टोंक जिले के दूनी कस्बे में एक युवक की मौत के बाद लोगों में आक्रोश रहा। परिजनों और ग्रामीणों ने पहले गुरुवार सुबह मृतक का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद संख्या में लोग बाजार बंद करवाकर अस्पताल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हॉस्पिटल गेट पर ताला जड़कर धरना शुरू कर दिया और टायर जलाकर नारेबाजी की। अस्पताल के बाहर से सरोली रोड तक पहुंचा प्रदर्शन करीब आधे घंटे बाद प्रदर्शनकारी अस्पताल से बाहर निकले और सरोली रोड स्थित तिराहे पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान घाड़, आवां और सरोली मार्ग का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। लोग लगातार नारेबाजी करते रहे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते रहे। डॉक्टर की अनुपस्थिति और रेफर के बाद रास्ते में मौत का आरोप मृतक अनुराग पारीक (35), पुत्र कैलाश पारीक, निवासी चुंगी नाका दूनी, बुधवार रात करीब 9:45 बजे अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि उस समय अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। प्राथमिक उपचार के बजाय मरीज को टोंक रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज मिलता तो जान बच सकती थी। ग्रामीणों का आरोप-अस्पताल में लगातार लापरवाही, व्यवस्था चरमराई ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक और स्टाफ समय पर मौजूद नहीं रहते, जिससे मरीजों को निजी या अन्य अस्पतालों में जाना पड़ता है। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है और व्यवस्था लगातार खराब बनी हुई है। मौके पर पहुंचे अधिकारी, जांच और कार्रवाई का आश्वासन प्रदर्शन की सूचना पर देवली एसडीएम रूबी अंसार, सीएमएचओ डॉ. शैलेंद्र चौधरी, डीएसपी हेमराज चौधरी, बीसीएमओ मनीष लोधी और तहसीलदार विनोद शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने जांच कर दोषी पाए जाने पर सस्पेंशन सहित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जबकि सीएमएचओ ने सीसीटीवी जांच और 16 सीसी के तहत कार्रवाई की बात कही। 24 घंटे डॉक्टर उपलब्ध कराने और डेपुटेशन निरस्त करने का आश्वासन सीएमएचओ ने बताया कि रात के समय 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही देवली में लगाए गए नर्सिंग अधिकारी का डेपुटेशन भी निरस्त किया जाएगा। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई। ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, 150 गांवों की सुविधा सुधार की मांग ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति, पुराने भवन की जगह नया अस्पताल निर्माण, दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और मृतक की गर्भवती पत्नी को सरकारी सहायता देने की मांग की। साथ ही अस्पताल से जुड़े करीब 150 गांवों के मरीजों के लिए चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की मांग भी रखी गई।

