राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल लेक्चरर्स से वाइस प्रिंसिपल पद पर होने वाली पदोन्नति के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जारी कॉमन सीनियरिटी लिस्ट को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि साल 2015 की भर्ती प्रक्रिया से चयनित सभी व्याख्याताओं की नई कॉमन सीनियरिटी लिस्ट समान आधार पर तैयार की जाए और उसी के आधार पर चार महीने के भीतर वाइस प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने आदेश में कहा- साल 2015 की एक ही चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त सभी व्याख्याताओं को समान चयन वर्ष का लाभ मिलना चाहिए। राज्य सरकार को निर्देश दिया कि साल 2018 की भर्ती में अपनाए गए सिद्धांतों के अनुरूप नई कॉमन सीनियरिटी सूची तैयार कर राजस्थान शिक्षा सेवा नियम, 2021 के तहत पदोन्नति की कार्रवाई पूरी की जाए। प्रक्रिया में कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा आती है, तो सरकार आवश्यक आदेश या अधिसूचना जारी कर उसका समाधान करे। समानता के अधिकार का उल्लंघन: अधिवक्ताओं की दलील याचिकाकर्ताओं के सीनियर वकील मनोज भंडारी, डॉ. विकास बालिया, अध हनुमान सिंह चौधरी और विवेक श्रीमाली सहित अन्य वकीलों ने दलील दी कि साल 2015 की एक ही भर्ती प्रक्रिया से चयनित व्याख्याताओं के लिए अलग-अलग वरिष्ठता मानदंड अपनाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा- समान चयन प्रक्रिया से नियुक्त सभी अभ्यर्थियों की एक ही कॉमन वरिष्ठता सूची बनाई जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता सूची के आधार पर की गई पदोन्नतियां अनेक वरिष्ठ एवं पात्र व्याख्याताओं के वैधानिक अधिकारों को प्रभावित करेंगी। इसलिए पहले विधिसम्मत और समान सिद्धांतों पर आधारित नई वरिष्ठता सूची तैयार करना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने दिए नई सूची बनाने के निर्देश दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विवादित कॉमन वरिष्ठता सूची को रद्द करते हुए राज्य सरकार को चार महीने के भीतर नई सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इसी नई सूची के आधार पर उपप्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए।

