नमस्कार सवाई माधोपुर में अशोक गहलोत के नाम का प्लेन उड़ाकर दिखाया गया। ईंधन बचाने के लिए डिप्टी सीएम और मंत्रीजी ने कार शेयर की। चूरू में सांसद को युवक ने खूब खरी-खरी सुनाई और गर्मी में पुलिसकर्मी ने दिखाई दरियादिली। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. रिमोट और पायलट पूर्व सीएम साहब अपने बयानों से कभी बयार ले आते हैं तो कभी तूफान खड़ा कर देते हैं। एक दिग्गज नेताजी का कहना है कि वे सांस भी लें तो समझो राजनीति है। क्या कॉम्प्लीमेंट है। खैर, इधर वे सवाई माधोपुर पहुंचे। विधायक इंदिरा मीणा ने स्वागत किया। पूर्व सीएम को एक युवक से मिलवाया, जिसने रिमोट से उड़ने वाला प्लेन बनाया है। प्लेन गहलोत साहब को समर्पित करते हुए उन्हीं के नाम पर रखा गया है। प्लेन में पायलट के केबिन की जगह अशोक गहलोत साहब का चेहरा चिपकाया हुआ था। प्लेन बढ़िया था। इसने आसमान में खूब उड़ान भरी। लेकिन सारा कंट्रोल नीचे रिमोट से हो रहा था। पूर्व सीएम साहब ने युवक के प्रयास को सराहा और पीठ थपथपाई। फिर अपने हेलिकॉप्टर में सवार होकर जयपुर के लिए उड़ान भरी। लगता है कि उन्हें ‘रिमोट’ से ज्यादा अपने ‘पायलट’ पर भरोसा है। 2. हौसला..ईंधन..बदलाव प्रधान मुखियाजी के ईंधन बचाने के आह्वान के बाद डिप्टी सीएम ने खूब डेडिकेशन दिखाया है। इस मामले में वे धुरंधर साबित हो रहे हैं। हौसला..ईंधन…बदलाव को जीवन में उतार रहे हैं। पहले रोडवेज बस में सफर किया। फिर आवास परिसर में साइकिल का चक्कर लगाया। अब साथी मंत्री अविनाश गहलोत के साथ कार की राइड शेयर कर ली। इसी तरह हौसला दिखाने से ईंधन बचेगा। ईंधन बचाने के लिए यह बदलाव अच्छा है। 3. सांसद महोदय और समस्या सांसद जी को समस्याएं सुनाते-सुनाते युवक सांसद जी को ही समस्या बताने लगा। बोला- आप क्रेडिट लेने आए हो। आपको काम ही कराना होता तो टाइम पर आते। यह सब तब हुआ जब चूरू सांसद राहुल कस्वां नगर परिषद पहुंचे और अधिकारियों की बैठक ली। पानी निकासी को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद लोगों की समस्याएं सुनने लगे। इस दौरान ऊंटों के प्रिंट की शर्ट पहने युवक सामने आया। उसके पास समस्याओं का काफिला था। उसने कहा- आप भी तब आए जो जब मानसून सिर पर है। पिछली बार अगर एक भी कर्मचारी की नौकरी खा जाते तो अब तक काम हो जाता। सांसद का गला सूखा। उन्होंने पानी पिया। हाथ जोड़े और बहस छोड़ बढ़ने लगे। युवक की आवाज की आवाज का डेसिमल बढ़ता गया। वहां मौजूद एक सज्जन ने युवक को खा जाने की नजर देखते हुए कहा- चुप कर। युवक और जोर से चिल्लाकर बोला- वोट दिया है तो बोलेंगे। अपनी बात रखेंगे। सब के सब क्रेडिट लेने आए हो। 4. चलते-चलते.. ये धरती जितनी इंसान की है उतनी ही जानवरों की है। पेड़-पौधों की है। कीट-पतंगों की है। इंसान वही जिसे दूसरे की जरूरत का सम्मान करना आए। इंसान ने धरती पर कब्जा कर लकीरें खींच दी। देश बना लिए। संसाधनों के लिए लड़ने लगा। कुदरत ने सबके लिए व्यवस्था की थी- चींटी के लिए कण भी था और हाथी के लिए मण भी। इंसान का पेट अंधा कुआ साबित हुआ। इसकी भूख अन्न-जल से नहीं भरती। यह नदी-पहाड़-जंगल सब खा गया। गर्मी चरम पर है। चौमासा आने में वक्त है। राजस्थान पुलिस के एक जवान ने देखा कि टोंटी से गिरती बूंद-बूंद पीने के लिए बकरी मशक्कत कर रही है। उसने नल के नीचे हथेली से ओक बना ली। बकरी प्यास बुझाने लगी। वाकई, इंसान वही जिसे दूसरे की जरूरत का सम्मान करना आए। इनपुट सहयोग- नरेश भाटी (चूरू)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

