नमस्कार, राजसमंद के नाथद्वारा में सभापति पद के सबसे बड़े दावेदार के साथ ‘खेला’ हो गया। इधर भीलवाड़ा में भाजपा के जिलाध्यक्ष ने निर्दलीय पर्चा भरने वाली मैडम को नाम वापस लेने के लिए राजी कर लिया। ब्यावर के सरकारी स्कूल में सांप घुस गया और हनुमानगढ़ में ट्रैफिक वाले साहब ने दिल छूने वाला काम कर दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. दावेदार जी के साथ ‘खेला’ हो गया दावेदार जी जोधपुर में बाड़ेबंदी में थे। फुल कॉन्फिडेंस में थे कि नाथद्वारा के सभापति वे ही बनेंगे। अपने एक प्रस्तावक को साथ में लेकर पर्चा भरने निकल पड़े। लेकिन पहुंचे कहीं नहीं। रास्ते से ही गायब। घरवालों को चिंता हो गई। क्या हुआ? परिवार और समर्थक उपखंड अधिकारी के दफ्तर जाकर बैठ गए। धरना होने लगा। दावेदार जी का अता पता नहीं। काफी हो हंगामा हो गया। आरोप लगाया गया कि दावेदार को किडनैप कर लिया गया है। लेकिन किया किसने इसे लेकर तरह-तरह की बातें। धरने का पता चला तो इलाके के विधायक विश्वराज सिंह अपनी सांसद पत्नी महिमा कुमारी को लेकर मौके पर पहुंच गए। मौके पर रोना-पीटना मच गया था। सांसद महोदया ने सीधे पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष को फोन लगा दिया। बोलीं- इस परिवार से हमारा ताल्लुक अभी से नहीं है। काफी वक्त से है। पर्चा भरने का मुहूर्त निकला जा रहा था। वक्त निकलते-निकलते मुहूर्त भी निकल गया। इसके बाद परिवार को सूचना दी गई कि दावेदार जी सही सलामत हैं। दूसरे दिन सुबह-सुबह दावेदार जी अपने प्रस्तावक और दो पार्षदों के साथ नाथद्वारा पहुंचे। सभापति बनने का सपना टूट गया। पार्टी ने उनकी गैरमौजूदगी में दूसरे प्रत्याशी से पर्चा भरवा दिया था। लोगों में चर्चा है कि पुलिस ने दावेदार जी को देसूरी की नाल में पकड़ लिया। नामांकन के निर्धारित समय तक साथ लेकर घूमती रही। फिर दोबारा बाड़ेबड़ी में पहुंचा दिया। देर रात उन्हें बाड़ेबंदी से रिलीज कर दिया गया। ये सब किसके इशारे पर हुआ, इसे लेकर कानाफूसी जारी है। कुल मिलाकर खेला हो गया। 2. जिलाध्यक्ष ने रूठी मैडम को मना लिया वे पार्टी की समर्पित कार्यकर्ता थीं। नाम संतोष कंवर। जिला भीलवाड़ा। पार्टी ने पार्षदी का टिकट नहीं दिया। जैसा कि ऐसी स्थिति में समर्पित कार्यकर्ता हो जाते हैं, वे भी बागी हो गईं। निर्दलीय पर्चा भर दिया। वे जीत गईं। जीतने के बाद जोश आसमान पर पहुंच गया। पार्टी ने जब अपने मेयर का पर्चा भरवाया तो मैडम संतोष ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भर दिया। अब बात जिलाध्यक्ष जी की नाक पर आ गई। कहीं बागी महोदया खेल न बिगाड़ दें। यही सोचकर सब कुछ भूलकर जिलाध्यक्ष जी बागी साहिबा को मनाने में जुट गए। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। समझाया-बुझाया। ठंडे छींटे दिए। गाड़ी में साथ लेकर घूमे। बड़े-बड़े वादे किए। पुराना समर्पण याद दिलाया। इतना सब करने के बाद मैडम मान गईं। उन्होंने मेयर के लिए भरा पर्चा वापस ले लिया। इसके बाद पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया। पूछा- खुद रूठीं और खुद ही मान गईं? मैडम ने हंसते हुए कहा- नहीं नहीं, पार्टी वालों ने मनाया है। 3. सरकारी स्कूल में सांप सरकारी स्कूलें पिछले दिनों चर्चा में रहीं। स्कूलों से अचानक- हमारी मांगें पूरे करो- के नारे उठने लगे। स्कूलों के हालात सोशल मीडिया पर दिखाए जाने लगे। दिल्ली से कॉकरोचों की टोली गांव-शहर में घूमने लगी। कॉकरोचों को मारा-पीटा गया। मुद्दा गर्म हो गया। शिक्षा विभाग पर सवाल उठने लगे। चुनावी माहौल में मुद्दा ठंडा भी पड़ गया। कॉकरोच तो नहीं लेकिन ब्यावर जिले के जैतारण ब्लॉक के उच्च माध्यमिक स्कूल किशननगर में काला सांप घुस गया। बच्चों में खलबली मच गई। स्टाफ के हाथ-पैर फूल गए। तुरंत जीव दया फाउंडेशन के रेस्क्यूअर को फोन किया गया। रेस्क्यू करने वाला तुरंत स्कूल में पहुंच गया। वह सांप के इर्द-गिर्द मंडराने लगा। उसने अपने छड़ी से सांप को काबू में कल लिया। उसके जहर के दांत तोड़ दिए। उसके चारों तरफ बच्चों की भीड़ लग गई। मास्टर जी मोबाइल में साहस कथा रिकॉर्ड करने लगे। किसी भाई ने मौका पाकर रीलें बना लीं। बच्चों में सांप को देखने का क्रेज भी था और डर भी। रेस्क्यू करने वाले ने पूछा- बच्चों हाथ लगाकर देखोगे? डर की एक लहर सी उठी। बच्चे बोले- नहीं नहीं। इसके बाद स्टाफ में सांप के साथ फोटो खिंचाने की होड़ लग गई। मैडम-सर सभी ने सांप को छूकर देखा और क्लिक पर क्लिक कराने लगे। चुनावी सीजन में भी सांपनाथ-नागनाथ निकलते हैं। ये बेचारा सांप गलत जगह घुस गया। फोटो सेशन होने के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया। 4. चलते-चलते.. ट्रैफिक पुलिस जब किसी भारी वाहन को रोककर ड्राइवर से कागजात मांगते हुए दिखती है तो हर किसी को यही लगता है कि पुलिसवाला रिश्वतखोर है, उगाही कर रहा है। भ्रष्टाचार तो यत्र तत्र सर्वत्र है लेकिन ईमानदार लोगों की भी कमी नहीं है। इस प्रजाति के प्राणि हर विभाग में पाए जाते हैं। ऐसे ही अधिकारी हैं हनुमानगढ़ ट्रैफिक इंचार्ज सीआई अनिल चिंदा। साहब का अंदाज ए बयां ऐसा है कि किसी भाई का चालान भी कट जाए तो मन ही मन गालियां नहीं देगा। उसे लगेगा कि सीआई साहब ने जान बचा ली। ऐसा ही वाकया रामदेवरा तीर्थयात्रियों के साथ हुआ। हनुमानगढ़ से तीर्थयात्रियों का दल रामदेवरा जा रहा था। सीआई साहब रोड पर तैनात। पदयात्रियों को रोका। एक लाइन में खड़ा कर दिया। सब घबराने लगे कि पुलिस क्या करेगी। सीआई साहब ने कॉन्स्टेबल से पूछा- रणजीत, इनके बैग पर किसी ने रिफ्लैक्टर नहीं लगाए? इसके बाद वे एक एक रिफ्लैक्टर हर तीर्थयात्री के बैग पर अपने हाथों से लगाने लगे। साथ ही समझाया- देखो बच्चे, रात में ये लाइट को रिफ्लैक्ट करेगा तो ड्राइवर को पता चल जाएगा कि रोड पर आप चल रहे हो। आप दुर्घटना से बच जाओगे। काम पूरा होने के बाद वे बोले- केला खाओ तो छिलका रोड पर नहीं डालना। थक जाओ, आराम करना हो सड़क किनारे मत बैठना, दस पंद्रह फीट दूर आराम करना। एक लाइन में आगे-पीछे चलना। सुरक्षित जाना सुरक्षित आना। इनपुट सहयोग- दिनेश श्रोत्रीय (राजसमंद), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।

