राजस्थान में 1 हजार से ज्यादा पूर्व सरपंचों के चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। इन पर भ्रष्टाचार, सरकारी फंड में गबन और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। ऐसे पूर्व सरपंचों की बाकायदा लिस्ट तैयार की जा रही है। सबसे ज्यादा मामले अलवर जिले से जुड़े हैं। पंचायतीराज विभाग के सचिव और आयुक्त जोगाराम का कहना है- कई पूर्व सरपंचों ने पद पर रहते हुए गड़बड़ी की और पंचायत के विकास के लिए आई सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। ऐसे पूर्व सरपंचों पर आगामी चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जा सकती है। किस जिले में कितने पूर्व सरपंचों पर मंडरा रहा है खतरा पंचायतीराज विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिन एक हजार से ज्यादा पूर्व सरपंचों पर चुनाव नहीं लड़ने की तलवार लटकी हुई है, उनमें सबसे ज्यादा अलवर जिले के हैं। अलवर और खैरथल-तिजारा जिला समेत बहरोड़ के 375 से अधिक पूर्व सरपंचों पर चुनाव नहीं लड़ने का खतरा मंडरा रहा है। जून, 2026 को अलवर जिला परिषद द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि जब तक ये गबन की गई राशि जमा नहीं कराएंगे, तब तक चुनाव नहीं लड़ने के लिए एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उदयपुर में 125, जयपुर में 70, बीकानेर में 40, डूंगरपुर में 35, बांसवाड़ा में 60, जैसलमेर में 25, बाड़मेर में 45, भरतपुर में 60, धौलपुर में 30, प्रतापगढ़ में 40, दौसा में 70, कोटा में 45, धौलपुर में 20 और करौली में 25 पूर्व सरपंचों पर चुनाव लड़ने पर तलवार लटकी हुई है। क्या कहता है पंचायतीराज अधिनियम राजस्थान हाईकोर्ट के वकील एवं कानूनी मामलों के जानकार एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल का कहना है कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत वित्तीय अनियमितता, गबन या भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि (जैसे सरपंच, प्रधान, या सदस्य) के चुनाव लड़ने पर कड़ी रोक (अयोग्यता) का प्रावधान है। 4 केस से समझिए, किस हद तक फैला है भ्रष्टाचार अलवर : 16 पंचायत समितियों में 4 करोड़ के गबन के केस ऑडिट टीम ने अलवर जिले की 16 पंचायत समितियों में गबन के केस पकड़े थे। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार रामगढ़ और लक्ष्मणगढ़ से जुड़ी ग्राम पंचायतों में 4 करोड़ से ज्यादा का गबन हुआ। कार्रवाई की जद में 300 पूर्व सरपंच-उपसरपंच आ रहे हैं। इनसे यह राशि वसूली जाएगी। अब ये सभी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच जिला परिषद की ओर से नोटिस जारी हो गए। एनओसी नहीं मिलती है तो ये चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। दौसा : निर्माण कार्यों में अनियमितता, 2 सरपंच निलंबित 1 सितंबर 2025 को दौसा में पंचायती राज विभाग ने दो सरपंचों को निलंबित कर दिया था। जिला परिषद के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र मीणा ने मंडावर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत गढ़ हिम्मतसिंह और उकरूंद के सरपंचों पर यह कार्रवाई की। उकरूंद ग्राम पंचायत सरपंच नरेन्द्र कुमार मीणा और गढ़ हिम्मतसिंह की सरपंच गुड्डी देवी पर निर्माण कार्यों में अनियमितता और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था। मामले की जांच के बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया। ग्राम पंचायत से संबंधित सभी गतिविधियों में भाग लेने पर भी बैन लगा दिया गया। अब इन पर चुनाव नहीं लड़ने का खतरा मंडरा रहा है। धौलपुर : पूर्व सरपंच 5 साल के लिए अयोग्य घोषित 21 जनवरी, 2025 को धौलपुर जिले की बसेड़ी पंचायत समिति के पूर्व सरपंच रामदीन कुशवाह को पांच वर्ष के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। तत्कालीन भरतपुर संभागीय आयुक्त रश्मि गुप्ता ने अयोग्य घोषित करने के आदेश जारी किए थे। पूर्व सरपंच रामदीन कुशवाह पर विभिन्न निर्माण कार्यों में अनियमितताओं का आरोप था। मामले की जांच नवंबर 2017 में शुरू हुई, जब सहायक शासन सचिव (जांच) ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद धौलपुर को जांच के निर्देश दिए। जांच में कुल 7 लाख 49 हजार 200 रुपए की अनियमितता पाई गई। कुशवाह ने इस राशि का 50 प्रतिशत यानी 3 लाख 74 हजार 600 रुपए 27 जुलाई 2024 को पंचायत समिति कार्यालय में जमा करा दिए। राशि जमा करने से यह स्पष्ट हो गया कि वे लगाए गए आरोपों से सहमत थे। वर्तमान में नगरपालिका बसेड़ी के चेयरमैन प्रतिनिधि के पद पर कार्यरत कुशवाह को पंचायती राज अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए यह कार्रवाई की गई है। उदयपुर : तत्कालीन सरपंच को 1 साल की कैद पिछले साल उदयपुर जिले में 13 साल पुराने केस में एसीबी 2 कोर्ट ने नामांतरण खोलने के बदले 5 हजार रुपए की घूस मामले में कलड़वास के तत्कालीन सरपंच को एक साल कैद की सजा सुनाई थी। एकलिंगपुरा निवासी मांगीलाल डांगी ने 7 जनवरी 2012 को एसीबी में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि उनके ताऊजी कन्ना डांगी की एकलिंगपुरा में 2 से 2.5 बीघा जमीन है। गलती सुधारने और हक त्याग का नामांतरण खुलवाने के लिए उन्होंने रिलीज डीड की कॉपी पटवारी को दी। पटवारी ने सरपंच से मिलने को कहा। दो जनवरी 2012 को वह कलड़वास सरपंच सत्यनारायण सालवी से मिले और नामांतरण खोलने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। 6 जनवरी को वह फिर सरपंच से मिले, जिसने नामांतरण खोलने के नाम पर 5 हजार रुपए मांगे। 8 जनवरी, 2012 को एसीबी ने सरपंच को 5 हजार की घूस लेते गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। एसीबी-2 कोर्ट की जज संदीप कौर ने कलड़वास निवासी तत्कालीन सरपंच सत्यनारायण सालवी को दोषी करार दिया। उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एक साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

