RPSC अध्यक्ष ने इन्टरनल ऑडिट कराकर तैयार किया रोड-मैप:दूर होंगी कमियां, बनेगा मजबूत सुरक्षित सिस्टम, AI से कॉपी की जांच होगी

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) प्रशासन ने गोपनीयता व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक नया रोड मैप तैयार कर लिया है। इसमें मानवीय-भौतिक संसाधन के साथ अत्याधुनिक तकनीक का भी पूरा उपयोग होगा। साथ ही नए बदलाव व सुविधा बढ़ाने के लिए सरकार की मदद ली जाएगी। ताकि जो आयोग की ताकत है, उसे बरकरार रखा जाए। जो कमियां हैं, उन्हें दूर कर एक मजबूत सुरक्षित सिस्टम बनाया जा सके। पिछले ढाई साल से आयोग में सदस्य ले.कर्नल केसरी सिंह को करीब एक महीने पहले (20 जून को) अध्यक्ष पद का कार्यभार सौंपा गया। उनके अनुभव का असर अब दिखने लगा है। केसरी सिंह ने इस दौरान न केवल इंटरनल ऑडिट कराया, बल्कि कमियों को चिह्नित कर भविष्य के लिए रोड मैप भी तैयार कर लिया। साथ ही इसके लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय कर दी और मोनिटरिंग सिस्टम भी बनाया है। सबसे पहले कराई इन्टरनल ऑडिट, सदस्यों ने समझी कार्यप्रणाली सूत्रों के अनुसार- अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करते ही सबसे पहले ले. कर्नल केसरी सिंह ने इंटरनल ऑडिट कराई। इसमें आयोग के हर विभाग – परीक्षा, गोपनीय, विधि, आईटी और प्रशासन की कार्यप्रणाली का बारीकी से निरीक्षण कराया गया। पिछले सालों के रिकॉर्ड, फाइलों के निपटारे की गति, कर्मचारियों की जवाबदेही और पेपर की सुरक्षा व्यवस्था को खंगाला गया। इसकी रिपोर्ट तैयार की गई। इसके अनुरूप ही रोडमैप तैयार किया गया है। केसरी सिंह की पहल पर हाल ही में सभी सदस्यों को आयोग की विभिन्न शाखाओं का अवलोकन कराकर कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया गया। कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट, कैडिडेट्स की संख्या बढ़ाना RPSC में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट की व्यवस्था फिलहाल सिर्फ 5 हजार अभ्यर्थियों के लिए है। इसी वजह से RAS, स्कूल लेक्चर जैसी बड़ी भर्तियों में पेपर-पेन मोड पर निर्भर रहना पड़ता था। आयोग ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को 5 गुना बढ़ाने का टारगेट सेट किया है। यानी अब एक साथ 25 हजार अभ्यर्थी CBT दे सकेंगे। इसके लिए कईं स्तर पर काम करने की प्लानिंग की गई है। प्रदेश में कईं शहरों में बड़े CBT सेंटर बनाए जाएंगे। उनकी मॉनिटरिंग RPSC खुद करेगा। एक साथ 25 हजार लॉगिन झेलने के लिए डेडिकेटेड सर्वर और बैकअप सिस्टम लगेगा। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हर सेंटर पर 360 डिग्री कैमरा, फेस रिकग्निशन और लाइव मॉनिटरिंग। कोई मोबाइल या डिवाइस अंदर नहीं जा पाएगा। सीबीटी से पेपर लीक की सम्भावना लगभग नामुमकिन, रिजल्ट भी जल्दी मिलेगा और मानवीय त्रुटियों की सम्भावना कम रहेगी। AI की मदद, 20% से ज्यादा फर्क तो दोबारा जांच लिखित परीक्षाओं में नंबर देने में गड़बड़ी को लेकर कोई शिकायत नहीं हो इसके लिए आयोग कॉपी जांच में एआई का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। यूपीएससी इस पर काम कर रहा है और RPSC भी अब AI की मदद लेगा। AI स्कैन करके ये तय करेगा कि नंबर तर्कसंगत हैं या नहीं। आयोग में कॉपी की जांच दो एग्जामिनर की ओर से की जाती है। इसमें वैरीएशन होने पर तीन एग्जामिनर की ओर से जाती है। अब आयोग एआई की मदद से कॉपी की जांच कराने की कवायद कर रहा है। तीनों एग्जामिनर के नंबरों में 20 प्रतिशत का अंतर आने पर ऐसा होगा। इसमें कैंडिडेट्स को कोई नुकसान नहीं हो, इसलिए संशय की स्थिति फिर से एग्जामिनर से चेक कराएंगे। ताकि मानवीय त्रुटि को दूर किया जा सके। इससे त्रुटियों की गुंजाइश खत्म होगी और अभ्यर्थी को भरोसा होगा कि नंबर मेहनत के हिसाब से मिले हैं। सम्भाग स्तर पर एग्जाम हॉल बनाने की कवायद आज भी इंटरव्यू, कुछ परीक्षाएं और दस्तावेज सत्यापन सिर्फ अजमेर मुख्यालय पर आयोग में होते हैं। दूर दराज के कैंडिडेट्स को आवागमन में परेशानी होती है। इसके लिए आयोग ने सरकार को चिट्ठी लिखी है कि राजस्थान के 6 संभागों में 5000 क्षमता वाले स्थायी एग्जाम कॉम्प्लेक्स बनाए जाएं। इसमें कंप्यूटर, इंटरव्यू बोर्ड रूम, स्ट्रॉन्ग रूम, हेल्प डेस्क और वेटिंग एरिया आदि हो। इससे अभ्यर्थी को अजमेर आने की जरूरत नहीं होगी और सुरक्षा ज्यादा होगी। साथ ही भविष्य में कई जिलों में परीक्षा और इंटरव्यू संभव हो सकेंगे। इससे समय व धन की बचत होगी। तय तारीख पर हो एग्जाम, कैलेंडर सिस्टम लागू कैलेंडर सिस्टम के अनुसार तय तारीख पर एग्जाम हो और कोई परीक्षा में बदलाव नहीं करना पडे़। इसके लिए पहले से आगे होने वाले एग्जाम डेट पूरी तैयारी के साथ डिसाइड करने का रोड मैप डिसाइड किया है। साथ ही पहले से तय एग्जाम की डेट पर एग्जाम हो, इसके लिए पुख्ता व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए है। ताकि कैंडिडेट्स परेशान नहीं हो। अगर इसमें बदलाव होगा तो इसके लिए जवाबदारी तय होगी। पेपर की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम परीक्षा आयोजन व पेपर की सुरक्षा की सुरक्षा के लिए कईं गोपनीय इंतजाम किए जा रहे हैं। आयोग का प्रयास है कि ऐसा सिस्टम तैयार हो, जिसमें सेंध लगाना नामुमकिन हो। आयोग के अध्यक्ष केसरी सिंह आईटी एक्सपर्ट भी है और भारतीय सेना में मिसाइल टेक्नॉलोजी से जुडे़ रहे। ऐसे में पेपर की सुरक्षा में एआई का सदुपयोग कैसे हो, इस पर भी तैयारी की जा रही है। समयबद्ध हो डीपीसी, विभागों में हो समन्वय डीपीसी समय पर हो, इसके लिए सदस्यों के बीच संतुलित रूप से विभागों का बंटवारा कर जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही आयोग की ओर से जल्दी से जल्दी डीपीसी बैठक शेड्यूल की जाएगी। आयोग प्रबन्धन का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर ऐसे प्रकरणों का निस्तारण कर दिया जाता है। साथ ही आयोग के सभी विभागों में आपसी समन्वय हो, इसके लिए भी रूपरेखा तैयार की गई है। ताकि आपसी तालमेल से काम समय पर हो सके। चाहे परीक्षा आयोजन का मामला हो, सुरक्षा का हो, या विभागीय कामकाज, इसकी पूरी प्लानिंग की गई है। अनुभव व जानकार होने का मिल रहा फायदा जानकारों का कहना है कि नियमानुसार 6 साल या 62 साल की उम्र तक के लिए, जो भी कम हो, कोई भी अध्यक्ष रह सकता है, लेकिन सरकार की ओर से अधिकांश बार रिटायर्ड अफसरों को मौका दिया जाता रहा है। ऐसे में करीब दो साल अध्यक्ष रह पाते हैं। आयोग की कार्यप्रणाली व व्यवस्थाओं को समझने के लिए काफी समय लग जाता है। इस बात को पूर्व अध्यक्षों ने भी स्वीकार किया है। नियुक्त किए जाने वाले अध्यक्ष को काम करने के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता। लेकिन केसरी सिंह पिछले ढाई साल से आरपीएससी के मेंबर है और आयोग की कार्यप्रणाली से पूर्व में परिचित है। सेना की पृष्ठभूमि से आने की वजह से वो समयबद्धता और प्लानिंग पर जोर देते हैं। उनके पहले से आयोग के अनुभव व कार्यप्रणाली का जानकार होने का फायदा मिल रहा है, कि वे पद ग्रहण करने के साथ ही एक्टिव हो गए है। बता दें कि उनको 9 अक्टूबर 2023 को आयोग का सदस्य बनाया गया और उनका कार्यकाल 8 अक्टूबर 2029 तक है। ………… पढें ये खबर भी… RPSC अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी बोले-नई भर्तियां समय पर करवाएंगे:गति और गोपनीयता के निर्देश दिए, कहा- जाति-धर्म नहीं, निष्ठा ही हमारी पहचान राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में सोमवार को सदस्यों के लिए विशेष ओरिएंटेशन और कार्यालय निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह की पहल पर हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयोग की कार्यप्रणाली, तकनीकी प्रक्रियाओं और विभागीय जिम्मेदारियों की बेहतर समझ विकसित कर पारदर्शिता, जवाबदेही और समन्वय को मजबूत करना था। (पूरी खबर पढ़ें)
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