नमस्कार, सड़क के धरने में विधायक मैडम शामिल हुईं तो धरना धरना न रहकर गोठ का कार्यक्रम हो गया। विधायक ने सब्जी सुधारी। गीत-संगीत, भजन-कीर्तन, राशन-भोजन सब कुछ हुआ। महंत विधायकजी तिजारा में पार्टी का बोर्ड बनवाने में नाकाम रहे। अब जूस के विज्ञापन में दिख रहे हैं। उधर मथानिया में बोर्ड बनवाकर पूर्व विधायक का जोश आसमान पर है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. विधायक मैडम का अनोखा धरना भरतपुर में जटमासी से रूपवास की टूटी सड़क मुद्दा बनी। आरोप ये कि फर्म ने घटिया काम किया था। फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठी। विरोध प्रदर्शन के इस कार्यक्रम में विधायक मैडम शामिल हो गईं। टूटी सड़क पर मार्च करते हुए सभी लोग PWD के दफ्तर पहुंच गए। अपनी मांगें रखीं और वहीं जम गए। बोले- जब तक फर्म ब्लैक लिस्ट नहीं होगी और नया टेंडर नहीं निकलेगा तब तक धरने से नहीं उठेंगे। बैठ तो गए लेकिन करें क्या? भरतपुरिया लोग। किसी भी मौके पर गीत-संगीत भजन-कीर्तन शुरू। तो वहां से गुजरते एक सपेरे को बुला लिया। विधायक बोलीं- प्रशासन के कान बंद हैं, इन्हें कैसे जगाएं? लोग बोले- बीन बजाकर। सपेरा बीन बजाने लगा। लेकिन उसका उत्पाती सांप पिटारे की बाड़बंदी तोड़ भागने लगा। सपेरे ने उसे फिर बाड़ाबंदी में डालकर ढक्कन लगा दिया। इसके बाद रसिया लोग जुट गए। वे गा-गाकर विधायक को समस्याएं बताने लगे। ठहाकों का दौर चलने लगा। कुछ देर में हनुमान चालीसा का पाठ हो गया। विधायक मैडम के पतिदेव भी मौके पर पहुंचे। भोजन का समय हो रहा था। उन्होंने कहा- आज का भोजन यहीं करेंगे। मैं इंतजाम करता हूं। इसके बाद भोजन पकाने के सामान आने लगे। कड़ाही पतीला झर टोकरे परातें चूल्हा पल्टा सब आ गया। इसके बाद राशन आया। मार्केट से फूलगोभी आ गई। विधायक मैडम और उनके पति सब्जी सुधारने लगे। गोठ जैसा माहौल हो गया। सिद्धहस्त लोगों ने कड़ाही संभाली और पूड़ियों का आटा लगाने लगे। शाम हुई तो किसी ने माइक और स्पीकर का प्रबंध कर दिया। कोई पेटी-बाजा ढोलकर उठा लाया। गोठ में सुगम संगीत होने लगा। एक से बढ़कर एक भजन की पेशकश होने लगी। एक से बढ़कर एक भजन सुनाए जाने लगे। विधायक जी ने गायकों पर सौ-सौ के नोटों का वारफेर किया। गाने की हूक विधायक जी के मन में भी उठी। माइक संभाला और भजन गाना शुरू कर दिया। इसी संगीतमय गोठात्मक धरना प्रदर्शन में भोजन का वक्त हो गया। वहीं पंगत लग गई। पतिदेव भी प्रदर्शनकारियों के साथ पंगत में बैठे। सबने प्रसाद ग्रहण किया। शामियान-रोशनी और जीमण होता देख लोग ठिठकने लगे। आखिर रात में विधायक ने ऐलान किया- मांगें मान ली गई हैं। तीन दिन में फर्म ब्लैकलिस्ट हो जाएगी। बरसात के बाद नई सड़क काम शुरू हो जाएगा। सभी ने बांके बिहारी की जय का घोष किया। धरना विसर्जित होने लगा। 2. चुनावी थकान और आयुर्वेदिक ‘नुस्खा’ विधायक बाबाजी ने तिजारा में खूब ट्रैक्टर दौड़ाया। अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए जी-जेवड़ी एक कर दी। तिजारा को झालरों से पाट दिया। लेकिन दूसरी पार्टी के लोग भी दमदार निकले। चुनाव होते ही पार्षदों को लेकर हरियाणा पहुंच गए। जब बोर्ड बनाने की बारी आई तब हरियाणा से निकले लेकिन बस रोक ली गई। चर्चा है कि पंचकुला में खूब ड्रामा हुआ। पार्षद बस के शीशे फोड़कर निकले और दूसरी बस से देर रात तिजारा पहुंचकर अपना बोर्ड बना दिया। कूद-फांद विरोधी पार्टी वालों ने ज्यादा की, इधर बाबाजी आयुर्वेदिक जूस का विज्ञापन करते नजर आ रहे हैं। कहते हैं कि दो चम्मच जूस पानी में मिलाकर पीने से शरीर में नई ऊर्जा आती है। जूस पीने में देरी हो गई महाराज। निकाय का बोर्ड तो गया। अब लगता है नई ऊर्जा का इस्तेमाल आगे वाले बड़े चुनाव में किया जाएगा। बाकी तैयारी दूसरे खेमे की भी कम नहीं। 3. हेलमेट में दिव्या मदेरणा चौपालों पर बैठकर बड़े बुजुर्ग इन दिनों एक ही चर्चा कर रहे हैं। ऐसा घमासान तो बड़े-बड़े चुनावों में नहीं देखा जैसा इस बार निकाय चुनाव में दिखा। पार्षद क्या हुए कोहिनूर का हीरा हो गए कि कोई इन्हें चुरा ले जाएगा। बाड़ेबंदियां चलीं। बाड़ेबंदी में पुलिस घुसकर प्रत्याशी की शिनाख्त परेड करती दिखी। कोई चुनाव में खड़ा होने के लिए मरता दिखा तो कोई नाम वापस लेने के लिए एसडीएम दफ्तर के बाहर कबड्डी जैसा खेलता पाया गया। कहीं धमकी, कहीं धरना, कहीं धोखा, कहीं भितरघात…क्या कुछ नहीं देखा। जोधपुर के मथानिया में भी पूर्व विधायक मैडम को खेला होने की आशंका थी। पार्षदों के बहुमत को वे बस में भरकर नगर पालिका पहुंची तो पुलिस से सामना हुआ। मैडम ने भी पूरा जोर लगा दिया। पूरा दमखम दिखाया। पुलिस को ललकारा। विधायक को कोसा। हेलमेट लगाकर अड़ी रहीं। वीडियो बनाती रहीं। पोल खोलती रहीं। उनके पार्षदों ने वोट डाले और जीत गए। बोर्ड बना तो मैडम ने कार की छत पर चढ़कर सिद्धू मूसेवाला की स्टाइल में सेलिब्रेशन कर डाला। 4. चलते-चलते.. पर्यटकों को लुभाने के लिए राजस्थान के थार रेगिस्तान को इतना प्रमोट किया गया कि देश और दुनिया के लोग यही सोचने लगे कि राजस्थान में रेगिस्तान के अलावा कुछ नहीं है। राजस्थान का जिक्र होते ही रेत के धोरों पर चलता ऊंट, कोसों दूर से पानी भरकर लाती महिलाएं, टीले पर कालबेलिया डांस और किसी महल के बाहर सपेरे का तमाशा जेहन में आता था। राजस्थान की तस्वीर सोशल मीडिया ने बदली। लोगों को पता चला कि राजस्थान में सैकड़ों टापुओं का शहर भी है। हरे-भरे ऊंचे पहाड़ हैं। नदियां हैं, झरने हैं। यहां का कल्चर, खान-पान, मेजबानी, शाही होटल…सब कुछ इतना भव्य तरीके से पेश होने लगा कि देश और दुनिया की बड़ी हस्तियां यहां रॉयल वेडिंग के लिए लाइन लगाने लगीं। जहां तक धार्मिक आयोजनों की बात है तो राजस्थान जैसे रंग इस क्षेत्र में भी खूब झलते हैं। चाहे बात रामदेवरा या तेजाजी मेले की हो। चाहे सांवरिया सेठ और खाटू श्यामजी के लिए दीवानगी हो। चाहे राजसमंद के गढ़बोर की बेवाण परिक्रमा हो या जलझूलनी पर चित्तौड़गढ़ के बस्सी में तुलसी सागर तालाब की छलांग। जैसे ही भगवान का बेवाण इस तालाब पर पहुंचता है। एक साथ सैकड़ों श्रद्धालु तालाब में छलांग लगा देते हैं। ये नजारा साल में एक बार नजर आता है। राजस्थान का हर रंग बहुत खूबसूरत है।
इनपुट सहयोग- गौरव माथुर (भरतपुर), जयदीप पुरोहित (जोधपुर), साजिद शेख (अलवर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।
इनपुट सहयोग- गौरव माथुर (भरतपुर), जयदीप पुरोहित (जोधपुर), साजिद शेख (अलवर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।

