रिछपाल मिर्धा ने सुनाई ‘पंचतंत्र’ की कहानी:चीफ साहब की ‘स्पेशल कैटेगरी’; चुनाव से पहले ‘मुद्दे’ बरसा रही बारिश

नमस्कार, जंगल का राजा शेर की जगह बंदर को बना दिया तो क्या हुआ? पंचतंत्र का किस्सा सुनाकर डेगाना से पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा ने ऊंची बात कह दी। उधर चीफ साहब तीर पर तीर मारे जा रहे हैं। बोले कि दुखी आत्माएं हमारे पास आ रही हैं। साथ ही, बरखा रानी ने ठान लिया है कि चुनाव तक मुद्दों की कमी नहीं रहने देगी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. चीफ साहब की ‘स्पेशल कैटगिरी’ चीफ साहब का कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर है। हर किसी को लपेट रहे हैं। कहीं भी गुंजाइश नहीं छोड़ रहे। यह राहुल गांधी के पुष्कर दौरे के बाद से है। इसका जिक्र भी कर चुके हैं। तब से हवा में कलाबाजियां खा रहे हैं। पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष को खूब घेर रहे हैं। सीधे हमला करते हुए बोले कि कई दुखी आत्माएं हमारे पास आ रही हैं। उनका दावा कि दुखी आत्माएं वे हैं जिनकी सुनी नहीं जा रही। इस बीच एक तस्वीर ऐसी भी आई जिसमें चीफ साहब का बड़ा दिल नजर आया। एक बुजुर्ग महिला टिकट की मांग लेकर आई। साथ में दस्तावेज। चीफ साहब ने दस्तावेज देखे और उन पर मार्क कर स्टाफ को सौंप दिए। बोले-इनको स्पेशल कैटेगरी में रखना। फिर माताजी को समझाया- टिकट तो यहां से नहीं मिलेगा, लेकिन जो लोग टिकट देंगे उन्हें मैं कह दूंगा कि मेरे पास आए थे, इनका ध्यान रखा जाए। कुल मिलाकर दो दिग्गजों की खींचतान के बीच संगठन के सरदार बने गोविंद सिंह डोटासरा अब असरदार दिखाई देने लगे हैं। बाकी परीक्षा का परिणाम चुनाव के बाद सामने आ ही जाएगा। 2. पूर्व विधायक की पंचतंत्र कहानी उनका नाम रिछपाल मिर्धा है। वे राजस्थान की राजनीति के पुराने दिग्गज हैं। नागौर उनका कर्मक्षेत्र रहा। 1990 में वे जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद 1993 में कांग्रेस के टिकट पर जीते और विधायक बने। फिर 1998 में निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने और 2003 में एक बार फिर कांग्रेस के सहारे विधायकी हासिल की। 2008 में अजय सिंह किलक के हाथों हार के बाद उनकी धार कुंद हुई। 2023 में उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली। नागौर में मिर्धा परिवार की तूती बोलती है। रिछपाल मिर्धा अब भी एक्टिव हैं। गांव-गांव जाते हैं। लोगों से जुड़ते हैं। बात करते हैं। उनकी एनर्जी और संवाद का तरीका काबिले गौर है। कुचेरा में उन्होंने पंचतंत्र की कहानी के जरिए जनता को बताया कि सही नेता नहीं चुनने के क्या नुकसान हो सकते हैं। मिर्धा जी की कहानी कुछ यूं थी- जंगल में चुनाव हुए। एक जानवर ने कहा इस बार राजा शेर को नहीं बनाएंगे। जानवर बोले- तो किसे बनाएंगे? आवाज उठी कि बंदर को बनाएंगे। बंदर चुनाव जीत गया। राजा बन गया। इसके बाद शेर बकरी के बच्चे को उठा ले गया। जंगल की जनता राजा के पास पहुंची। बंदर राजा ऊंचे पेड़ पर रहता था। बंदर राजा से बकरी की फरियाद सुनी और एक डाल से दूसरे डाल पर फुदकने लगा। सारे जानवर असमंजस में। कुछ देर में बंदर की उठापटक खत्म हुई। बंदर बोला- देखो भाई। बकरी का बच्चा तो हाथ से गया। उसे मैं नहीं बचा सकता। लेकिन भाग-दौड़ में कोई कसर रही हो तो बताओ। मिर्धा जी ने इशारों-इशारों में बड़ी बात कह दी। 3. चलते-चलते… 1975 में एक प्रसिद्ध फिल्म में डायलॉग था- जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांसें चलेंगी। चुनावी सीजन में बारिश का भी कमोबेस यही हाल है। जब तक बारिश चल रही है, मुद्दों की सांसें चल रही हैं। लोगों को मौका मिल रहा है। कोई सड़क के गड्‌ढों का हाल बता रहा है। कोई स्कूल में भरे पानी का जिक्र कर रहा है। कोई इस अव्यवस्था की बात कर रहा है तो कोई उस अव्यवस्था की बात कर रहा है। हाल ही प्रदेश में कॉकरोचों ने हमला बोल दिया था। वह तो भला हो समर्थकों का जिन्होंने यश-अपयश की परवाह किए बगैर कॉकरोचों को पीट-पीटकर भगाया। स्कूल के हालात खराब सह लेंगे। लेकिन बाहरी लोग आकर मुद्दों को हाईजैक करें। वो भी चुनावी सीजन में, यह बर्दाश्त नहीं। समर्थक जोशीले हैं। वो तो बारिश का कुछ बिगाड़ नहीं सकते, वरना इंद्रदेव को भी दौड़ा लेते। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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