जैसलमेर जिले के डांडेवाला क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 मई शाम करीब 4 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जमीन से करीब 950 मीटर गहराई पर स्थित सानू फॉर्मेशन से पहली बार प्राकृतिक गैस का सफल बहाव हासिल किया है। परीक्षण के दौरान यहां से प्रतिदिन करीब 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस उत्पादन दर्ज किया गया। मंत्री ने कहा कि इससे देश की विदेशी तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम होगी। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत की विदेशी तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम होगी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि जैसलमेर के डांडेवाला ऑनशोर तेल और गैस क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। उन्होंने ऑयल इंडिया लिमिटेड की टीम और वैज्ञानिकों की तकनीकी क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के भीतर गैस का नया स्रोत मिलने से भारत की विदेशों से तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम होगी। यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन को मजबूती देगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को मजबूती देगा। जैसलमेर की यह खोज देश में साफ ईंधन के विकल्पों को बढ़ाने में मदद करेगी, जो घरों और फैक्ट्रियों दोनों के लिए जरूरी है। पहली बार सानू फॉर्मेशन से निकली गैस डांडेवाला फील्ड में पहली बार सानू फॉर्मेशन से प्राकृतिक गैस का सफल प्रवाह हासिल किया गया है। यह खोज जमीन से करीब 950 मीटर गहराई पर हुई। परीक्षण के दौरान यहां से लगभग 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन दर्ज किया गया। बेहतर और साफ क्वालिटी डांडेवाला के इस नए ब्लॉक से निकली गैस की क्वालिटी बहुत बेहतरीन बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इस गैस में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा बेहद कम है। ऐसे में यह पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा स्वच्छ और शुद्ध ईंधन मानी जा रही है। इससे भविष्य में साफ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इस खोज के बाद पश्चिमी राजस्थान, खासकर जैसलमेर बेसिन को देश के एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन हब के रूप में और मजबूती मिली है। यहां पहले से कई गैस फील्ड सक्रिय हैं और अब नई खोज के बाद इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है। नई संभावनाएं खुलीं ऑयल इंडिया लिमिटेड के मुताबिक डांडेवाला फील्ड में सानू फॉर्मेशन से गैस मिलना नई संभावनाओं का रास्ता खोलता है। इससे अब आसपास के सटे हुए इलाकों में भी आधुनिक तकनीक के जरिए और ज्यादा गैस खोजने की संभावना बढ़ गई है। वैज्ञानिक अब इस पूरे क्षेत्र में आगे और सर्वे व परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं। पहली बार ‘सानू फॉर्मेशन’ से निकली गैस केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि डांडेवाला फील्ड में अपेक्षाकृत कम गहराई पर स्थित ‘सानू फॉर्मेशन’ से पहली बार प्राकृतिक गैस का प्रवाह सफलतापूर्वक हासिल किया गया है। यह खोज जमीन से करीब 950 मीटर की गहराई पर की गई है। परीक्षण के दौरान यहां से लगभग 25,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (SCMD) प्राकृतिक गैस का उत्पादन दर्ज किया गया है। क्या होता है सानू फॉर्मेशन भूविज्ञान में फॉर्मेशन जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों या मिट्टी की उस परत को कहा जाता है जो एक ही समयकाल में बनी होती है। जैसलमेर बेसिन के नीचे मौजूद ऐसी ही एक परत को सानू फॉर्मेशन कहा जाता है। यह परत मुख्य रूप से बलुआ पत्थर और गाद से बनी है। इसकी खासियत यह है कि यह प्राकृतिक गैस और तेल को अपने भीतर सुरक्षित रखने की क्षमता रखती है। वैज्ञानिकों ने इसी परत को भेदकर यह नया गैस भंडार खोजा है। पश्चिमी राजस्थान बना रणनीतिक हाइड्रोकार्बन हब इस खोज के बाद पश्चिमी राजस्थान खासकर जैसलमेर बेसिन को रणनीतिक हाइड्रोकार्बन हब के रूप में और मजबूती मिली है। ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार डांडेवाला क्षेत्र में सानू फॉर्मेशन से गैस मिलने के बाद आसपास के इलाकों में भी आधुनिक तकनीक के जरिए नई खोज की संभावनाएं बढ़ गई हैं। जैसलमेर में पहले से सक्रिय हैं कई गैस फील्ड जैसलमेर बेसिन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस क्षेत्र माना जाता है। यहां ऑयल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी और फोकस एनर्जी जैसी कंपनियां काम कर रही हैं। डांडेवाला के अलावा तनोट, बागीटिब्बा, मनहेरा टिब्बा, घोटारू, बांकिया और चिनैवाला टिब्बा प्रमुख गैस क्षेत्र हैं। पूरे जैसलमेर बेसिन में करीब 10.8 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस भंडार का अनुमान है। गैस से बनती है बिजली जैसलमेर के कुओं से निकलने वाली अधिकांश गैस रामगढ़ गैस थर्मल पावर स्टेशन को भेजी जाती है। यह राजस्थान का पहला गैस आधारित बिजली घर है जिसकी क्षमता करीब 270.5 मेगावाट है। गेल इंडिया की अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए गैस करीब 67 किलोमीटर दूर रामगढ़ पावर प्लांट तक पहुंचाई जाती है। यहां हर दिन लगभग 6 से 8 लाख क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई होती है। इस गैस से बनने वाली बिजली का उपयोग भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर फ्लड लाइट्स, पेयजल योजनाओं और स्थानीय घरों व फैक्ट्रियों में किया जाता है। 1990 के दशक में हुई थी डांडेवाला फील्ड की खोज डांडेवाला फील्ड की पहली खोज साल 1991-92 में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने की थी। उस समय यहां गहरे कुओं से व्यावसायिक गैस मिलने की पुष्टि हुई थी। इस क्षेत्र से नियमित गैस उत्पादन साल 1996 में शुरू हुआ था, जब रामगढ़ गैस आधारित थर्मल पावर स्टेशन शुरू किया गया। तब से यहां से लगातार गैस उत्पादन हो रहा है। मई 2026 की खोज क्यों अलग है पिछले करीब 30 सालों से डांडेवाला क्षेत्र में गहरे कुओं से गैस निकाली जा रही थी। लेकिन मई 2026 में वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के जरिए पुराने क्षेत्रों की दोबारा जांच की। इस दौरान पहली बार कम गहराई यानी करीब 950 मीटर पर स्थित सानू फॉर्मेशन में नया गैस ब्लॉक मिला। इसे चालू गैस क्षेत्र के भीतर मिली नई और महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है।

