राजस्थान में नकली सीमेंट फैक्ट्री चल रही है। दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन टीम ने पहली बार ऐसी फैक्ट्री पकड़ी जहां मिट्टी, राख और कंक्रीट से सीमेंट बनाई जा रही थी। फैक्ट्री मालिक को जब बड़ी डील का लालच दिया तो उसने बताया कि वो कई सरकारी कामों में इस तरह के सीमेंट की डिलीवरी दे चुका है। जब सैंपल में मिले सीमेंट की जांच करवाई तो पता चला कि असली सीमेंट से ये 9 गुना कमजोर है। इसमें करीब 46 फीसदी कचरा है। ऐसे में जिस भी बिल्डिंग या निर्माण काम में इसका इस्तेमाल होगा, ढहने और टूटने का खतरा रहेगा। असली सीमेंट के 50 किलो के कट्टे की कीमत 380 से 400 रुपए है, जबकि मिलावटी 250 रुपए में मिल जाती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं कि ब्यावर, पाली, जोधपुर और अजमेर के ग्रामीणों इलाकों में सरकारी प्रोजेक्ट में मिलावटी सीमेंट सप्लाई हो रही है। सच जानने के लिए रिपोर्टर ठेकेदार बनकर गुड़िया गांव में एक फैक्ट्री में पहुंचा। फैक्ट्री मालिक से सीमेंट को लेकर डील की। रिपोर्टर : सीमेंट चाहिए। क्या भाव रहेगा? फैक्ट्री मालिक: 250 रुपए प्रति बैग। रिपोर्टर : सही दाम लगाइए। रोज चाहिए। ठेका चल रहा है। फैक्ट्री मालिक: हमारे दो फैक्ट्री हैं। कितने कट्टे चाहिए़? रिपोर्टर : पहले सैंपल के लिए एक बैग चाहिए। बैग किस नाम से होगा? फैक्ट्री मालिक: सुपर अल्ट्रा सीमेंट। ऊपर जंग रोधक सीमेंट लिखा होगा। इस ब्रांड की डिमांड है। अभी-अभी एक गाड़ी लोड होकर गई है। ब्यावर नगर परिषद के सीसी रोड के काम में यही सीमेंट गई है। रिपोर्टर : कौन-कौन से ग्रेड में सीमेंट दोगे? फैक्ट्री मालिक: 53 और 43 ग्रेड OPC अभी खूब बिक रही है। 500 कट्टों की एक गाड़ी रवाना होती है तो दूसरी लोड होने लग जाती है। रिपोर्टर : 100 कट्टे चाहिए। फैक्ट्री मालिक: ट्रैक्टर से भिजवा देंगे। झालामंड और बनाड रोड पर भी हमारा ही माल जा रहा है। वहां रोड का ठेका चल रहा है। रिपोर्टर : हमें महंगे ब्रांड के बैग में चाहिए। फैक्ट्री मालिक: ब्रांड का बैग यही है। माल का बिल मिल जाएगा। रिपोर्टर : माल तो अच्छा है न? फैक्ट्री मालिक: चाहो तो चेक कर लो। 1990 से चला रहे हैं। 5 लाख कट्टे भी दे देंगे। गोमती चौराहा, ब्यावर से आसींद तक बनी सीसी रोड, ब्यावर में जालिया से बिलूपूरा रोड पर भी हमारी ही सीमेंट काम आ रही है। रिपोर्टर : आपके यहां ‘क्यूब टेस्ट’ नहीं होता क्या? रेट क्या रहेगी? फैक्ट्री मालिक: टेस्ट नहीं होता। रेट 250 रुपए। पहुंचाने का किराया और मजदूरी सब हमारी। हम बाहर से क्लींकर मंगवाते हैं और यहीं सीमेंट तैयार करते हैं। ये तो छोटी फैक्ट्री है। दूसरा फैक्ट्री डेढ़ किमी दूर है। रोज 2 हजार सीमेंट बैग तैयार होते हैं। फैक्ट्री अवैध, सीमेंट भी मिलावटी, भास्कर के पास 4 सबूत सबूत 1 : लैब रिपोर्ट- 5% की जगह 45.92% नहीं घुलने वाला कचरा फैक्ट्री मालिक ने जो कट्टा दिया भास्कर ने उसकी जांच श्री इंजनियरिंग लैब प्राइवेट लिमिटेड में कराई। टेस्ट में सामने आया कि सीमेंट में अघुलनशील अवशेष (Insoluble Residue) की मात्रा 45.92% थी, जबकि ये अधिकतम 5% होनी चाहिए। आर्किटेक्ट अरुण गुप्ता ने बताया- इसका सीधा मतलब यह है कि इस सीमेंट में रेत, मिट्टी, फ्लाई ऐश (राख) या किसी अन्य सस्ते और निष्क्रिय (inert) पदार्थ की बहुत भारी मिलावट की गई है। रिपोर्ट में सीमेंट के रासायनिक घटकों (Chemical Components) की जांच IS: 4032:1985 पद्धति के तहत की गई है। इसकी तुलना दो भारतीय मानकों IS: 269:2015 (Ordinary Portland Cement के लिए) और IS: 1489 P-1 (Portland Pozzolana Cement के लिए) से की गई है। सबूत 2 : जो ब्रांडेड कंपनी का बैग दिया, वो भी नकली फैक्ट्री मालिक ने सैंपल बैग दिया। बैग पर ‘सुपर अल्ट्रा 53 ग्रेड’ लिखा हुआ है। ISI मार्क के पास ‘SI 269’ प्रिंट था। साइड में ‘जंग रोधक सीमेंट’ लिखा था। बैग के पीछे एड्रेस ‘रूप श्री सीमेंट, रीको इंडस्ट्रियल एरिया, राजस्थान’ लिखा था। लेकिन ये जानकारी नहीं थी : 50 किलो के बैग पर ISI मार्का और उसके ठीक नीचे 7 अंकों का लाइसेंस (CM/L) नंबर होना चाहिए। बैग पर पैकिंग की तारीख भी दर्ज होनी चाहिए, जो तीन महीने से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। निर्माता कंपनी का रजिस्टर्ड ब्रांड लोगो, कॉर्पोरेट पता और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अंकित होना आवश्यक है। सबूत 3 : ‘सीमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम’ में कहीं नाम नहीं भास्कर टीम ने राजस्थान के कई वरिष्ठ सीमेंट उद्योग अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि राज्य में कोई भी सीमेंट कंपनी या फैक्ट्री संचालित करने के लिए सीमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम में पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) होना अनिवार्य है। टीम ने रिकॉर्ड की जांच की तो सामने आया कि गुड़िया गांव में चल रहा यह फैक्ट्री और फैक्ट्री मालिक द्वारा बताया गया दूसरा फैक्ट्री, कहीं भी रजिस्टर्ड (पंजीकृत) ही नहीं हैं। इस मामले में भास्कर ने भारतीय मानक ब्यूरो के अधिकारी से बात की और उन्हें सीमेंट का बैग का वीडियो दिखाया, जो फैक्ट्री मालिक ने सैंपल के तौर पर दिया था। उन्होंने बताया- भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा ISI मार्क के साथ कंपनी के उत्पादन को लाइसेंस नंबर दिया जाता है। वीडियो में दिख रहे बैग में लाइसेंस नम्बर नहीं है। न ही ऐसी कोई कम्पनी बीआईएस में रजिस्टर्ड है। जिन सीमेंट कम्पनी को ISI मार्क दिया हुआ है, उनकी लिस्ट बीआईएस की साइट पर भी उपलब्ध है। सबूत 4: जिस कंपनी के नाम का बैग, वह कोटपूतली में है संचालित भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि गुड़िया गांव के फैक्ट्री में जिस कंपनी के नाम से सीमेंट बनाकर बेचा जा रहा है, वह फैक्ट्री सुपर अल्ट्रा सीमेंट जीएस प्रा. लि. कोटपूतली के पाथरेड़ी क्षेत्र में रजिस्टर्ड है। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन सीआईएस (CIS) के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इस ब्रांड के मैनेजर रामचंद्र गुर्जर ने बताया कि सुपर अल्ट्रा सीमेंट जीएस प्राइवेट लिमिडेट का फैक्ट्री कोटपूतली के पाथरेडी में संचालित होता था। अब यह फैक्ट्री प्रोडक्शन नहीं करती है। फिलहाल बंद है। मिलावटी सीमेंट के खतरे : दीवारों में दरारें, सीलन, सरियों में जंग, बिल्डिंग गिरने का डर जहां बड़ी सीमेंट कंपनियां, उसी क्षेत्र में चल रहे अवैध फैक्ट्री भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि ज्यादातर सीमेंट बनाने वाले अवैध फैक्ट्री उन्हीं इलाकों में सक्रिय हैं, जहां पहले से ही देश की नामी-गिरामी बड़ी सीमेंट कंपनियों के फैक्ट्री हैं। इन बड़ी कंपनियों के फैक्ट्री में भारी मात्रा में क्लींकर (सीमेंट बनाने का कच्चा माल) ट्रकों के जरिए आता है। कंपनियों के फैक्ट्री में पहुंचने से पहले ही रास्ते में इन ट्रकों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में क्लींकर चोरी कर लिया जाता है। बाद में इसी चोरी के क्लींकर को इन अवैध फैक्ट्रियों में बेच दिया जाता है। इस क्लींकर में मिट्टी, कंक्रीट का चूरा और पत्थर की डस्ट मिलाकर मिलावटी सीमेंट तैयार की जाती है। फिर इसे नामी कंपनियों के नकली बैग में भरकर बाजार में सस्ते दामों पर बेच दिया जाता है। हमारे रिकॉर्ड में ऐसा कोई फैक्ट्री नहीं है इस मामले को लेकर भास्कर टीम ने ब्यावर के माइनिंग इंजीनियर (खनि अभियंता) जगदीश मेरावत से बात की। उन्होंने बताया, वर्तमान में ब्यावर क्षेत्र में केवल चार वैध सीमेंट फैक्ट्री ही संचालित हो रहे हैं। पीपलिया के गुड़िया गांव में कोई सीमेंट फैक्ट्री चल रहा है, इस संबंध में हमारे विभाग के रिकॉर्ड में कोई जानकारी या पंजीकरण नहीं है। जैतारण अधिकारियों से इस फैक्ट्री के बारे में जानकारी लेंगे। …. भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबर भी पढ़िए… जयपुर- पहली बार पानी माफिया का GPS लगाकर पीछा,VIDEO:घंटों सरकारी टैंकर्स की गिनती से सामने आया खेल, चोरी में पकड़े गए तो मामूली सजा राजस्थान में एक तरफ कम बारिश से कई जिलों में सूखे जैसे हालात हैं, दूसरी तरफ जनता के हिस्से का फ्री पानी चोरी करके बेचा जा रहा है। ये सच सामने लाने के लिए भास्कर ने जयपुर में 15 दिन ‘ऑपरेशन पानी-चोर’ चलाया। पूरी खबर पढ़िए…

