नमस्कार कांग्रेस नेता मेवारामजी के जन्मदिन पर एक महिला ने पानी की समस्या को लेकर फरियाद कर दी। पूर्व सीएम साहब ने अड़ा-दड़ा मीडिया के सिर डाल दिया। कृषि विभाग के कर्मचारी की पिटाई मामले को लेकर चीफ और मंत्री में जुबानी जंग हो गई और ASI साथी की विदाई पर पुलिसकर्मी ने दी शानदार परफॉर्मेंस। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पूर्व CM बोले- क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हो? मानेसर (हरियाणा) का ‘जिन्न’ फिर बोतल से निकल आया। तब तत्कालीन सीएम ने सत्ता वाली पार्टी पर आरोप लगाए थे। घटना को लंबा वक्त बीत गया, लेकिन गाहे-बगाहे यह ‘जिन्न’ बोतल से निकल ही आता है। इस बार ‘जिन्न’ बोतल से निकला, लेकिन साथ ही पूर्व सीएम साहब ने ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ दिया। उन्हें घेरकर मीडिया कर्मियों ने मानेसर वाला सवाल पूछा था। उन्होंने कहा- मैं मीडिया फ्रेंडली हूं। कभी-कभी तो चाय के पैसे भी पत्रकार ही देते हैं। लेकिन मैं ये नहीं कहता कि तुम अंट-शंट ऐसी बातें करो कि मेरी ही इमेज पर लोग हंसें। तुम लोग कभी पायलट साहब को प्राइम मिनिस्टर बना देते हो। कभी कहते हो कि वे कांग्रेस प्रेसिडेंट के उम्मीदवार हैं। कभी कहते हो कि जीएसओ बनने जा रहे हैं। कभी कहते हो कि पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों को डांटा- तुम लोग क्यों पायलट साहब के पीछ पड़े हो? पत्रकार डांट खाकर हंसने लगे। उन्होंने डांटना जारी रखा- कुछ लोगों को जमीनी हकीकत पता नहीं और नई-नई स्टोरी चला देते हैं। झूठी खबरें, झूठी पोस्ट। सबसे ज्यादा पायलट का नुकसान तो मीडिया ने किया है। मीडियावाले फिर हंसने लगे। पूर्व सीएम ने उनकी हंसी को दरकिनार करते हुए एक पत्रकार का किस्सा सुना दिया। उन्होंने बताया- एक पत्रकार ने तो लिख दिया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी को बेटा क्यों मानती हैं? पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेतीं? ये कोई पत्रकारिता है? किस्से के आखिर में उपस्थित हुए सवाल पर पत्रकार फिर हंसने लगे। 2. भ्रष्टाचार का ‘खाद-बीज’ सीकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर घूमा। एक व्यक्ति को कुछ लोगों ने पकड़ा हुआ था। वे आरोप लगा रहे थे कि व्यक्ति कृषि मंत्रीजी का आदमी है और रेड न डालने की एवज में 10-10 लाख रुपए मांग रहा है। व्यक्ति कह रहा था कि मैं कृषि विभाग का कर्मचारी हूं। नकली बीज की सूचना पर जांच करने पहुंचा था। साजिश के तहत झूठा फंसाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मचा। पीसीसी चीफ साहब ने इसको लेकर सवाल उठाया। कृषि मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इस पर कृषि मंत्री ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया। लिखा- कुछ दिन पहले एक फर्म पर छापा मारा था। फंगस लगी मूंगफली का बीज जब्त किया। सेल रोक दी। कार्रवाई के बाद भी फर्म नकली बीज बेच रही थी। ऐसे में डिकॉय टीम के दो सदस्य किसान बनकर मामले का पता लगाने गए थे। यह बात फर्म के लोगों को पता चल गई। उन्होंने विभाग के सदस्यों को फंसाने के मकसद से झूठा आरोप लगाया। थाने में मामला दर्ज कराया है। डोटासराजी इल्जाम साबित कर दें तो मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा। इसके बाद एक कार्रवाई और हो गई। बीकानेर में ACB ने बीज निगम के डायरेक्टर को पकड़ लिया। ढाई करोड़ के लगभग रकम निकल आई। इसको लेकर पीसीसी चीफ ने दोबारा जुबानी हमला कर दिया। सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर आरोप लगा दिए। कहा- पूरे प्रदेश में खाद-बीज की दुकानों, फैक्ट्रियों, गोदामों पर छापा मारने की आड़ में उगाही चल रही थी। व्यापारियों को धमका कर पैसा जुटाया जा रहा है। छापे की कार्रवाई में जो डायरेक्टर साथ रहते थे वे रिश्वत मामले में पकड़े जा रहे हैं। इस पर क्या कहेंगे। इधर मंत्रीजी किसान हित में भ्रष्टाचारियों पर बराबर प्रहार करने की बात कहते हैं तो उधर पीसीसी चीफ सवाल उठा रहे हैं। दंगल जारी है। 3. मेवारामजी का बर्थडे और फरियादी मेवारामजी लगातार 15 साल विधायक रहे। फिर विधायकी पर ग्रहण लग गया। ऐसे मामले में फंस गए, जिसमें सीडी बन जाती है। मेवारामजी ने वापसी की भरपूर कोशिश की, लेकिन अपनों का ही विरोध झेलना पड़ा। एक प्रसिद्ध कहावत है- अगर पैसा खो गया तो कोई बात नहीं फिर आ जाएगा। स्वास्थ्य खो गया तो भी थोड़ी बहुत रिकवरी हो जाएगी। लेकिन चरित्र खो गया तो मानो सब कुछ चला गया। विरोधियों ने मेवारामजी को होपलेस करने के लिए शहर में पोस्टर तक लगा दिए थे। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश करते रहे। हाल ही में उनका जन्मदिन आया। जन्मदिन पर कार्यकर्ता बधाई देने पहुंचे थे। अचानक 3 महिलाएं मुंह पर स्कार्फ बांधकर उनके कार्यालय में आ गईं। एक महिला ने फरियाद रखी- पानी की बड़ी समस्या है साहब। नहर में इतना तो पानी आए कि बर्तन धुल जाएं। बर्तन तक नहीं धुलते, नहाना तो दूर की बात है। हम तो यहां ये सीधे निकल गए थे। फिर पता चला कि मेवारामजी आए हुए हैं। तो हम गाड़ी घुमाकर लौटे। मेवारामजी ने कहा- फरियाद तो ठीक है, लेकिन अभी सरकार किसकी है? महिला ने कहा- सरकार किसी की भी हो। जो हमारा काम करेगा, हमारे लिए वही सरकार है। महिला का जोश बढ़ा। वह लगभग भाषण देने लगी। उसने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया- मैं सपोर्ट भले बीजेपी को करती हूं। लेकिन दिल से ‘इज्जत’ सिर्फ मेवारामजी की करती हूं। ‘इज्जत’ शब्द सुनकर मेवारामजी ‘धन्य’ हुए। तुरंत जल समस्या से संबंधित अधिकारी को फोन लगाया और जल्दी समाधान का आदेश दिया। 4. चलते-चलते.. धूप, आंधी, बारिश…। हर मौसम में सड़क-चौक-चौराहे पर खड़ा जवान। आती-जाती गाड़ियों पर नजर। कभी हेलमेट के लिए टोकता है। कभी ओवर स्पीड गाड़ी के पीछे भागता है। डांटता है। फटकारता है। चालान काटता है। कभी तरस खाकर जाने देता है। खुले आसमान के नीचे ड्यूटी देकर दिन-रात किच-किच में उलझे इस जवान से क्या उम्मीद? कितना कर्कश हो जाता होगा। धूल-कार्बन फांक-फांक उसका भेजा-दिल-दिमाग सब कालिख से भर जाते होंगे। इतनी चुनौतियों से जूझने के बाद भी ट्रैफिक पुलिस के कई जवान दिल जीतने में भी माहिर हैं। जैसे नंद किशोर। अजमेर में ASI साहब का विदाई समारोह था। ट्रैफिक पुलिस के जवान नंद किशोर की फरमाइश करने लगे। डिमांड ये कि नंद किशोर गीत सुनाएं। माइक-स्पीकर का प्रबंध था ही। नंद किशोरजी ने माइक थामा। सुरीली आवाज में गाना शुरू किया- बिणजारी रे, मतवारी रे
हंस-हंस बोल, मीठी-मीठी बोल बातां थारी रह जासी रामा थारे बाग में रे, लांबा पेड़ खजूर
चढ़े तो मेवा चाख ल्यूं ,पड़तां चकनाचूर इनपुट सहयोग- भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
हंस-हंस बोल, मीठी-मीठी बोल बातां थारी रह जासी रामा थारे बाग में रे, लांबा पेड़ खजूर
चढ़े तो मेवा चाख ल्यूं ,पड़तां चकनाचूर इनपुट सहयोग- भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

