ऊर्जा मंत्रीजी की मौजूदगी में ‘बत्ती गुल’:विधायकजी के घर की ‘महाभारत’; गंदे पानी की लगाई ‘स्टॉल’

नमस्कार ऊर्जा मंत्रीजी की मौजूदगी में रेलमंत्रीजी के कार्यक्रम के दौरान बत्ती गुल हो गई। नवलगढ़ विधायक के परिवार की महाभारत सामने आई। अतिक्रमण हटवाने गए पूर्व सरपंच के ससुर गुस्साई महिलाओं को देख भाग छूटे और बारां में लोगों ने गंदे पानी की स्टॉल लगा दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. बत्ती हो गई गुल
MNIT में सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और AI लैब का ऐलान करने जयपुर आए रेलमंत्री पहले भाजपा दफ्तर पहुंचे। यहां मीडिया से बातचीत करनी थी। संवाद होता इससे पहले बिजली चली गई। सन्नाटा पसर गया। अंधेरा हो गया। मोबाइल की लाइट जली तो लगा कैंडल डिनर होने वाला है। रेलमंत्रीजी ने आंखों-आंखों में पास बैठे ऊर्जा मंत्री से पूछा- सुना है राजस्थान में इतनी बिजली होने लगी है कि दूसरे राज्यों को बेच रहे हो? ऊर्जा मंत्रीजी ने भी आंखों-आंखों में जवाब दिया- जी, बिल्कुल ठीक सुना है। रेलमंत्रीजी ने फिर उसी मौन भाषा में पूछा- तो फिर ये अंधेरा क्यों हो गया? ऊर्जा मंत्रीजी ने विनीत होकर मौन जवाब दिया- जी, ईंधन बचाने के बाद अब ऊर्जा बचा रहे हैं। रेलमंत्रीजी निसार हो गए। प्राकृतिक रोशनी के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए बोले- बाहर चलो। 2. विधायक के घर की ‘महाभारत’
शेखावाटी वीरों की धरती है। लड़ाई लड़ने में हर कोई महारथी। लड़ने को कोई नहीं मिलता तो परिवार के लोग आपस में लड़ लेते हैं। ऐसी ही महाभारत विधायकजी के परिवार में चल रही है। विधायकजी ने ऐलान किया- नवलगढ़ का विकास कोई नहीं रोक सकता। विरोधी दल के लोग वंशवाद, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद करते थे। लेकिन विधायकजी का वंश, परिवार, भाई-भतीजा में कोई विश्वास नहीं। वे सतत विकास कर रहे हैं। इधर, जाखल बाइपास पर विधायकजी के ताऊ और छोटे दादा धरने पर बैठ गए। उनका आरोप ये कि विधायक बैर निकाल रहा है। हमारी 22 बीघा जमीन का नाश कर दिया। यहां से 4 मीटर गुजरने वाली रोड को 9 मीटर करा दिया। बदले की भावना से ये सब करा रहा है। ताऊजी ने ताना मारा- ये कद, पद और नाम थोड़े दिन के हैं। दो दिन की जिंदगी ढल जाएगी एक दिन। फिर यहीं घूमेगा। छोटे दादाजी खरी-खरी सुनाई- उसने अपने दस्तावेज में 10वीं पास लिखा है। छठी पास भी नहीं है। 3. पूर्व सरपंच के ससुर को दौड़ाया प्रशासन को सूचना मिली कि बाड़मेर के जसदेर तालाब के पास चारागाह की जमीन पर कब्जा हो गया है। तहसीलदार, पटवारी और दूसरे अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम भी साथ गई। समझाकर अतिक्रमण हटा दिया। जेसीबी से सफाई कर दी। सब कुछ हो ही गया था तो पूर्व सरपंच के ससुर खेराजराम को मौके पर जाकर पंचायती करने की क्या जरूरत थी? सड़क पर खड़े होकर इंटरव्यू देने लगे। आरोप लगाने लगे कि भूमाफिया गरीबों को बसाकर कब्जा कर लेते हैं। यह सब तमाशा वहां खड़ी महिलाएं देख रही थीं। इन्हीं को हटाया गया था। महिलाएं आग-बबूला हो गईं। वे ससुर साहब की ओर बढ़ीं। ससुर साहब ने खतरा भांप लिया। वे इंटरव्यू देते-देते सरक कर कार में बैठे गए। महिलाएं कार पर टूट पड़ीं। पत्थर मारकर शीशा फोड़ दिया। ससुरजी ने कार दौड़ा दी। महिलाएं पीछे भागीं और कार पर पत्थर बरसा दिए। 4. चलते-चलते.. अधिकमास में दान-पुण्य का खास महत्व है। जगह-जगह लोग मिल्करोज, शरबत, छाछ और ठंडाई की स्टॉल लगाते हैं। बारां के प्रताप चौक इलाके से दो नवयुवक गुजर रहे थे। इलाके में पहली बार आए थे। एक स्टॉल पर कतार से गिलास जमे देखे तो लपके। कहा- चलो गन्ने का जूस पीकर गला तर करते हैं। वहां खड़े लोगों ने उन्हें पकड़ा- भैया गन्ने का जूस नहीं है। नाली का पानी है। ‘नाली का पानी? फिर स्टॉल लगाकर जूस की तरह क्यों रखा है?’ नवयुवक ने बिगड़कर पूछा। संचालक ने कारण बताया- नाले की सफाई के दौरान पेयजल की लाइन टूट गई थी। तोड़ तो दी लेकिन प्रशासन ने उसे दुरुस्त नहीं कराया। 5 दिन से घरों में यही ‘गन्ने का जूस’ सप्लाई हो रहा है। अब बताओ इसकी स्टॉल न लगाएं तो क्या करें? इनपुट सहयोग- शुभम निमोदिया (बारां), विजय कुमार (बाड़मेर), नरेश भाटी (चूरू), ऋषभ सैनी (जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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