ब्रेस्ट कैंसर को लेकर प्रतिदिन 41 नए मरीज आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर कैंसर के फैलाव के बाद मेडिकल कॉलेजों में पहुंच रहे हैं। जयपुर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट तक पहुंचते-पहुंचते कई मरीज चौथी स्टेज में जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं। इनमें ज्यादातर ग्रामीण महिलाएं हैं, जो पुरुष डॉक्टरों को अपनी तकलीफ बताने में शर्माती हैं, झिझकती हैं, बीमारी को छिपाती हैं। इसी का नतीजा है कि हर साल औसतन 6 हजार महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर से मौत हो रही है।
आंकड़ों की पड़ताल में चौंकाने वाली बात देखिए! प्रदेश के 33 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ 7 महिला डॉक्टर (एसएमएस मेडिकल कॉलेज व स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में 3, इनमें 2 गायनी ऑन्को सर्जरी व 1 रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, 2 बीकानेर मेडिकल कॉलेज, उदयपुर व जोधपुर मेडिकल कॉलेज में 1-1 रेडिएशन ऑन्को) ही हैं। हालांकि, जोधपुर में एक एडहॉक पर। जिला अस्पताल या सीएचसी में एक भी नहीं। कुल कैंसर रोग विशेषज्ञों (महिला-पुरुष) की स्थिति भी दयनीय है। कुल स्वीकृत 99 पदों में केवल 25 कार्यरत हैं। मेडिकल ऑन्कोलॉजी में केवल 10% पद भरे हैं। राजधानी के एसएमएस मेडिकल कॉलेज व स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में सर्वाधिक 10 डॉक्टर हैं। राजमेस के 25 मेडिकल कॉलेजों सहित प्रदेश की 718 सीएचसी और 37 जिला अस्पतालों में कैंसर के इलाज की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है। जहां भी गिने-चुने विशेषज्ञ हैं, उनमें कोई ऐसा नहीं है, जो ब्रेस्ट कैंसर के लिए समर्पित हो। ये फैकल्टी सभी तरह के कैंसर को देख रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर साल 15 हजार नए केस आ रहे हैं। ऐसे में हर जिले में ब्रेस्ट कैंसर के लिए अलग सेंटर की जरूरत है, वहां मेडिकल कॉलेजों में भी अलग से कोई व्यवस्था ही नहीं है। यहां सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि ब्रेस्ट कैंसर को पहचानने और रोकने की सबसे पहली कड़ी है- कैंसर की स्क्रीनिंग। इसी में सबसे बड़ा धोखा हो रहा है। बिना अल्ट्रासाउंड और रिपोर्टिंग के कैंसर वैन चल रही है। केवल आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं। सालभर पहले कैंसर स्क्रीनिंग का नंबर 55 लाख तक था, जो अब 1.38 करोड़ को पार कर चुका है। लेकिन न तो फैकल्टी बढ़ पाई और ना ही जिलास्तर तक इलाज की सुविधाएं। शुरुआती स्क्रीनिंग में अगर महिला डॉक्टर होंगी तो महिलाएं बिना झिझक के जांच करा सकती हैं। राजस्थान में ब्रेस्ट कैंसर का अंधकार गहराता जा रहा है… सिस्टम-सरकार को अनदेखी का ग्रहण हटाना होगा स्वास्थ्य विभाग व कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्टों के अनुसार- वर्ष 2023 से 2026 के बीच ब्रेस्ट कैंसर से हर साल औसतन 6000 महिलाओं की मृत्यु हुई। 2021 में 5690 और 2022 में 6002 मौतें हुईं। 2023 में 6330, वर्ष 2024 में 6674 और वर्ष 2025 में 6752 महिलाओं की मृत्यु हुई। इतना डरावना आंकड़ा क्यों? इसका जवाब नीचे दिए आंकड़ों में पढ़िए… तस्वीर अंधकारमय; मेडिकल कॉलेज आखिरी उम्मीद, वहां भी अंधेरा कायम 22 पदों में 10 पद भरे। मेडिकल 2, सर्जरी 3, थेरेपी 5
आंकड़ों की पड़ताल में चौंकाने वाली बात देखिए! प्रदेश के 33 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ 7 महिला डॉक्टर (एसएमएस मेडिकल कॉलेज व स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में 3, इनमें 2 गायनी ऑन्को सर्जरी व 1 रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, 2 बीकानेर मेडिकल कॉलेज, उदयपुर व जोधपुर मेडिकल कॉलेज में 1-1 रेडिएशन ऑन्को) ही हैं। हालांकि, जोधपुर में एक एडहॉक पर। जिला अस्पताल या सीएचसी में एक भी नहीं। कुल कैंसर रोग विशेषज्ञों (महिला-पुरुष) की स्थिति भी दयनीय है। कुल स्वीकृत 99 पदों में केवल 25 कार्यरत हैं। मेडिकल ऑन्कोलॉजी में केवल 10% पद भरे हैं। राजधानी के एसएमएस मेडिकल कॉलेज व स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में सर्वाधिक 10 डॉक्टर हैं। राजमेस के 25 मेडिकल कॉलेजों सहित प्रदेश की 718 सीएचसी और 37 जिला अस्पतालों में कैंसर के इलाज की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है। जहां भी गिने-चुने विशेषज्ञ हैं, उनमें कोई ऐसा नहीं है, जो ब्रेस्ट कैंसर के लिए समर्पित हो। ये फैकल्टी सभी तरह के कैंसर को देख रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर साल 15 हजार नए केस आ रहे हैं। ऐसे में हर जिले में ब्रेस्ट कैंसर के लिए अलग सेंटर की जरूरत है, वहां मेडिकल कॉलेजों में भी अलग से कोई व्यवस्था ही नहीं है। यहां सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि ब्रेस्ट कैंसर को पहचानने और रोकने की सबसे पहली कड़ी है- कैंसर की स्क्रीनिंग। इसी में सबसे बड़ा धोखा हो रहा है। बिना अल्ट्रासाउंड और रिपोर्टिंग के कैंसर वैन चल रही है। केवल आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं। सालभर पहले कैंसर स्क्रीनिंग का नंबर 55 लाख तक था, जो अब 1.38 करोड़ को पार कर चुका है। लेकिन न तो फैकल्टी बढ़ पाई और ना ही जिलास्तर तक इलाज की सुविधाएं। शुरुआती स्क्रीनिंग में अगर महिला डॉक्टर होंगी तो महिलाएं बिना झिझक के जांच करा सकती हैं। राजस्थान में ब्रेस्ट कैंसर का अंधकार गहराता जा रहा है… सिस्टम-सरकार को अनदेखी का ग्रहण हटाना होगा स्वास्थ्य विभाग व कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्टों के अनुसार- वर्ष 2023 से 2026 के बीच ब्रेस्ट कैंसर से हर साल औसतन 6000 महिलाओं की मृत्यु हुई। 2021 में 5690 और 2022 में 6002 मौतें हुईं। 2023 में 6330, वर्ष 2024 में 6674 और वर्ष 2025 में 6752 महिलाओं की मृत्यु हुई। इतना डरावना आंकड़ा क्यों? इसका जवाब नीचे दिए आंकड़ों में पढ़िए… तस्वीर अंधकारमय; मेडिकल कॉलेज आखिरी उम्मीद, वहां भी अंधेरा कायम 22 पदों में 10 पद भरे। मेडिकल 2, सर्जरी 3, थेरेपी 5

