पुष्कर मेले में पहली बार होगी 60KM की घुड़सवारी:घोड़ों की हार्ट बीट और फिटनेस की जांच की जाएगी; महिलाएं दौड़ाएंगी बैलगाड़ी

पुष्कर पशु मेले में पहली बार अरावली की तलहटी में एंड्योरेंस राइडिंग (एक लंबी दूरी की घुड़सवारी) होगी। इसमें घोड़े और राइडर 60 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे, जिसमें 20-20 किलोमीटर के तीन लूप होंगे। हर 20 किलोमीटर पर घोड़ों की हार्ट बीट, डिहाइड्रेशन और फिटनेस की जांच की जाएगी। राइडर का भी स्टेमिना देखा जाएगा। मेडिकल अनफिट होने पर घोड़े को राइडिंग से बाहर कर दिया जाएगा। इसके अलावा रेवाल चाल (घोड़ों की एक विशेष चाल) और महिला किसानों की बैलगाड़ी परेड भी पर्यटकों व टूरिस्ट को आकर्षित करेगी। पशुपालन विभाग की ओर से गाय और ऊंटों को लेकर हर साल की तरह इस साल भी कई प्रतियोगिताएं होंगी। एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नवीन परिहार ने बताया- पहली बार पुष्कर मेले में एंड्योरेंस राइडिंग होगी। इसमें घोड़े की सहनशक्ति और राइडर के तालमेल व हेल्थ की परीक्षा देखने को मिलेगी। ये एक लंबी दूरी की घुड़सवारी प्रतियोगिता है, जिसमें घुड़सवार और उनका घोड़ा 60 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। इस 60 किलोमीटर की दूरी में 20-20 किलोमीटर के तीन लूप होंगे। हर 20 किलोमीटर पर तय दूरी के बाद, घोड़ों की हार्ट बीट, डिहाइड्रेशन और फिटनेस की जांच की जाएगी। इस राइडिंग के निर्णायक कमेटी में मेंबर रह चुके लोगों को बुलाकर ट्रैक फाइनल कर दिया गया है। राइडिंग के 20-20 किलोमीटर के तीन पड़ाव होंगे राइडिंग मोतीसर रोड पर पुराने हेलीपैड से शुरू होगी और अरावली की तलहटी के कच्चे रास्तों को ट्रैक का रूप देने की तैयारी की जाएगी। सबसे बड़ा लूप पिचोलिया की गोचर भूमि पर बनाया जाएगा। राइडिंग के 20-20 किलोमीटर के तीन पड़ाव होंगे और समापन मोतीसर रोड पर ही होगा। महिला किसानों की बैलगाड़ी परेड डॉ. परिहार ने बताया- साल 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से महिला किसान वर्ष घोषित किया गया है। इसी थीम पर पुष्कर मेले में बैलगाड़ी चलाने वाली महिला किसानों को बुलाया जाएगा। इस दौरान महिला किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए समापन के दिन बैलगाड़ियों की परेड निकाली जाएगी। रेवाल चाल व ट्रिक राइडिंग होगी खास डॉ. परिहार ने बताया-रेवाल चाल भी पहली बार होगी। इसमें मारवाड़ी घोड़े की रफ्तार और सहनशीलता देख सकेंगे। ये एक किलोमीटर की होगी। इसमें शर्त यह होती है कि इसमें राइडर व हॉर्स को थकान नहीं होनी चाहिए नहीं तो बाहर कर दिया जाएगा। इसके अलावा ट्रिक राइडिंग भी होंगी। इसमें राइडर एक या एक से ज्यादा भी हो सकेंगे। इसके अलावा घोडे़ की ओर से कई प्रकार के करतब भी दिखाए जाएंगे। गाय-भैंस की संख्या बढ़ाने की कोशिश डॉ. परिहार ने बताया कि पुष्कर पशु मेले में भैंस और गोवंश की संख्या काफी कम रहती है। इस बार इनकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए राजस्थान के अन्य जिलों व आसपास के राज्यों में भी पशुपालकों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे अपने पशु लेकर मेले में आएं।
हजारों पशु एवं लाखों श्रद्धालु आते हैं मेले में पुष्कर पशु मेले में हजारों ऊंट, घोड़े समेत अलग-अलग प्रजाति के पशु आते हैं। वहीं पशुपालकों के बीच करोड़ों रुपयों का लेन-देन होता है। लाखों श्रद्धालु सरोवर में स्नान और मंदिरों के दर्शन करते हैं। अनेक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिसमें राजस्थानी लोक कलाकारों के साथ-साथ कई अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों को भी आमंत्रित किया जाता है। मेले के दौरान देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। पशुओं की भी कई रोमांचक प्रतियोगिता होती है, इनमें ऊंट दौड़, ऊंट का नृत्य, नाचने वाली घोड़ियों की प्रतियोगिता और सर्वश्रेष्ठ नस्ल के घोड़ों व दुधारू गायों का प्रदर्शन शामिल है। इसके अलावा पशुओं के स्वास्थ्य और सौंदर्य की भी प्रतियोगिताएं होती हैं।
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