राजस्थान में सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टर (न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी) की कमी है। सबसे ज्यादा परेशानी जयपुर, जोधपुर को छोड़कर अन्य जिलों (उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर) में है, जहां एक-एक डॉक्टरों के भरोसे हॉस्पिटल चल रहे हैं। इन हॉस्पिटलों में इन जिलों के अलावा आसपास के छोटे जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। इसे देखते हुए सरकार अब सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टर्स जो नौकरी से रिटायर्ड हो रहे हैं, उन्हें वापस पे माइनस पेंशन पर नियुक्ति दे रही है। लेकिन सरकार के लिए अब सबसे बड़ी मुसीबत इन डॉक्टर्स की नियुक्ति को लेकर है, जो रिटायरमेंट के बाद केवल जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल, आयूएचएस या जोधपुर के हॉस्पिटल में ही नौकरी करना चाहते हैं। एक तरफ सरकार राजस्थान में मेडिकल सर्विसेज के विस्तार और मेडिकल एज्युकेशन को मजबूत बनाने के लिए लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोल रही है, लेकिन सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले महीने कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद सरकार को विशेषज्ञ डॉक्टर्स की स्पेशल टीम कोटा भेजनी पड़ी। वहीं बीकानेर की घटना में भी जोधपुर के डॉक्टरों से परामर्श लेना पड़ा। ऐसे में सवाल उठते हैं, कि क्या सरकार इन जिलों (जहां बड़े हॉस्पिटल हैं और पर्याप्त संसाधन हैं) वहां पर क्या इन डॉक्टर्स को नहीं लगाया जा सकता? राजमेस के 24 कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग नहीं राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के 24 मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं, जहां आज तक कई सुपर स्पेशियलिटी विभाग शुरू ही नहीं हो पाए हैं। नतीजा यह कि गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए जयपुर का रुख करना पड़ता है। जयपुर में रुकने के ये बड़े कारण एसएमएस से रिटायर्ड होने के बाद पे माइनस पेंशन पर नियुक्त होने वाले अधिकांश डॉक्टर्स जयपुर में रुकने का प्रयास करते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पुराने हॉस्पिटल (जहां से रिटायर्ड हुए) में वजूद है। सीनियर होने के नाते इन डॉक्टर्स को यूनिट हैड, डिपार्टमेंट एचओडी जैसे पद मिल जाते हैं। इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण प्राइवेट प्रेक्टिस (घर पर क्लिनिक का संचालन) है, जो सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी करते समय अच्छी चलती है। सूत्रों के मुताबिक एक-एक डॉक्टर हर रोज करीब 40 से 50 मरीज घर पर देखते है, लेकिन रिटायर्ड होने के बाद इन मरीजों की संख्या 20 फीसदी से भी कम रह जाती है। तीसरा बड़ा कारण परिवार से दूरी। पूरा परिवार जयपुर में होने के बाद कोई डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद क्यों जयपुर से बाहर दूसरे शहर जाए?

