राजस्थान हाईकोर्ट ने गौशालाओं में पेयजल संकट पर गहरी चिंता जताते हुए इसे प्रशासन की गंभीर विफलता माना है। हाईकोर्ट ने कहा-साल 2023-24 के बजट में ट्यूबवेल स्थापना की घोषणा के बावजूद हजारों गौशालाएं आज भी बुनियादी पेयजल सुविधा से वंचित हैं। ‘गौ ग्राम सेवा संघ’ की अवमानना याचिका पर जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि 21 जुलाई तक एक विस्तृत टाइम-बाउंड शेड्यूल प्रस्तुत किया जाए, जिसके अनुसार 1 अक्टूबर तक हर हाल में कार्य शुरू किया जा सके। इसके साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में भूजल उपलब्ध नहीं है, वहां वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था पर विचार किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि मानसून तक सभी गौशालाओं में अस्थायी पेयजल व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रखी जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 जुलाई 2026 को होगी।
गौशालाओं का हाल वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया- राजस्थान में कुल 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से 1,641 गौशालाओं में ट्यूबवेल उपलब्ध हैं, जबकि 2,220 गौशालाओं में अब भी पेयजल के लिए ट्यूबवेल की जरूरत है। इनमें से भी 740 गौशालाओं में तत्काल स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की आवश्यकता है। बेंच ने क्या कहा खंडपीठ ने कहा – साल 2022 से लगातार आदेश दिए जाने के बावजूद धरातल पर उम्मीद के अनुसार प्रगति (प्रोग्रेस) नहीं दिखी। सरकार की ओर से अस्थायी जलापूर्ति के दावे किए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि सभी जरूरतमंद गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल ढांचा विकसित कराना है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को तीन चरणों में तैयार कार्ययोजना की जानकारी दी। इसके तहत सरकारी भूमि पर स्थित 387, निजी भूमि पर संचालित 234 तथा दान या किराए की भूमि पर स्थित 323 गौशालाओं में क्रमवार पेयजल अवसंरचना विकसित की जाएगी। अधिकारियों ने वित्त विभाग से बजट स्वीकृति लेकर शीघ्र कार्य शुरू करने का भरोसा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चार वर्षों से काम शुरू नहीं होना चिंताजनक है और प्रथम दृष्टया यह अवमानना का मामला बनता है। हालांकि, अधिकारियों के आश्वासन को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्रवाई स्थगित रखी है। ये खामियां बनीं हाईकोर्ट की सख्ती की वजह साल 2022 के विस्तृत आदेश के बाद भी सरकार ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया। दूसरी तरफ, सरकार हर साल शराब (लिकर) और स्टांप ड्यूटी पर ‘गौ सेवा’ के नाम पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए का सरचार्ज जमा कर रही है। लेकिन इस राशि का उपयोग सरकार के अन्य खर्चों में किया जाने लगा। यानी गायों के नाम पर आने वाला पैसा उनकी सुविधाओं पर खर्च नहीं हो रहा है। साल 2022 में ‘गौ ग्राम सेवा संघ’ ने इन सभी गौशालाओं में गायों के पीने के पानी और अन्य सुविधाओं के लिए प्रयास शुरू किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने गायों की इस गंभीर समस्या और संवेदना को समझा।
गौशालाओं का हाल वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया- राजस्थान में कुल 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से 1,641 गौशालाओं में ट्यूबवेल उपलब्ध हैं, जबकि 2,220 गौशालाओं में अब भी पेयजल के लिए ट्यूबवेल की जरूरत है। इनमें से भी 740 गौशालाओं में तत्काल स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की आवश्यकता है। बेंच ने क्या कहा खंडपीठ ने कहा – साल 2022 से लगातार आदेश दिए जाने के बावजूद धरातल पर उम्मीद के अनुसार प्रगति (प्रोग्रेस) नहीं दिखी। सरकार की ओर से अस्थायी जलापूर्ति के दावे किए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि सभी जरूरतमंद गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल ढांचा विकसित कराना है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को तीन चरणों में तैयार कार्ययोजना की जानकारी दी। इसके तहत सरकारी भूमि पर स्थित 387, निजी भूमि पर संचालित 234 तथा दान या किराए की भूमि पर स्थित 323 गौशालाओं में क्रमवार पेयजल अवसंरचना विकसित की जाएगी। अधिकारियों ने वित्त विभाग से बजट स्वीकृति लेकर शीघ्र कार्य शुरू करने का भरोसा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चार वर्षों से काम शुरू नहीं होना चिंताजनक है और प्रथम दृष्टया यह अवमानना का मामला बनता है। हालांकि, अधिकारियों के आश्वासन को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्रवाई स्थगित रखी है। ये खामियां बनीं हाईकोर्ट की सख्ती की वजह साल 2022 के विस्तृत आदेश के बाद भी सरकार ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया। दूसरी तरफ, सरकार हर साल शराब (लिकर) और स्टांप ड्यूटी पर ‘गौ सेवा’ के नाम पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए का सरचार्ज जमा कर रही है। लेकिन इस राशि का उपयोग सरकार के अन्य खर्चों में किया जाने लगा। यानी गायों के नाम पर आने वाला पैसा उनकी सुविधाओं पर खर्च नहीं हो रहा है। साल 2022 में ‘गौ ग्राम सेवा संघ’ ने इन सभी गौशालाओं में गायों के पीने के पानी और अन्य सुविधाओं के लिए प्रयास शुरू किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने गायों की इस गंभीर समस्या और संवेदना को समझा।

