मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन नहीं होंगे:फर्जी डिग्री समेत गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने लगाई रोक, चेयरमैन बोले-हाईकोर्ट जाएंगे

चित्तौड़गढ़ के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन पर रोक लगा दी गई है। राजस्थान सरकार ने यह फैसला फर्जी डिग्री और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के बीच लिया है। अब अगले आदेश तक किसी भी कोर्स में नए छात्रों को एडमिशन नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में नए छात्रों को एडमिशन देना उनके भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। छात्रों के हितों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए फिलहाल एडमिशन प्रक्रिया बंद कर दी गई है। इधर, यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गदिया ने कहा- बिना पर्याप्त अवसर दिए और पूरे मामले का अंतिम निष्कर्ष सामने आए बिना नए एडमिशन पर रोक लगाने का निर्णय न्यायोचित नहीं है। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी जल्द ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। फर्जी डिग्री और गड़बड़ियों की शिकायतों से शुरू हुआ मामला
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के खिलाफ लंबे समय से फर्जी डिग्रियां जारी करने और अन्य प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सरकार को मिल रही थीं। इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया। जांच रिपोर्ट के बाद यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया गया
विशेष समिति ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपना पक्ष सरकार को भेज दिया, लेकिन विभाग अभी उसकी जांच कर रहा है। एसओजी जांच और गिरफ्तारियों से बढ़ी परेशानी
फर्जी डिग्री मामले की जांच के दौरान एसओजी ने भी कार्रवाई की। यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रुल, पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा और ‘फाइलिंग असिस्टेंट’ (कार्यालय सहायक) वीरेंद्र सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। सरकार का मानना है कि मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं है और विभिन्न स्तरों पर इसकी जांच अभी भी जारी है। नर्सिंग छात्रों के आंदोलन से पहले भी विवादों में रही यूनिवर्सिटी
इसी साल फरवरी में बीएससी नर्सिंग के छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में आंदोलन किया था। छात्रों का आरोप था कि जिस कोर्स में उन्हें एडमिशन दिया गया, उसे राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से जरूरी मान्यता नहीं मिली थी। इस मुद्दे को लेकर छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई थीं और कई छात्रों को निलंबित किया गया था। सरकार ने नए एडमिशन पर लगाई रोक, अब अगले आदेश का इंतजार
जांच पूरी नहीं होने और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के सभी कोर्सों में नए एडमिशन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने तक नए छात्रों को एडमिशन देना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। चेयरमैन अशोक गदिया ने फैसले पर जताई आपत्ति मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के चेयरमैन अशोक गदिया ने राज्य सरकार के नए एडमिशन पर रोक लगाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस का जवाब यूनिवर्सिटी पहले ही सरकार को दे चुकी है और मामला अभी विभागीय स्तर पर विचाराधीन है। उन्होंने दावा किया कि एसओजी ने फर्जी डिग्री का एक भी मामला यूनिवर्सिटी के खिलाफ दर्ज नहीं किया है। अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई गलत काम किया है तो वह उसका निजी कृत्य है, संस्थान का उससे कोई संबंध नहीं है। अशोक गदिया ने कहा कि संबंधित मामलों में अभी तक किसी को भी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। ऐसे में अंतिम जांच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है।
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