जयपुर में जामिया-तुल-हिदायत ट्रस्ट की वक्फ संपत्तियों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में जांच की रफ्तार सवालों के घेरे में है। करीब 80 बीघा वक्फ भूमि में से 3 बीघा 11 बिस्वा जमीन की कथित अवैध बिक्री के मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब एक साल बाद भी 27 नामजद आरोपियों में से केवल एक की गिरफ्तारी हो सकी है। पूर्व ट्रस्टी को किया गया गिरफ्तार मामले में नामजद पूर्व ट्रस्टी मोहम्मद जियाउर्ररहीम को जयसिंहपुरा खोर थाना पुलिस ने 18 मई को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने उसे ज्यूडिशल कस्टडी में जेल भेज दिया। फर्जी दस्तावेजों से वक्फ भूमि बेचने का आरोप इस संबंध में 6 सितंबर 2025 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वक्फ संपत्ति घोषित भूमि के एक हिस्से को फर्जी दस्तावेजों और आपराधिक साजिश के जरिए बेचने का प्रयास किया गया। एफआईआर में मोहम्मद जियाउर्ररहीम, नासिर खान सड़वा, अबरार अहमद हबीबी, मसरूर अहमद, समीर खान सहित 27 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनामी आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर नामजद आरोपी नासिर खान सड़वा को पुलिस ने फरार घोषित करते हुए उस पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। इसके बावजूद वह अब तक गिरफ्तारी से बचा हुआ है। वहीं, मामले के कथित मुख्य आरोपी बताए जा रहे अबरार अहमद हबीबी भी अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए हैं। फर्जी स्टांप और दस्तावेज तैयार करने के आरोप शिकायतकर्ता मोहम्मद शोएब और अन्य लोगों का आरोप है कि अबरार अहमद हबीबी ने कथित रूप से फर्जी स्टांप और दस्तावेज तैयार कर वक्फ भूमि के सौदे को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसियां इस आरोप सहित अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। जांच की प्रभावशीलता पर उठ रहे सवाल मामला दर्ज होने के करीब एक वर्ष बाद भी अधिकांश आरोपी फरार हैं। 27 नामजद आरोपियों में से केवल एक गिरफ्तारी होने और इनामी आरोपी नासिर खान सड़वा समेत अन्य प्रमुख आरोपियों के पुलिस गिरफ्त से बाहर रहने के कारण जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। जयसिंहपुरा थाना पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की जांच विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।

