एक हजार के लिए प्रतिबंधित खरगोश का शिकार:जयपुर के जंगलों में 7 दिन पड़ताल, कैमरे पर शिकारी बोले- होम डिलीवरी भी कर देंगे

‘आप 24 घंटे पहले ऑर्डर दो….खरगोश का शिकार कर के ला देंगे….दिन में 3-4 का शिकार तो कर ही लेते हैं। होम डिलीवरी भी कर देते हैं।’ कैमरे पर बेखौफ होकर राजस्थान में संरक्षित जानवर जंगली खरगोश के शिकार का सच कबूलते ये शिकारी हैं। ऑर्डर मिलते ही ये गुलेल से अचूक निशाना लगाकर बेजुबान जंगली खरगोशों को मौत के घाट उतार देते हैं और फिर उन्हें हजार से दो हजार रुपए में बेच देते हैं। इस जानवर के शिकार के पीछे कई भ्रांतियां भी हैं। शिकारियों ने दावा किया कि खरगोश के खून से अस्थमा जैसी बीमारी ठीक होती है। इसी के चलते इनकी डिमांड ज्यादा रहती है। प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल के एक्सपर्ट डॉक्टर ऐसे दावों को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि किसी भी जानवर के खून से बीमारी ठीक होना असंभव है। दैनिक भास्कर टीम कई दिनों की पड़ताल के बाद इन शिकारियों तक पहुंची। गुपचुप तरीके से पूरी बात को रिकॉर्ड किया। पढ़िए- संडे बिग स्टोरी…. जंगल में मिली शिकारियों की टीम, दो खरगोश थे साथ जंगली खरगोश के शिकार की पड़ताल में टीम ने करीब 7 दिनों तक बगरू, पहाड़िया गांव, टोंक, दौसा, बांदीकुई, जमवारामगढ़, दिल्ली बाईपास के आसपास के इलाकों में शिकारियों की तलाश की। जयपुर से जमवारामगढ़ इलाके में कुछ लोगों से बात के दौरान पता चला कि गांव के पास ही शिकारी रहते हैं। तलाश में उनके ठिकाने तक पहुंचे तो एक युवक से हमारी मुलाकात हुई। उसने बताया कि वह डिमांड पर शिकार करता है। कुछ देर पहले ही फोन पर ऑर्डर मिला था, इसलिए हमारी टीम दो जंगली खरगोश का शिकार करने गई है। हम उस युवक से बात कर ही रहे थे कि इतनी देर में बिना नंबर की एक बाइक पर दो युवक पहुंचे। उनके हाथ में एक गंदा सा थैला था। आते ही युवक से बोले- दो का इंतजाम कर दिया है। पूछने पर उन युवकों ने बताया कि दो खरगोश का कुछ देर पहले ही शिकार किया है। कुछ देर में शिकारी ने खरगोश की डिमांड करने वाली पार्टी को फोन करके ऑर्डर ले जाने को कहा। हमारे सामने ही मरे हुए खरगोश निकाले, उनकी खाल उतारी पैसों की डील करने के बाद शिकारी के दो अन्य साथियों ने थैले से दो मरे हुए खरगोश निकाले और उनकी खाल को उतारना शुरू कर दिया। हमने नजर बचाते हुए मोबाइल के कैमरे से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। पीछे बैठे युवक ने मोबाइल हाथ में देखा तो उसे शक हुआ। उसने साफ चेतावनी दी- हमारा कोई वीडियो शूट मत करना। नहीं तो वनकर्मी हम पर कार्रवाई कर देंगे। रिपोर्टर ने तीनों को आश्वस्त किया और बातचीत शुरू की। गुलेल से निशाना लगाकर करते हैं शिकार हमारी मुलाकात जिस शिकारी से हुई उसने पहले से दो खरगोश का शिकार किया हुआ था। बातचीत के दौरान उसने बताया कि शरगोश चालाक जानवर है। जरा सी आवाज से भाग जाता है। इसलिए खरगोश के शिकार के लिए किसी वेपन या एयरगन का इस्तेमाल नहीं करते। इसके लिए पारंपरिक तरीका अपनाते हुए गुलेल से ही निशाना लगाते हैं। गुलेल की मार से खरगोश घायल हो जाता है। इसके बाद जाल से उसे पकड़ लेते हैं। कस्टमर भी गुलेल से शिकार की डिमांड करते हैं। बुलेट से खरगोश में जहर फैल जाता है। एक युवक ने खुद को शिकारी बताते हुए दावा किया कि जंगली खरगोश की डिमांड इसलिए ज्यादा है, क्योंकि इससे सांस की बीमारी ठीक होती है। मौका पड़ने पर वो 3-4 शिकार एक दिन में कर लेते हैं। अगर ऑर्डर बड़ा है तो फिर उस हिसाब से काम करते हैं। गर्मी में खरगोश और सर्दी में तीतर की डिमांड ज्यादा रहती है। डिमांड पर शिकार करते हैं शिकारी ने बताया कि वह डिमांड पर शिकार करते हैं। लोग उनका मोबाइल नंबर लेकर जाते हैं। जिसे शिकार की जरूरत होती है वह एक दिन पहले ऑर्डर दे देता है। कई होटल वाले भी कॉन्टैक्ट में हैं। ऑर्डर मिलने पर शिकार की डिलीवरी करते हैं। डिलीवरी का पैसा अलग से लेते हैं। शिकारियों ने कबूल किया कि वो जयपुर सिटी के आउटर तक सप्लाई देते हैं। अंदर नहीं जाते, क्योंकि पुलिस के पकड़ने का डर बना रहता है। एक्सपर्ट बोले- जानवर के खून से बीमारी ठीक होने का दावा झूठ है एसएमएस अस्पताल में मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि खरगोश का खून पीने से सांस लेने की परेशानी दूर होने का दावा पूरी तरह से गलत है। सांस लेने की परेशानी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- एलर्जी, हार्ट की परेशानी, मोटापा। किसी भी जानवर का खून पीने से यह ठीक नहीं हो सकती। हर बीमारी को ठीक करने के लिए दवाएं बनी हैं। डॉक्टर की सलाह पर उन दवाओं के इस्तेमाल से ही बीमारियां ठीक हो सकती हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. एमएस कछावा ने कहा- जंगली खरगोश का मांस खाने, खून पीने जैसी भ्रांतियां कई सालों से चली आ रही हैं। यह किसी भी प्रकार से सही नहीं है। कुछ लोग शिकार को बढ़ावा देने और उससे पैसा कमाने के लिए इस तरह की बातें फैला देते हैं। इसके कारण इन शिकारियों का व्यवसाय (शिकार करना) चलता रहता है। लोग इन बातों को सुनकर इलाज के लिए जानवरों की हत्या इनसे करवाते हैं। क्या नौतपा में ही खरगोश का शिकार ज्यादा होता है? इस सवाल के जवाब में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. एमएस कछावा बताते हैं- आम तौर पर इस तरह की भ्रांति लोगों के बीच में फैलाई गई है कि खरगोश एक शांत जीव है। उसका मांस भी ठंडा रहता है, इसलिए लोग गर्मी में इसका सेवन अधिक करते हैं। अलग-अलग खुली जगहों पर मिलने वाले इन जानवर का चंद रुपए के लिए शिकार करवाते हैं। गर्मी के दिनों में खरगोश के शिकार करने की घटनाएं अधिक होती हैं। संरक्षित है खरगोश प्रजाति डॉ. एमएस कछावा ने बताया कि भारत में जंगली खरगोश यानी भारतीय खरहा (Indian Hare) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव माना जाता है। यह अधिनियम की अनुसूची Schedule-IV में शामिल प्रजातियों में गिना जाता है, जिसके तहत इसके शिकार और पकड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। शेड्यूल-4 श्रेणी में जंगली खरगोश, नेवला, उल्लू की कई प्रजातियां, सांपों की कई सामान्य प्रजातियां शामिल हैं। शिकारियों को खुद भी कानून की जानकारी जंगली खरगोश को मारने वाले शिकारियों ने बताया कि उनके कई साथियों को शिकार करते और परिवहन करते हुए पुलिस और वन विभाग की टीम के द्वारा पकड़ा जा चुका है। कुछ माह की सजा और जुर्माने के बाद वह बाहर आ जाते हैं। अच्छा पैसा मिलने के कारण वह दोबारा से शिकार करने लगते हैं। कई बार शिकार के दौरान वह खुद चोटिल भी हो जाते हैं। लेकिन उस के बाद भी वह इन जीवों को मार रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी बोले- पता लगते ही करते हैं कार्रवाई डीसीएफ (जयपुर ग्रामीण) उपवन संरक्षक ओमप्रकाश ने बताया कि खरगोश का शिकार करना गलत है। हमारे पास कोई जानकारी नहीं है,आप के पास जानकारी है तो हमे बताइए, जांच कर के कार्रवाई की जाएगी। —————- यह खबर भी पढ़िए… 2000 सिगरेट जितनी खतरनाक ई-सिगरेट, राजस्थान में बिक रही, 7 साल पहले बैन, दुकानदार बोले- चाहे जितनी मिलेगी भास्कर टीम ने जयपुर और जोधपुर में इन्वेस्टिगेशन किया तो पान की दुकानों और थड़ियों पर बैन के बावजूद ई-सिगरेट बिकती मिली। खरीदने वाले ज्यादातर नाबालिग स्टूडेंट्स। होम डिलीवरी तक की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…
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