शिव के दिन में तीन स्वरूप स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की यह अलौकिक प्रतिमा दिन के अलग-अलग प्रहर में बाल, युवा और वृद्ध अवस्था के तीन अलग-अलग स्वरूप दर्शाती है। वाव (कुंड) का चमत्कार मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी का जल बेहद पवित्र माना जाता है। किंवदंती है कि महादेव के अनन्य भक्त पदमसिंह चांदूर जब द्वारिका यात्रा पर गए, तब भगवान ने उन्हें रामसीन लौटने का निर्देश दिया। भगवान के कहे अनुसार, द्वारिका की नदी में छोड़ी गई तुम्बी और डंडा रामसीन मंदिर की इसी वाव में तैरते हुए मिले थे। तब से इस जल की तुलना द्वारिका के पावन जल से की जाती है। त्रेतायुग का ‘रामशयन’ बना आज का ‘रामसीन’ जनश्रुतियों के मुताबिक, त्रेतायुग में वनवास के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहाँ रात्रि विश्राम (शयन) किया था। इसी कारण इस नगरी का नाम पहले रामशयन पड़ा, जो समय के साथ बदलकर रामसीण, रामसेन और आज ‘रामसीन’ कहलाया। यह पावन धरा सदियों से तपस्वियों की साधना स्थली रही है। यहां भक्त कृष्णदास छीपा, फागणगिरी, गोविंदगिरी, फ़तहगिरी, लहरगिरी और कानदास जैसे कई महान संतों ने तपस्या कर इस भूमि को जाग्रत किया। सावन में 365 घड़ों से रुद्राभिषेक, महाशिवरात्रि में लक्खी मेला आपेश्वर धाम में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सानव मास और महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा देखने लायक होता है। वहीं, सावन मास की अमावस्या पर भगवान शिव का 365 कलशों (घड़ों) के जल से भव्य रुद्राभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां 7 दिनों का विशाल लक्खी मेला और पारंपरिक हाट बाजार सजता है, जिसमें शामिल होने दूर-दराज़ से हजारों श्रद्धालु आते हैं। वर्तमान में मंदिर का कुशल प्रबंधन आपेश्वर महादेव सेवा ट्रस्ट (अध्यक्ष: सेवानिवृत्त IAS गंगासिंह परमार) द्वारा किया जा रहा है, जबकि पूजा-अर्चना की प्राचीन परंपरा रावल ब्राह्मण समाज के मार्गदर्शन में निरंतर जारी है।
यहां शिवलिंग नहीं, साक्षात मूर्ति रूप में विराजे हैं महादेव:हल की नोक से प्रकट हुए थे रामसीन के आपेश्वर महादेव, दिन में तीन बार बदलते हैं रूप
क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां देवाधिदेव महादेव शिवलिंग रूप में नहीं, बल्कि पांच फीट की भव्य आदमकद मूर्ति के रूप में पूजे जाते हैं? आज सावन के तीसरे सोमवार को हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के दर्शन कराने जा रहे हैं। राजस्थान के जालौर जिले में स्थित ऐतिहासिक रामसीन नगरी का आपेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा ही पावन धाम है, जो अपने अद्भुत इतिहास, पौराणिक मान्यताओं और अटूट जन-आस्था के लिए देशभर में विख्यात है। जब खेत में हल चलाते वक्त प्रकट हुए ‘आपेश्वर’ दरअसल, ये विक्रम संवत् 1316 की बात है। स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं – रामसीन का एक किसान रोज की तरह अपने खेत में हल चला रहा था। अचानक उसका हल मिट्टी के भीतर किसी ठोस वस्तु से टकराया। जब किसान ने जमीन खोदी, तो वहां से भगवान शिव की एक विशाल आदमकद मूर्ति प्रकट हुई। भूमि से ‘स्वतः प्रकट’ होने के कारण ही इनका नाम ‘आपेश्वर महादेव’ पड़ा। खुदाई के दौरान किसान के हल की नोक से मूर्ति का एक अंगूठा और उंगली खंडित हो गई थी, जिसके निशान आज सदियों बाद भी मूर्ति पर स्पष्ट दिखाई देते हैं। गर्भ गृह से महादेव की इस दिव्य प्रतिमा के साथ भगवान ब्रह्मा और श्रीहरि विष्णु की प्रतिमाएँ भी प्रकट हुई थीं।

