नमस्कार, निकाय चुनाव के बाद अब पंचायतों में जोश नजर आ रहा है। लोग अपने हक की आवाज अनोखे ढंग से उठा रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता अपने अपने क्षेत्र में एक्टिव हैं। पंजाब में पायलट कांग्रेस के नेताओं को एक जाजम पर ले आए। अपने शहर को साफ रखना अपनी जिम्मेदारी है, लेकिन जिनका जिम्मा है वे भी तो आंखें खोलें। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पंचायत भवन में चरने लगा ‘सांड’ रायपुर पाली के कुशालपुरा गांव के जागरूक लोगों ने लोकतंत्र का नया प्रयोग किया। पंचायत में चुनाव होना अभी बाकी है, लेकिन गांव की परेशान जनता ने पहले ही अपना प्रतिनिधि चुन लिया। ये प्रतिनिधि चार पैरों, दो सींगों और एक पूंछ वाला है। रस्सियों से खींचकर एक सांड पंचायत भवन में घुसाया गया। उसे वहीं गद्दे पर बैठाया गया। चारे-पानी की व्यवस्था की गई। एक भाई ने तो ‘सरपंच साहब को कॉफी पिलाओ’ तक की डिमांड कर दी। सांड बेचारा तमाशाबाजी से परेशान। लेकिन उसने धैर्य नहीं खोया। नायक फिल्म के नायक की तरह एक दिन का सरपंच बनने का मौका मिला था। लोग मौजूदा सरपंच की ‘हाय-हाय’ के नारे लगाने लगे। दरअसल गांव के लोग आवारा पशुओं से खासे परेशान। कई बार पंचायत में शिकायत कर चुके। आवारा पशुओं के कारण खेतों-फसलों को तो नुकसान हो ही रहा है। सड़कों-गलियों में भी चलना दूभर। सड़क पर घूमते पशुओं के कारण कई घटनाएं हो चुकीं। जब बारम्बार कहने पर भी कोई हल नहीं निकला तो गांव वालों ने सांड को ही सरपंच घोषित कर दिया और उसे पंचायत में घुसा दिया। क्या करें, जब विकास खूंटे से बंधा हो, तो समस्या को कुर्सी पर बैठाना बेहतर। गांव वालों ने सांड सरपंच से अनुरोध किया है- खेत खूब चर लिए, अब फाइलें चरो। 2. कांग्रेस के दिग्गज सचिन अब बड़े जहाजों के पायलट बन गए हैं। उन्हें पार्टी ने पंजाब प्रभारी बनाया है। उन्होंने सबसे पहले वहां चल रही गुटबाजी पर फोकस किया। राजा वंडिंग और चरणजीत चन्नी जैसे नेताओं को एक जाजम पर ले आए। आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल भी सफल रहा। उन्होंने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी, नशा और दलित डिप्टी सीएम को लेकर जबरदस्त प्रहार किया। मामला हिट रहा। इधर, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाय चुनाव में कमर कसकर दौड़े। कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा। उम्मीदें तो डोटासरा जी को और बड़ी थी। लेकिन फिर बोले कि जिसकी सरकार होती है निकाय के नतीजे भी उसी के फेवर में आते हैं। कुल मिलाकर जिसकी लाठी थी, भैंस उसी की हो गई। डोटासरा जी ने खूब गमछा भी घुमाया, तेवर भी दिखाए और सरकार को खूब घेरा भी। नतीजे कुछ भी रहे हों, उनकी भाग-दौड़ में कोई कमी नहीं रखी। जादूगर साहब तो एक अलग ही ऑरा लेकर घूम रहे हैं। मंद-मंद मुस्कनिया और सधे हुए शब्दों से जिस जादूगरी के साथ वे अपनी बात आम जन तक पहुंचा देते हैं, वही उनकी पहचान। दुनिया में कितना ही घाम बरस रहा हो, वे कूल ही रहते हैं। उनका एक वीडियो सामने आया जिसमें हजामत कराते दिख रहे हैं। खुद भी ‘सियासी हजामत’ करने में उस्ताद हैं। 3. चलते-चलते.. जब भी जलमहल को देखता हूं तो अपने बचपन के दिन याद आ जाते हैं। कभी नहाने का मन न होता तो चेहरा चकमा कर पाउडर लगा लिया करता था। बालों में गीले हाथ फेरे और हो गया ड्राइक्लीन। अंदर से चाहे बदबू आती रहे लेकिन देखने वालों को बच्चा नहाया-धोया लगता था। जलमहल की वही हालत है। सामने से देखो तो मुंह से वाह निकलता है। झील के बीचोंबीच कमल के फूल जैसा खिला महल। लेकिन साइड वाले पाथ से महले के पीछे वाले इलाके में जाएंगे तो गंदगी का अंबार। नगर निगम के चुनाव के लिए प्रत्याशी मर रहे थे। बाड़ाबंडी हो रही हैं। मेयर बनने के लिए जोर आजमाइश चल रही है। लेकिन क्या फायदा ऐसे निगम का जो विश्व विरासत को भी नहीं संभाल पा रहा। वे तो पर्यावरण प्रेमी हैं जो खुद की टीम लेकर झाड़ू-टोकरी लेकर गंदगी साफ करने उतर गए। इन्हें वोट नहीं चाहिएं। इन्हें बस अपना शहर सुंदर चाहिए। काश जयपुर के मेयर भी ऐसा मिले। जिसे अपना शहर सुंदर बनाने की जिद हो। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।

