खूब लहराया आजादी का परचम, पूनियाजी ने ‘लहराई’ बाइक:’नोटिस’ पर सांसद मन्नालाल का ‘बड़ा दिल’; ओवैसी-बेनीवाल की ‘ट्यूनिंग’

नमस्कार, आज आजादी के पर्व पर घर-घर तिरंगा लहरा रहा है। राज्यसभा सांसद भी लहरा रहे हैं, लेकिन बाइक पर। उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने बड़ा दिल दिखाया। नोटिस देने वाले अधिकारी को माफ किया। दिल्ली में ओवैसी और हनुमान बेनीवाल के बीच दोस्ती के रंग दिखे तो कई सरकारी स्कूलों का हाल बदरंग नजर आया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. खूब लहराया ‘आजादी का परचम’ राजधानी में मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर तिरंगा फहराया। इस कार्य में उनकी श्रीमतीजी ने भी साथ दिया। इधर, उप मुख्यमंत्री महोदया ने भी छत पर जाकर तिरंगा लहराया। घर-घर तिरंगा अभियान के तहत अपील की गई कि हर नागरिक सम्मान के साथ अपने घर पर तिरंगा फहराए। अपील का असर भी दिख रहा है। आजादी का उल्लास होता ही है जबरदस्त। जो चीज छीनकर मिले, लड़कर मिले, उसे पाने का आनंद ही अलग होता है। आजादी के लिए लड़ने वाली पीढ़ियों को नमन। आज भारत माता की जय और वंदेमातम की गूंज हर कंठ से निकल रही है। हर मन में एक ही भाव है- सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी। आज हर नारा सिर्फ देश के लिए हो। उसी तरह जैसे कांग्रेस पार्टी ने तय कर लिया है कि किसी व्यक्ति के लिए नारा नहीं, पार्टी के लिए लगाओ। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में एक उत्साही कार्यकर्ता ने चीफ साहब का नारा लगाया। बोला- गोविंद सिंह डोटासरा जिंदाबाद। डोटासरा ने तुरंत रोका। कहा- नहीं भाई। रहने दो। 2. मन्नालाल जी की सादगी मन्नालाल जी ढाई साल पहले तक परिवहन विभाग में अधिकारी थे। उन्होंने नौकरी से VRS ले लिया। इसके बाद राजनीति में उतरे और सांसद बन गए। मन्नालाल जी किस्मत के धनी निकले। सादगी पूर्ण जीवन के कारण तड़क-भड़क वाले नेता नहीं हैं। उन्हें चाक चलता दिखता है तो मिट्‌टी के बर्तन बना लेते हैं। फिर अपना पात्र देख झूमते हैं। माटी से जुड़ा आदमी सरल होता है। अचानक मन्नालालजी को जोधपुर निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस दे दिया। साथ ही फटकार भी लगाई कि आपका काम पूरा नहीं है। आपने पोर्टल पर जानकारी अपडेट नहीं की। फलां धारा के हिसाब से फलां दंड दिया जा सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी को पता ही नहीं कि जिन्हें नोटिस दे दिया वे सांसद हैं। उन्हें यह भी पता नहीं कि उन्हीं की लिस्ट अपडेट नहीं थी और ढाई साल बाद भी मन्नालाल जी का नाम हटाया नहीं गया था। नोटिस देकर खुद फंस गए। कोई और सांसद होता तो गरजता भी बरसता भी। लेकिन मन्नालाल जी बोले- उन्होंने जो कुछ किया, अच्छे के लिए ही किया होगा। भले को सब भला ही भला दिखता है। 3. हनुमान की ‘लॉटरी’ निकाय चुनाव के लिए भले आरक्षण की लॉटरी निकल गई, लेकिन हनुमान बेनीवाल ‘लॉटरी का टिकट’ साथ लेकर घूम रहे हैं। यह लॉटरी का टिकट AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी हैं। देशभर की मुस्लिम कम्युनिटी में उनकी पैठ है। हनुमान बेनीवाल की तरह वे भी वन मैन आर्मी हैं। हनुमान बेनीवाल और ओवैसी की दिल्ली में मुलाकात हुई। दोनों नेता एक-दूसरे की तारीफ करते हैं। दोनों मिलते हैं तो यारी-दोस्ती दिखाई देती है। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी सोच-समझ कर की जाती है। दो दिग्गजों की दोस्ती को राजनीति में समीकरण कहा जाता है। क्या हनुमान बेनीवाल राजस्थान में वैसा ही समीकरण बनाने में जुटे हैं, जैसा यादव जी ने यूपी में MY का बनाया था। 4. चलते-चलते.. अलवर में थानागाजी इलाके में एक गांव है जोधावास। गांव के सरकारी स्कूल के बच्चे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल में पहाड़ा-पट्‌टी की जगह ‘हमारी मांगें पूरी करो’ गूंज रहा है। पत्रकार ने एक छात्रा से पूछा- देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, आपके लिए आजादी का क्या मतलब है। छात्रा बोली- स्कूल की पटि्टयां टूटी हैं। भवन जर्जर है। एक भी कमरा ठीक नहीं है। खेल का ग्राउंड नहीं है। टीचर नहीं है। रूपारेल नदी पार करके आते हैं। अच्छी पुलिया नहीं है। 80 साल की आजादी का यही मतलब है। अधिकारी बच्चों को समझाने पहुंचे तो एक पतली-दुबली छात्रा ने पुरजोर आवाज में कहा- अगर आपके बच्चे यहां होते तो क्या उनके लिए भी यही सुविधाएं होतीं? अधिकारी निरुत्तर। प्रतापगढ़ जिले के धरियावद में लसाड़िया तहसील की ग्राम पंचायत है धुलिया। यहां के गांव कराकला फला का तो अजब हाल है। 2013 में यहां स्कूल खुल गया, लेकिन बिल्डिंग नहीं बनी। गांव के छोटे से मंदिर में स्कूल चल रहा है। 60 बच्चों पर एक टीचर। कुल मिलाकर व्यवस्था भगवान भरोसे चल रहा है। जालोर के मेंगलवा गांव में पीएमश्री स्कूल की छात्रा मनीषा कुमारी सायला तो स्टार बन गई। उसने 90 फीसदी अंक हासिल किए। लेकिन अपनी मेहनत पर। स्कूल में पूरे टीचर ही नहीं है। छात्रों ने धरना दिया तो मनीषा ने दमदार ढंग से बात रखी। कहा- यहां सेकेंड ग्रेड के टीचर नहीं है। हिस्ट्री का एक टीचर है वे प्रिंसिपल हैं। सारे टीचर लगा दो वरना रास्ता ब्लॉक करेंगे। बाड़मेर के जालीखेड़ा स्कूल में दो टीचर हैं। दोनों अस्थायी। टीचर्स की मांग पर बच्चों ने धरना दे दिया। प्रशासन ने आश्वासन दिया। बोले- जब तक स्थायी टीचर नहीं आ जाएंगे, अस्थायी को नहीं हटाएंगे। बच्चों ने खुलकर कहा-यही बात लिखकर दे दो। राजधानी के मूक बधिर बच्चों के सरकारी स्कूल में तो बच्चे न बोल सकते हैं। न सुन सकते हैं। फिर भी इशारों में अपनी बात इतने असरदार ढंग से रखी कि प्रशासन हिल गया। मशहूर क्रांतिकारी शायर फैज अहमद फैज ने एक नज्म लिखी थी। जिसके शब्द थे- बोल कि लब आजाद हैं तेरे। आजादी के 80 साल बाद भी तसल्ली इस बात की है कि जनरेशन चाहे जेन-जी हो या फिर अल्फा। उनके भीतर भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारी जिंदा हैं, जो आवाज उठाना जानते हैं। इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
Back To Top