बिजनेसमैन ने बेटे को किया किडनैप, VIDEO:मुंबई से फ्लाइट से आए किडनैपर, 12 दिन लॉज में रुके; आरोपी पिता राजस्थान से गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के मुरैना में गुटखा कारोबारी ने अपने 4 साल के बेटे का स्कूल से किडनैप कर लिया। किडनैपर मुंबई से फ्लाइट से ग्वालियर पहुंचे, फिर मुरैना आए। यहां साईं पैलेस लॉज में 12 दिन रुककर रेकी की। रेनबो पब्लिक स्कूल से किडनैप कर लिया। प्रबंधन ने बिना आईडी कार्ड मांगे बच्चे को सौंप दिया। रेनबो पब्लिक स्कूल के बाहर लगे CCTV कैमरे में अपहरण की वारदात कैद हुई। आरोपी कारोबारी नीरज उर्फ नीलेश राजपूत का ड्राइवर कार्तिकेय को कंधे पर उठाकर ले जाता नजर आया। आगे पिता स्कूटी लेकर खड़ा था। 3 साथियों के साथ वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी पिता को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। साथ में बच्चा भी है। साथी अभी फरार हैं। दैनिक भास्कर की टीम साईं पैलेस लॉज पहुंची, जहां आरोपी पिता साथियों के साथ ठहरा था। टीम ने कमरे का जायजा लिया। लॉज संचालक से अपहरण से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान लॉज संचालक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पढ़िए अपहरण कांड की पूरी कहानी… वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए… टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे बच्चे को सौंपा मुरैना पुलिस के मुताबिक, 14 जुलाई को आरोपी लॉज संचालक की स्कूटी से स्कूल पहुंचा। छुट्टी के बाद एक आरोपी बच्चे का नाम बताकर उसे अपने साथ ले गया। टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे या पूछताछ किए मासूम को उसके हवाले कर दिया। इसके बाद आरोपी बच्चे को लेकर फरार हो गए। जांच में सामने आया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। पुलिस की कई टीमें राजस्थान में दबिश दे रही हैं। फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती, प्यार और फिर शादी कार्तिकेय अपहरण कांड की जांच के बीच परिवार की जानकारी सामने आई। नीलेश राजपूत और इशू यादव की पहचान 2018 में फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों की दोस्ती प्यार में बदली और 2019 में उन्होंने शादी कर ली। नीलेश मूल रूप से राजस्थान के पाली का रहने वाला है। शादी के समय वह मुंबई में रहकर गुटखा का कारोबार करता था। शादी के बाद दोनों करीब तीन-चार साल मुंबई में साथ रहे। इसी दौरान बेटे कार्तिकेय का जन्म भी मुंबई में हुआ। विवाद के बाद बेटे को लेकर मुरैना आ गई पत्नी पत्नी इशू यादव का आरोप है कि बेटे के जन्म के बाद नीलेश शराब और नशे का आदी हो गया। वह उसके साथ मारपीट करने लगा। विवाद बढ़ने पर जनवरी 2025 में इशू बेटे कार्तिकेय को लेकर मायके मुरैना आ गई। अगस्त 2025 में नीलेश मुरैना पहुंचा और बेटे को अपने साथ मुंबई ले गया। समझौते का भरोसा मिलने पर इशू भी उसके साथ मुंबई चली गई, लेकिन कुछ समय बाद फिर विवाद और मारपीट शुरू हो गई। जनवरी 2026 में इशू दोबारा बेटे कार्तिकेय को लेकर मुरैना लौट आई। तब से दोनों पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे। करीब 2 महीने पहले इशू और उसकी मां ममता यादव ने कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया था। स्कूल में दाखिले की जानकारी मिलते ही मुरैना पहुंचा पिता पुलिस जांच के अनुसार, इसी शैक्षणिक सत्र में कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया गया। जानकारी मिलने पर पिता नीलेश मुंबई से मुरैना पहुंचा। पुलिस का मानना है कि इसी दौरान उसने बेटे के अपहरण की योजना बनानी शुरू कर दी। 26 जून को नीलेश राजपूत मुरैना पहुंचा और साईं पैलेस लॉज में एक साथी के साथ कमरा लेकर रुका। इसके बाद वह लौट गया। फिर 28 जून से 14 जुलाई तक 3 साथियों के साथ दोबारा उसी लॉज में ठहरा। इसी दौरान उसने बच्चे की गतिविधियों, स्कूल आने-जाने के रास्तों, छुट्टी के समय और सुरक्षा व्यवस्था की रेकी कर पूरी साजिश तैयार की। 28 जून से 14 जुलाई तक साथियों के साथ लॉज में रुका लॉज संचालक अमित गुप्ता ने बताया कि नीलेश पहली बार 26 जून को एक साथी के साथ आया था। इसके बाद 28 जून से 14 जुलाई तक वह दो साथियों के साथ लगातार लॉज में रुका। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति भी कई बार वहां आया-जाया और कई बार ठहरा। कमरा बदला, किराए में भी किया मोलभाव शुरुआत में आरोपियों को कमरा नंबर-6 दिया गया था। बाद में 3 लोगों के रहने पर उन्हें कमरा नंबर-4 दे दिया गया। पहले कमरे का किराया 800 रुपए प्रतिदिन था, जबकि बड़े कमरे का किराया 1200 रुपए तय हुआ। बातचीत के बाद आरोपी 1000 रुपए प्रतिदिन देने पर सहमत हो गए। खाना खाने के बहाने कई बार ले गए स्कूटी लॉज संचालक के मुताबिक, आरोपी कई बार खाना खाने का बहाना बनाकर उनकी स्कूटी ले जाते थे और कुछ देर बाद लौटा देते थे। इससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। 14 जुलाई को भी उन्होंने कुछ देर के लिए स्कूटी मांगी। संदेह से बचने के लिए उसी स्कूटी से रेनबो पब्लिक स्कूल पहुंचे। स्कूल के बाहर इंतजार, फिर बच्चे को लेकर हुए फरार 14 जुलाई को एक आरोपी स्कूल के बाहर छुट्टी का इंतजार करता रहा। दोपहर करीब 2 बजे छुट्टी होते ही वह स्कूल के गेट के अंदर पहुंचा, बच्चे का नाम बताया और उसे लेने की बात कही। गेट पर मौजूद टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे और बिना पूछताछ के कार्तिकेय को उसके साथ भेज दिया। आरोपी बच्चे को करीब 100 मीटर तक गोद में लेकर पैदल चला। इसके बाद वह पहले से स्कूटी लेकर खड़े साथी के पास पहुंचा और दोनों फरार हो गए। कुछ देर बाद कार्तिकेय की नानी उसे लेने स्कूल पहुंचीं तो बच्चा नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और अपहरण का मामला दर्ज कराया। सीसीटीवी फुटेज से खुली साजिश की परतें पुलिस ने स्कूल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। शुरुआत में मां और नानी आरोपी की पहचान नहीं कर सकीं। पुलिस की सख्ती और सीसीटीवी फुटेज दिखाने के बाद मां ने बताया कि बच्चे को ले जाने वाला व्यक्ति उसके पति का ड्राइवर नीरज है। वहीं, लॉज संचालक ने भी सीसीटीवी देखकर उस स्कूटी चालक की पहचान कर ली, जो आरोपी पिता के साथ लॉज में ठहरा था। अपहरण के बाद आरोपी चंबल नदी की ओर पहुंचे। नाकेबंदी और पीछा किए जाने की आशंका में उन्होंने स्कूटी सड़क किनारे लावारिस छोड़ दी। चंबल के पास छोड़ी स्कूटी, दूसरे वाहन से भागे स्कूटी छोड़ने के बाद आरोपी ने लॉज संचालक को फोन कर कहा, “स्कूटी चंबल नदी के पास खड़ी है, जाकर ले जाना। अब हम वापस नहीं आएंगे।” बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। कुछ समय बाद उसने वॉयस मैसेज भेजकर स्कूटी चंबल पुल के पास खड़ी होने की जानकारी दी। बुधवार देर रात उसने फिर मैसेज कर पूछा कि स्कूटी ले आए क्या। किराए और पैसों की बात होने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस ने साईं पैलेस लॉज के कमरे की तलाशी लेकर ट्रॉली बैग, कपड़े और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं बरामद कीं। राजस्थान से पिता गिरफ्तार, बच्चा भी साथ में 15 जुलाई को पुलिस को मोबाइल लोकेशन धौलपुर होते हुए राजस्थान के पाली क्षेत्र में मिली। इसके बाद पुलिस की कई टीमें राजस्थान रवाना की गईं। 16 जुलाई को जांच में पिता नीलेश राजपूत की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे अपहरण की साजिश का मुख्य आरोपी माना। पुलिस ने पिता को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है।
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