सभापति का पर्चा भरते ही ‘बत्ती गुल’:बाड़ाबंदी में ‘शादी की 50वीं एनिवर्सरी’; ‘जीमने घर नहीं बुलाया तो हरा दिया’

नमस्कार, अलवर में हारे हुए पति-पत्नी प्रत्याशी ने पोस्ट लिखकर आरोप लगाया- सीनियर नेताओं को घर जीमने नहीं बुलाया तो हरा दिया। सीकर में विधायकजी की मौजूदगी में बाड़ेबंदी में ही विजेता पार्षद की शादी की 50वीं सालगिरह धूमधाम से मनाई गई। अजमेर में प्रत्याशी सभापति का पर्चा भरने पहुंचा तो बत्ती गुल हो गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. जीमने नहीं बुलाया तो हरा दिया चुनाव जीतना है तो सीनियर नेताओं को पारिवारिक प्रोग्राम में जीमने का न्योता जरूर दें। पक्की बात है। न्योता नहीं दिया तो रिजल्ट बिगड़ सकता है। अलवर में हारे हुए प्रत्याशी पति-पत्नी ने यही आरोप लगाया। दोनों ने बढ़िया प्रचार किया था। गली-गली ढोल-ताशे गुंजा दिए थे। दोनों को पार्षदी का अनुभव। वार्ड 23 से पत्नी तो वार्ड 28 से पतिदेव पार्षद का चुनाव लड़ रहे थे। जीत की पूरी उम्मीद थी। उनके कार्यालय पर महिलाओं ने गीत भी गाया था- यां के वोटन की बीमारी और कछु ना है। यानी इन्हें तो वोटों की बीमारी है और कुछ नहीं है। नतीजा आया तो मियां-बीवी दोनों हार गए। हार के बाद मैडम के सोशल मीडिया से एक पोस्ट आई। लिखा- पार्टी के सीनियर नेताओं को पारिवारिक प्रोग्राम में जीमने नहीं बुलाया। इसलिए हरा दिया। पोस्ट पर हल्ला मचा तो तुरंत सफाई भी दे डाली। लिखा- भावावेश में पोस्ट हो गई। पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। हालांकि हार से दोनों भरे बैठे हैं। एक यूजर ने कमेंट कर दिया कि हार के बाद भी घमंड नहीं टूटा। इस पर यूजर को जमकर भला-बुरा कहा गया। लिखा- हाथी ऐसे ही चलेंगे और कुत्ते ऐसे ही भोंकेंगे। खैर, राजनीति में हार जीत चलती रहती है। नेताओं को हार से सबक लेना चाहिए और जीत पर घमंड नहीं करना चाहिए। सौ बात की एक बात ये कि परिवार में जीमने का कार्यक्रम हो तो सीनियर नेताओं को न्योता देना न भूलें। 2. बाड़ाबंदी में ‘शादी की 50वीं एनिवर्सरी’ रेवती देवी और जगदीश सैनी की शादी की 50वीं सालगिरह यादगार बन गई। हालांकि दोनों ने परिवार को मिस किया, लेकिन साथियों ने कमी नहीं रहने दी। दरअसल कांग्रेस की रेवती देवी सीकर के नीमकाथाना में वार्ड 24 से जीत गई। पार्टी नेताओं ने एक होटल में प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर दी। रेवती के साथ उनके पति जगदीश सैनी भी थे। पता चला कि रेवती देवी और जगदीश जी की शादी की 50वीं सालगिरह है। इस मौके को यादगार बनाने के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों ने पूरा जोर लगा दिया। होटल के खुले परिसर में गीत संगीत का इंतजाम किया गया। केक काटा गया। दूल्हा-दुल्हन की दो राजशाही कुर्सियां लगाई गईं। साथियों ने खूब गाने गाए। जगदीश जी ने जबरदस्त डांस किया। विधायक सुरेश मोदी ने भी ताली बजाकर हौसला बढ़ाया। नाचने वालों में कोई पूर्व चेयरमैन तो कोई सभापति प्रत्याशी। पति पत्नी ने एक दूसरे को माला पहनाई। फिर मिलकर ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ पर खूब कदमताल की। मंच का संचालन कर रहे साथी ने भी धमाल मचाने में कसर नहीं छोड़ी। 3. चलते-चलते… चुनाव में किसी न किसी की बत्ती गुल होती ही है। लेकिन अजमेर के किशनगढ़ में सचमुच ही बत्ती गुल हो गई। विधायक विकास चौधरी अपने प्रत्याशी को सभापति का पर्चा भराने पहुंचे थे। अधिकारी के सामने पहुंचे और बत्ती गुल हो गई। सभागार अंधेरे में डूब गया। पत्रकारों ने कैमरे की लाइट और मोबाइल की टॉर्च जला दी। पर्चा चेक करने लायक रोशनी का इंतजाम हो गया। उसी रोशनी में अधिकारी ने पर्चे को जांचा परखा। फिर पास कर दिया। फोटो सेशन में भी कैमरे की लाइट और मोबाइल की टॉर्च वाली तकनीक अपनाई गई। फोटो खिंचाकर विधायक और प्रत्याशी बाहर निकले। गेट पर विधायक जी बोले- देखिए कैसी विडंबना है। सभापति का फॉर्म भरने आए और लाइट काट दी। पत्रकारों का आभार है। अगर आपके मोबाइल की टॉर्च न होती तो हम नामांकन भी शायद नहीं भर पाते। यहां विधायक है, उपखंड अधिकारी हैं, दूसरे अधिकारी हैं, सभापति का पर्चा भरा जा रहा है तब लाइट काटी जा रही है तो आम आदमी की क्या ही स्थिति होगी? सभागार में एक जनरेटर तक नहीं है। विधायक जी भावना में बहकर ये भी कह गए- अब आप देख लीजिए कि आने वाला बोर्ड क्या काम करेगा। कहने के बाद संभले कि बोर्ड तो अपना भी बन सकता है। फिर संभावना जताई- हमें उम्मीद है कि दूसरे खेमे के असंतुष्ट पार्षद अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर हमारा साथ देंगे। निर्दलीयों से संवाद कायम है ही। बाकी सरकारें बदलती रहती हैं। यहां भी मौसम बदलेगा और किशनगढ़ का मिजाज बदलेगा। इनपुट सहयोग- उमेश शर्मा (नीमकाथाना, सीकर), धर्मेंद्र यादव (अलवर), रोहित पारीक (किशनगढ़, अजमेर) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।
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