झाड़ू से मेयर साहिबा ने ‘अंगना सजाया’:RSS प्रचारक की पिटाई पर ‘चीफ सोर्स’; मां-बेटी को MLA की ‘चुनौती’

नमस्कार, पीसीसी के चीफ साहब के सोर्स की बड़ी चर्चा है, उन्हें अपडेट सूचनाएं मिलती रहती हैं। कोटा की मेयर ने झाड़ू लेकर सड़कें चमाचम कर दीं। ओसियां विधायक और पूर्व विधायक की जुबानी जंग जारी है और जयपुर में डीसी के सामने पार्षद और उनके पति ने हंगामा कर दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. RSS प्रचारक की पिटाई और ‘चीफ’ के सोर्स पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा जी के सोर्स तगड़े हैं। हालांकि बीते दिनों उनके मित्र के सोर्स फेल हो गए थे। मित्र के सोर्स ने दो-तीन दिन में ED का छापा पड़ने की बात कही थी। छापा नहीं पड़ा। खामखा चीफ साहब का सोनपापड़ी का खर्चा हो गया। अब राजधानी के नरैना थाने में RSS प्रचारक को पुलिस ने पीट दिया। कारण जो भी रहा हो, सोर्स ने चीफ साहब तक सूचना पहुंचा दी। बारां में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीफ साहब ने पूछा- पता भी है प्रचारक को पुलिस ने क्यों पीटा? जवाब आने से पहले खुद जवाब दिया- क्योंकि प्रचारक वही काम करने आया था जो RSS के प्रचारक करते हैं। पुलिस ने प्रचारकी निकाल दी। इस काम पर पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड ही करना है तो प्रचारकों को करो। बीते दिनों चीफ साहब पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। वहां DGP साहब से मिले थे। शिकायत की थी कि पुलिस इशारे पर काम न करे। डीजीपी साहब के आश्वासन को डोटासरा जी ने यूं पेश किया, कहा- डीजीपी साहब बोले कि मैं पुलिस को निर्देश दूंगा कि हमें राजनीति का हिस्सा नहीं बनना है। पुलिस राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगी। लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि नेता भी पुलिस को राजनीति का हिस्सा नहीं बनाएंगे? 2. एक मेयर सड़क पर, एक अंधकार में.. कोटा में सुबह-सुबह सड़क पर हलचल हुई। कुछ महिलाएं झाड़ू लिए कचरे से इंतकाम से लेने उतरीं। महिलाएं पार्षद थीं। उनका नेतृत्व मेयर कर रही थीं। वही मेयर जिन्हें युवा नेताजी ने खूबसूरत होने के कारण टिकट मिलने का तंज किया था। वही मेयर जिन्होंने जीत के बाद चौखट पर शीश झुकाया था। तो मेयर-पार्षद दल ने एक सड़क चुनी और वहां झाड़ू से हल्ला बोल दिया। चूंकि प्रोग्राम पहले से तय था इसलिए पत्रकारगण भी मौजूद थे। इनकी मौजूदगी से नेतागण का हौसला बढ़ता है। भाव-भंगिमा में स्फूर्ति आती है। कार्य में उल्लास बढ़ता है। मेयर ने कूड़े को इकट्‌ठा कर हाथ ठेले में डाला और गीत गाती चलीं- गाड़ीवाला आया घर से कचरा निकाल। ठेले का अलाइनमेंट चुनौतीपूर्ण था। इस बीच पत्रकार महोदय ने स्वच्छता मिशन का कारण पूछा तो बोलीं- यहां से राम बारात निकलेगी। राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी वाले भाव से हमने तय किया है कि राम आएंगे तो सड़कें सजाऊंगी। ऐसी आस्थावान मेयर। नगर धन्य, निगम भी धन्य। उनके हाथों सफाई पाकर कोटा की राहें रोशन हुईं। लेकिन भरतपुर में अंधकार छा गया। हालांकि भरतपुर में अंधकार वाली बात का सरोकार मौसम या कानून व्यवस्था से नहीं है। बात भरतपुर नगर निगम की है। जहां चलती मीटिंग में बत्ती गुल हो गई। नवनिर्वाचित मेयर मीटिंग ले रही थीं। वातावरण भाषण के अनुकूल था। इसलिए मैडम ने संबोधन शुरू कर दिया। इसी बीच बिजली वालों ने पावर कट कर दिया। बत्ती गुल हो गई। लाइट चली गई। अंधकार छा गया। कई पार्षद गण ने लंबी सांस छोड़ी। कुछ ढीले होकर कुर्सी पर पसर गए। कुछ कानाफूसी और घुस-मुस करने लगे। बोले- ये लो, ये व्यवस्था है। कुछ सदस्यगण ने तत्परता दिखाई और जेब से मोबाइल निकालकर प्रकाश-दीप जला लिए। मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मेयर मैडम में संबोधन पूरा किया। संबोधन कुछ इस प्रकार रहा होगा- हम भरतपुर को गंदगी से सफाई की ओर ले जाएंगे। हम भरतपुर को अतिक्रमण से नगर नियोजन की ओर ले जाएंगे। हम भरतपुर को अंधकार से… 3. विधायक ने दी मां-बेटी को चुनौती जोधपुर के ओसियां में विधायक और पूर्व विधायक के बीच वहीं आंकड़ा है जो एशेज में ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैड के बीच, नंबर वन की जंग में अमेरिका और चाइना के बीच और श्रेय लेने की होड़ में कॉकरोच व कांग्रेस के बीच है। यानी 36 का आंकड़ा। विधायक और पूर्व विधायक इस आंकड़े का उदारण दोनों पेश करते रहते हैं। ओसियां के संतोड़ा खुर्द गांव में निवर्तमान सरपंच ओमाराम चौधरी ने धन्यवाद सभा रखी थी। इसमें विधायक भैराराम सियोल पहुंचे थे। यहां सभी समर्थक ही समर्थक। ऐसे में उन्हें 36 का आंकड़ा याद आया और वे घुमा-फिराकर बात करने लगे। बोले- मैं गांव में रहता हूं। गांव में रहने का एक फायदा है। ज्यादातर लोगों के नाम और चेहरे याद हैं। ओमारामजी ने आपकी पंचायत में खूब काम कराए। इससे पहले तो ग्राम पंचायत विकास के पहिए से हटी हुई थी। क्योंकि जो लोग यहां थे, वे विकास नहीं चाहते थे। उन्हें राजनीति करनी थी। वोट लेने थे। विधायकजी ने ट्रैक पकड़ लिया। पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा और उनकी माताजी को निशाने पर लिया। बोले- तिंवरी और मथानिया को मैंने नगर पालिका बनाया। मथानिया में उन्होंने जीत क्या दर्ज की वे हेलमेट पहनकर गमछा घुमाने लगीं। अरे भाई तुम कौन सी क्रिकेट टीम से हो, बताओ? गहलोत की टीम से हो या पायलट की टीम से? डोटासरा की टीम से हो या जूली की टीम से? आपकी माताजी को हमने पिछला चुनाव हरा के भेजा था। जब जिला प्रमुख बनीं तो हमारी छाती पर खूब मूंग दली। ओसियां में जिला परिषद की 8 सीटें हैं, हिम्मत है तो एक भी सीट पर चुनाव लड़कर दिखा दो। मां बेटी दोनों से कह रहा हूं। विधायकजी के बयान की काफी चर्चा हुई। खुली चुनौती। उधर पूर्व विधायक के वीडियो भी घूमने लगे हैं। कह रही हैं- उनके पास सत्ता है तो मेरे पास जनता है। 4. चलते-चलते… राजधानी में नगर निगम की चुनावी मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा कि शोर-शराबा, आरोप-हंगामा, धरना-प्रदर्शन होने लगा। शहर के वार्ड 136, 137 और 138 के पार्षद प्रतिनिधि जोन उपायुक्त के दफ्तर पहुंचे और हंगामा करने लगे। 138 से पार्षद दीपिका डीसी की गाड़ी के आगे बैठ गईं। पार्षद के पति विजेंद्र ने मोर्चा संभाला। डीसी को जमकर खरी-खरी सुना दी। डीसी साहब हाथों को पीछे बांधे हुए थे। सभी के आरोप का लब्बोलुआब यह था- हम फलां पार्टी से हैं, इनके सामने हम जीत गए, इसलिए इनके पेट में मरोड़ उठ रहे हैं। हमारे महल्ले में सफाई नहीं हो रही, सीवर उबल रहे हैं, कचरा नहीं उठा, जनता हमें गालियां निकाल रही है, डीसी ने कर्मचारी हटा दिए, बीट भंग कर दी। हम कहां जाएं? उपायुक्त संतलाल ने ‘जैसा नाम वैसी सीरत’ के नियम से शांत स्वर में जवाब दिया- कर्मचारियों का ट्रांसफर प्रशासनिक प्रक्रिया है। विरोध करने वाले पार्षद एक ही पार्टी से हैं। इनमें आपस में फूट है। एक पार्षद जिन कर्मचारियों को लगाने की सिफारिश कर रहे हैं, दूसरे पार्षद उन्हें हटाने की सिफारिश कर देते हैं। इस जवाब पर एक वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि बोले- अंग्रेज चले गए और इन्हें छोड़ गए। हम सभी पार्षद एक हैं, ये चाहते हैं कि हमारे बीच फूट पड़ जाए। पार्षद प्रतिनिधि ने शायराना ढंग से चेतावनी दी- याद रखिएगा, हमारे वार्ड में जो हमारी जलालत हो रही है, उस जलालत के हिस्सेदार अफसर भी होंगे। इनपुट सहयोग- नितिन शर्मा (कोटा), लक्ष्मीकांत शर्मा (सांभर, जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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