवाल उठे। गणगौर के त्योहार पर मेला कमेटी की ओर से हुए इस कार्यक्रम को नेताजी बुरा स्वप्न समझ कर भूल गए थे। लेकिन जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद न चाहते हुए भी विरोधियों ने उनके जख्म कुरेद दिए। अब गुपचुप देवदर्शन और मुंह मीठा करने के रस्म कर रहे हैं। वे जिसे शर्मिंदगी समझ रहे हैं, हो सकता है उसे जेन-जी के साथ ‘कॉर्डिनेशन’ की क्षमता समझकर पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दी हो। 3. चलते-चलते.. महाभारत हर युग में चलती है। किरदार बदल जाते हैं। समय बदल जाता है। स्थान बदल जाते हैं। महाभारत वही रहती है। डीडवाना के दिग्गज कांग्रेसी नेता थे रूपाराम डूडी। राजनीति में पारंगत। जनता में पैठ। उनका राजनीतिक जीवन जब चरम पर था तो छात्र राजनीति से चमके हनुमान बेनीवाल ने उन्हें अपना गुरु मान लिया। उनके नक्शे कदम पर चलने लगे। छोटी-छोटी बातें सीखी। रूपाराम जी भी हनुमान बेनीवाल को तवज्जो देते थे। प्यार करते थे। स्थान देते थे। लेकिन राजनीति में वक्त बदलता है। वक्त बदला। रूपराम जी नहीं रहे। हनुमान बेनीवाल ने भी भावभीने शब्दों में शोक प्रकट किया। रूपाराम जी की राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र चेतन डूडी ने संभाला और कांग्रेस का परचम लहराया। कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की ज्योति मिर्धा को हराने के लिए चेतन डूडी ने हनुमान बेनीवाल को सपोर्ट दिया। हनुमान बेनीवाल जीत भी गए। लेकिन यहीं डूडी से चूक हो गई। हनुमान बेनीवाल कांग्रेस के वोट समेट कर ले गए और डूडी की राजनीति पर इसका असर पड़ा। अब निकाय चुनाव से पूर्व कार्यकर्ताओं की एक बैठक में चेतन डूडी ने साफ कहा-विधानसभा-लोकसभा चुनाव में देखना ओवैसी आ जाएगा। हनुमान बेनीवाल आ जाएगा। कई आएंगे। अगर उनको वोट देना है तो मैं कह रहा हूं कि सीधे बीजेपी को वोट दे देना। कांग्रेस नेता को बीजेपी बर्दाश्त है लेकिन हनुमान बेनीवाल नहीं। चेतन डूडी का एक वीडियो है जिसमें वे क्रिकेट खेल रहे हैं और बैकफुट शॉट मार रहे हैं। मीटिंग में भी डूडी ने ऐसा ही शॉट मार दिया। इनपुट सहयोग- स्वप्निल सक्सेना (सीकर), गौरव माथुर (भरतपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

