लव मैरिज वाली नई दुल्हनिया बनी ‘सरपंच’:कांग्रेस नेता का ‘किरोड़ी-प्रेम’; नरेश मीणा की ‘तलाश’

नमस्कार, करौली में इंटरकास्ट लव मैरिज करने का फायदा लड़की को सरपंच पद के रूप में मिला। कांग्रेस नेता ओमप्रकाश हुड़ला का किरोड़ी प्रेम जाग उठा। बारां में पुलिस को युवा नेताजी की तलाश है और अलवर में प्रशासन की कार्रवाई पर बच्चा रो पड़ा। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ससुराल पहुंचते ही दुल्हनिया बनी ‘सरपंच’ राजस्थान में पंचायती राज चुनाव हो रहे हैं। चुनाव में एक से बढ़कर एक समीकरण काम करते हैं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि लव मैरिज का भी एंगल बनेगा। बात करौली के गुड़ला गांव की है। यह गांव गुर्जर बहुल बताया जाता है। गुर्जर समाज की आबादी 90 फीसदी से ज्यादा है। हाल ही गांव के युवक राहुल गुर्जर ने अपनी प्रेमिका नैना से लव मैरिज कर ली। नैना एसटी समाज से आती हैं। अब हुआ ये कि गुड़ला ग्राम पंचायत में सरपंच की सीट एसटी महिला के लिए आरक्षित हो गई। ऐसे में गुर्जर समाज ने बैठक कर नई दुल्हनिया नैना को सरपंच पद के लिए चुनावी मैदान में उतार दिया। रिजल्ट में नैना ने 2470 वोटों से जीत हासिल कर कीर्तिमान रच दिया। घर में बहू बनकर आई नैना देखते ही देखते गांव की सरपंच बन गई। अब हर तरफ इस लव मैरिज के चर्चे हैं। जिसमें दोनों पक्ष खुश नजर आ रहे हैं। जो दुल्हनिया घर संभालने आई थी, उसे अब पूरा गांव संभालना है। 2. कांग्रेस के नेताजी का ‘किरोड़ी प्रेम’ उनका नाम ओमप्रकाश हुड़ला है। वे कांग्रेस की सरकार के दौरान राज्यमंत्री रहे थे। दौसा के महवा से आते हैं। लगभग तीन साल पहले रीट पेपर लीक का मुद्दा खूब उछला था। इसी की पड़ताल में ईडी ने हुड़ला जी के घर रेड कर दी थी। तब अपनी मां के पास पहुंचकर हुड़लाजी खूब रोये थे। कहा था कि अस्सी बरस की मां के घर रेड डालकर किरोड़ी लाल जी ने अच्छा नहीं किया। भगवान पाप देगा। वही ओमप्रकाश हुड़ला हैं, जिनके स्वर अब नरम हो गए हैं। राजनीति में परमानेंट दोस्त या परमानेंट दुश्मन कोई नहीं होता। महवा में गांव में घूमते हुए हुड़ला ने लोगों से बात की। कहा- किरोड़ीजी तो मेरे बड़े भाई हैं। मैं दिल से उनकी काफी इज्जत करता हूं। मैंने कभी उन्हें नाम लेकर नहीं पुकारा। आगे श्री पीछे जी लगाया। बात को आगे बढ़ाते हुए वे बोले- किरोड़ी लालजी ने सही समय पर सही फैसला लिया होता तो वे मुख्यमंत्री बन जाते। अब हुड़लाजी की नीयत पर शक हो रहा है। ये वाकई किरोड़ी बाबा के शुभचिंतक हैं या फिर ठहरे हुए पानी में कंकड़ फेंक लहरों का मजा लेना चाहते हैं। क्योंकि कई मंचों से किरोड़ी बाबा भी इस तरह की टीस जाहिर कर चुके हैं। राजनीति के रंग निराले हैं। तारीफों के पुल बांधने वाले कहीं नीचे से खंभा सरकाने की फिराक में तो नहीं? 3. नरेश मीणा चैलेंज करके हुए गायब उन्हें ऐसा भ्रम है कि जितने ज्यादा होंगे केस, राजनीति में उतना ही चमकेगा फेस। यही सोचकर शायद उन्होंने एसडीएम के गाल से राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा। जहां कुछ फटा हुआ देखते हैं उसी में अपनी टांग घुसा देते हैं। वे अपने समर्थकों को भी लतियाते, जुतियाते और धकियाते नजर आते हैं। औरों की तो बिसात ही क्या? हाल ही वे जयपुर पहुंचे थे। वहां प्रत्याशी के समर्थन में सभा कर रहे थे। नाहरगढ़ का एरिया था। सभा में इलाके के किसान भी थे। किसान बोले- वन विभाग तंग कर रहा है। पानी की मोटर-पाइप सब उठा ले जाता है। उन्होंने तर्जनी उठाकर सेना को आदेश दिया- किसान को परेशान किया तो सरकारी दफ्तरों में आग लगा देंगे। नेताजी की सेना के जवान एक्टिव हो गए। वन विभाग के दफ्तर में हंगामा कर दिया। वनकर्मियों को पीट दिया। नाका इंचार्ज ने केस दर्ज करा दिया। उसी केस को लेकर नेताजी की तलाश की जा रही थी। नेताजी एक वीडियो में प्रकट हुए और बोले- मैं कहीं भागा नहीं हूं। अपने गांव में हूं। बारां एसपी मुझे गिरफ्तार कर लो। पुलिस मुंह-अंधेरे ही नेताजी के घर पहुंच गई। लेकिन नेताजी की बात झूठी निकली। वे घर में नहीं थे। वे जहां भी होंगे, पुलिस उन्हें पकड़ ही लेगी। लेकिन पकड़े जाने से पहले उन्होंने समर्थकों को निर्देश दिए कि मेरे बाद मेरा बेटा आपको लीड करेगा। 4. चलते-चलते.. शायर निदा फाजली साहब ने खूबसूरत शेर कहा था। अशआर कुछ यूं हैं- घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए अलवर शहर प्रशासन की कोशिश थी कि इस दीपावली शहर बहुत खूबसूरत नजर आए। इसके लिए सड़क पर फुटकर काम करने वाले छोटे व्यापारियों, विक्रेताओं, थड़ी ठेलेवालों को शिफ्ट करने का अभियान चला। दीपावली के त्योहारी सीजन में ये लोग कुछ दिन अपनी दुकान सजाकर कमा-खा लेते थे। पूरा परिवार काम में जुट जाता था। त्योहार अच्छा निकल जाता था। अब इन सबको हाट बाजार में शिफ्ट किया जा रहा है। विक्रेता इसका विरोध कर रहे हैं। कह रहे हैं कि त्योहार की खरीदारी तो मुख्य बाजार में ही होती है। हाट में कम लोग जाते हैं। प्रशासन हटाने पर अड़ा है और लोग उसी जगह बैठकर व्यवसाय करना चाहते हैं। बार-बार प्रशासन के अड़ंगे से तंग आकर एक मूर्ति वाले ने सड़क पर फेंक-फेंककर अपनी मूर्तियां तोड़ दीं। कार्रवाई से तंग फुटकर विक्रेता परिवार के एक बच्चे ने खूब हिम्मत दिखाई। आंखों में आंसू और आक्रोश एक साथ भरकर उसने प्रशासन को ललकार दिया। बोला- किसी की चोरी तो कर नहीं रहे। मेहनत करके खा रहे हैं। फिर भी गरीब के पेट पर लात मार रहे हो। कोई कुछ बोलता क्यों नहीं? बच्चे को रुलाकर शहर खूबसूरत और रोशन नजर आने भी लगा तो क्या फायदा? इनपुट सहयोग -धर्मेंद्र यादव (अलवर), धर्मेंद्र शर्मा (करौली), रामप्रसाद मेहता (बारां)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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