गमछा डांस और अपने चुटीले भाषणों से सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने वाले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इस बार एक अलग वजह से चर्चा में हैं। सीकर के अखैपुरा टोल प्लाजा पर उनकी गाड़ी रोकने के बाद टोल छूट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। इस घटना से कई सवाल खड़े हो गए हैं कि डोटासरा की गाड़ी को टोल पर क्यों रोका गया? क्या विधायकों की गाड़ी का भी टोल लगता है? किन-किन वाहनों को टोल में छूट मिलती है? और क्या है टोल टैक्स का गणित? जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अखेपुरा टोल की 11 नंबर लेन में डोटासरा की गाड़ी के साथ क्या हुआ? जवाब: 11 सितंबर की सुबह करीब 8:55 बजे गोविंद सिंह डोटासरा की गाड़ी पलसाना के अखेपुरा टोल प्लाजा की लेन नंबर 11 पर पहुंची। टोल कर्मचारी ने गाड़ी रोककर ड्राइवर से टोल कार्ड मांगा और बैरियर नहीं खोला। ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी में लक्ष्मणगढ़ विधायक और राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा बैठे हैं। आरोप है कि कर्मचारी ने डोटासरा को पहचानने से इनकार करते हुए कहा कि टोल देना पड़ेगा। इसके बाद विवाद बढ़ गया। कुछ देर तक गाड़ी नहीं निकलने पर डोटासरा खुद नीचे उतरे। उन्होंने टोल कर्मचारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। करीब 5 मिनट तक विवाद जारी रहा। मामला खत्म नहीं हुआ तो डोटासरा ने सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत को फोन कर शिकायत की और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एसपी के निर्देश पर रानोली थाना पुलिस टोल प्लाजा पहुंची और दो टोलकर्मियों को हिरासत में लिया। इसके बाद डोटासरा वहां से रवाना हो गए। हालांकि टोल प्लाजा प्रबंधन की कहानी कुछ अलग है। मैनेजर का कहना है कि डोटासरा उस दिन दूसरी गाड़ी से आए थे। इसलिए कर्मचारी उन्हें पहचान नहीं पाया और सामान्य प्रक्रिया के तहत वाहन को रोककर टोल कार्ड मांगा। रानोली थानाधिकारी के मुताबिक टोल प्लाजा पर अभद्रता की शिकायत मिलने के बाद दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार विवाद में वास्तव में क्या बातचीत हुई और अभद्रता किस स्तर पर हुई, इसकी जांच की जा रही है। सवाल-2: क्या विधायक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को टोल टैक्स से छूट मिलती है? जवाब: सिर्फ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष होने के कारण डोटासरा की गाड़ी को टोल में छूट नहीं मिलती। लेकिन वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी हैं और यहीं से इस मामले का नियम वाला हिस्सा जुड़ता है। नेशनल हाईवे के टोल नियमों में राज्य के विधायक और विधान परिषद के सदस्यों को अपने संबंधित राज्य में टोल छूट दी गई है। इसके लिए पहचान संबंधी दिक्कत होने पर संबंधित विधानसभा/विधान परिषद से जारी पहचान-पत्र दिखाना जरूरी है। यानी राजस्थान के विधायक को राजस्थान में निर्धारित शर्तों के तहत टोल नहीं देना होता। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टोल छूट संबंधी व्यवस्था में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों यानी MLA और विधान परिषद वाले राज्यों में MLC को निर्धारित शर्तों के तहत टोल छूट वाली श्रेणी में रखा गया है। सवाल-3: विधायक की टोल छूट किस गाड़ी पर लागू होती है? क्या काफिले की हर गाड़ी फ्री होती है? जवाब: टोल छूट किसी नेता के पूरे काफिले को सामान्य तौर पर नहीं मिलती है। जिस वाहन पर छूट का प्रावधान लागू है, उसकी पहचान और संबंधित दस्तावेज/FASTag की स्थिति देखी जाती है। इसलिए अगर विधायक के साथ समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं या अन्य निजी वाहनों का काफिला चल रहा है, तो हर गाड़ी को सिर्फ काफिले में शामिल होने के आधार पर छूट मिलने का दावा सही नहीं होगा। यही वजह है कि टोल प्लाजा पर वाहन की पहचान, FASTag और छूट प्राप्त श्रेणी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अगर पात्र वाहन की पहचान सिस्टम में नहीं हो पाती या FASTag से जुड़ी तकनीकी समस्या आती है, तो मौके पर विवाद की स्थिति बन सकती है। सवाल-4: 11 नंबर लेन क्या VIP लेन थी? क्या टोल प्लाजा पर VIP के लिए अलग लेन का नियम है? जवाब: सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात को लेकर है। किसी टोल प्लाजा की कोई खास लेन नंबर- जैसे 1 या 11 है, सिर्फ इसलिए VIP लेन घोषित है, ऐसा सामान्य NHAI नियम मान लेना सही नहीं होगा। अलग-अलग टोल प्लाजा पर लेन का इस्तेमाल वहां की व्यवस्था और ऑपरेशन के हिसाब से अलग हो सकता है। हां, टोल प्लाजा के संचालन में काफिले या विशेष वाहनों की आवाजाही के दौरान टोल स्टाफ और शिफ्ट इंचार्ज के बीच समन्वय जैसी व्यवस्थाएं होती हैं। इसलिए किसी खास लेन में VIP काफिला पहुंचने को सीधे तौर पर ‘VIP के लिए आरक्षित लेन’ कहना तभी सही होगा, जब उस टोल प्लाजा के लिए ऐसा कोई विशेष आदेश या संचालन प्रोटोकॉल मौजूद हो। सवाल-5: टोल बूथ पर किन-किन लोगों और वाहनों को छूट मिलती है? जवाबः नेशनल हाईवे पर टोल छूट की व्यवस्था कुछ तय श्रेणियों के लिए है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जज, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जज, सांसद समेत कई संवैधानिक पदों पर रहने वाले लोगों के वाहन शामिल हैं। इनके अलावा राज्य विधानसभा के विधायक और विधान परिषद के सदस्य भी अपने संबंधित राज्य में निर्धारित शर्तों के तहत टोल छूट के पात्र हैं। छूट सिर्फ वीआईपी या जनप्रतिनिधियों तक सीमित नहीं है। आधिकारिक ड्यूटी पर चलने वाले रक्षा और अर्धसैनिक बलों के वाहन, पुलिस वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन और नेशनल हाईवे के रखरखाव में लगे वाहन भी निर्धारित नियमों के तहत टोल से मुक्त हैं। इसके लिए भी कुछ शर्तें हैं। उदाहरण के लिए, किसी पदाधिकारी के निजी तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हर वाहन को सिर्फ पद के आधार पर छूट नहीं मिल जाती। छूट संबंधित श्रेणी, वाहन और निर्धारित पहचान-पत्र या दस्तावेज के आधार पर मिलती है। सवाल-6: टोल प्लाजा पर VIP काफिले को रोकने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होती है? जवाब: टोल प्लाजा का संचालन NHAI के साथ अनुबंधित एजेंसी/ऑपरेटर के जरिए होता है। टोलकर्मियों की जिम्मेदारी सिर्फ टैक्स लेना नहीं, बल्कि लेन संचालन, FASTag व्यवस्था और ट्रैफिक का सुचारू संचालन भी है। अगर किसी पात्र छूट प्राप्त वाहन की पहचान में समस्या आती है तो उसे नियम के मुताबिक संभालना टोल स्टाफ की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, वाहन की छूट साबित करने के लिए निर्धारित पहचान/प्रक्रिया का पालन करना वाहन पक्ष की भी जिम्मेदारी है। ऐसी स्थिति में विवाद बढ़ने के बजाय टोल सुपरवाइजर या शिफ्ट इंचार्ज के स्तर पर तत्काल सत्यापन और समन्वय किया जाना ज्यादा उचित होता है। क्योंकि टोल लेन में लंबी बहस से न केवल संबंधित वाहन, बल्कि पीछे आने वाला पूरा ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।

