SBI ने लोन-क्लोजर चार्ज वसूला, अब ब्याज समेत लौटाना होगा:उपभोक्ता आयोग ने कहा- बैंक चाहे तो अधिकारियों से लेकर दे; RBI का नियम याद दिलाया

झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने SBI बैंक पर प्री क्लोजर वसूलने को लेकर 55 हजार का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही 25 हजार रुपए उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया है। आयोग ने बैंक मैनेजमेंट से कहा है कि वह चाहें तो लापरवाही बरतने वाले बैंक कर्मियों की सैलरी से हर्जाना वसूल कर पीड़ित को दे सकते हैं। मामला लोन से जुड़ा है। SBI की सीकर ब्रांच ने उपभोक्ता से लोन प्री क्लोजर के दौरान 14,978 अधिक वसूल किए थे। इसे भी बैंक को ब्याज सहित लौटाना होगा। अब समझिए पूरा मामला ​सुनवाई के बिना नहीं हुई कार्रवाई ​पीड़ित उपभोक्ता ने इस अवैध वसूली के खिलाफ बैंक के अधिकारियों से कई बार शिकायत की और अपनी रकम वापस मांगी। लेकिन बैंक प्रबंधन ने कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की। इसके बाद सुभाषचंद्र ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। ​सुनवाई के दौरान बैंक ने अपनी सफाई में तर्क दिया कि उन्होंने लोन एग्रीमेंट (ऋण अनुबंध) की शर्तों के मुताबिक ही प्रीपेमेंट चार्ज वसूला था। RBI का नियम याद दिलाया आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी ने बैंक के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने कहा- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि व्यक्तिगत लोन को समय से पहले बंद करने या फोरक्लोजर पर बैंक किसी भी तरह का अतिरिक्त प्री-क्लोजर चार्ज या पेनल्टी नहीं वसूल सकते। एसबीआई द्वारा किया गया यह कृत्य आरबीआई की गाइडलाइन का उल्लंघन है। बैंक सेवा में कमी माना आयोग ने इसे बैंक की सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार और उपभोक्ता अधिकारों का हनन माना। उपभोक्ता को राहत देते हुए आयोग ने​ बैंक उपभोक्ता से वसूली गई 14,978 की राशि 3 मार्च 2025 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटने के आदेश दिए। उपभोक्ता को हुई प्रताड़ना के लिए बैंक 55,000 मुआवजा देने के निर्देश दिए गए। ​कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में बैंक उपभोक्ता को 7,500 का भुगतान करेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक पर 25,000 का विशेष जुर्माना लगाया गया है, जिसे राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराया जाएगा। ​दोषी अधिकारियों से होगी वसूली आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बैंक प्रबंधन चाहे तो उपभोक्ता को दिए गए मुआवजे और जुर्माने की इस राशि को उन अधिकारियों या कर्मचारियों की सैलरी से वसूल कर सकता है, जो इस लापरवाही और अवैध वसूली के लिए जिम्मेदार थे।
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