भंवरी हत्याकांड, 24 दिन बाद भी पुलिस-SIT खाली हाथ:लूट नहीं हत्या ही था मकसद, परिचित पर शक; हत्यारा नहीं पकड़े जाने पर गुस्से में लोग

फलोदी में भंवरी विश्नोई हत्याकांड पुलिस के गले की फांस बन गया है। फलोदी के लोहावट के जंभेश्वर नगर रहने वाली भंवरी विश्नोई (32) गृहिणी थीं, जिनकी 27 जुलाई को हत्या कर दी गई। हत्यारे ने उनकी 2 बेटियों पर भी हमला कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हत्यारा कोई परिचित ही था। उसका मकसद चोरी या लूट नहीं हत्या करना ही था। आरोप है कि परिजनों ने संदिग्धों के नाम बताए, लेकिन पुलिस ने ढंग से पूछताछ नहीं की। 24 दिन बाद भी हत्यारा गिरफ्त से दूर है। इसे लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। एसएचओ के बाद अब लोग लोहावट डीएसपी को हटाने की भी मांग पर अड़ गए हैं। हत्यारे ने चाकू से भंवरी का गला काटा, बचाने आई दोनों बेटियों पर हमला 27 जुलाई की रात भंवरी विश्नोई बेटियों के साथ घर के बाहर सो रही थी। हमलावर चाकू लेकर पहुंचा और भंवरी की गर्दन पर वार किए। मां की चीख सुन पास में सो रही बेटी रामज्योति (16) और सोनू (10) जाग गई। मां को बचाने की कोशिश में बदमाश ने बच्चियों पर भी चाकू से हमला कर दिया था। हमले में महिला की मौत हो गई, जबकि उसकी दोनों बेटियां घायल हो गई। मृतका का पति ट्रक ड्राइवर है, जो घटना वाली रात को घर से बाहर था। अब पढ़िए क्यों भड़का लोगों का गुस्सा, क्यों अब तक खाली हाथ पुलिस आरोप : पुलिस ने मामला हल्के में लिया, संदिग्धों से ढंग से पूछताछ नहीं हत्याकांड के अगले दिन 28 जुलाई को मृतका के परिजनों ने धरना देकर हत्यारे और हत्या की साजिश में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने की मांग की। परिजनों का आरोप था कि कुछ दूरी पर रहने वाली एक रिश्तेदार महिला व उसके परिजनों से मृतका और उसके परिवार से रंजिश चल रही थी। महिला और उसके परिजनों ने कुछ दिन पहले ही भंवरी देवी की जान लेने की धमकी दी थी। परिजनों का आरोप था कि वह परिवार अवांछित गतिविधियों में शामिल है और नशे का धंधा करते हैं। उन लोगों ने ही किसी नशेड़ी को उकसाकर भंवरी की हत्या कराई। आरोप है कि लोकल पुलिस ने उन संदिग्धों से ढंग से पूछताछ नहीं की। लूट नहीं, बल्कि हत्या ही था मकसद वारदात के पहले दिन से ही पुलिस भी यह मान रही थी कि भंवरी देवी की हत्या और दोनों बेटियों पर हमला करने के पीछे लूट मकसद नहीं था। लूट मकसद होता तो जब मां-बेटियां घर के चौक में सो रही थी तो लुटेरा आसानी से घर में घुस कर नकदी-गहने लूट कर ले जा सकता था। हत्यारे ने आते ही अलग सो रही भंवरी देवी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। जिस तरह से वारदात हुई, उससे लग रहा है कि हत्यारा परिचित ही था। इसके बावजूद पुलिस हत्यारे का पता नहीं लगा पाई। एसएचओ के बाद डीएसपी पर क्यों भड़के लोग धरने पर बैठे लोगों की शुरुआत में मांग थी कि हत्यारे और साजिश में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। 31 जुलाई को धरना स्थल पर पहुंच कर पुलिस अफसरों ने 5 अगस्त तक का समय मांगा। तय सीमा में कोई सुराग नहीं लगाने पर लोग और भड़क गए और लोहावट एसएचओ हरिसिंह राजपुरोहित को हटाने की मांग पर अड़ गए। आरोप था कि लोकल पुलिस कथित रूप से नशा बेचने वाले संदिग्ध लोगों से मिली हुई है। 6 अगस्त को पूर्व विधायक किशनाराम विश्नोई समेत कई कांग्रेस नेता धरने में शामिल हुए। 6 अगस्त को लोहावट एसपी सतनामसिंह ने मामले की जांच एएसचओ के बजाय साइबर ब्रांच जोधपुर ग्रामीण डीएसपी भवानीसिंह को सौंपी, लेकिन वे भी कोई सुराग नहीं ढूढ़ पाए तो लोग डीएसपी पर भी भड़क गए। इंटेलिजेंस फेल्योर जोधपुर रेंज के आईजी रहे तीन आईपीएस अफसरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर भास्कर को बताया कि इस केस में शुरुआत से ही पुलिस की ढिलाई रही। ब्लाइंड मर्डर केस की जांच में शुरुआती दौर पुलिस के लिए अहम होता है। इस केस में पुलिस ने सबकुछ गंवा दिया, जिससे केस में जांच की दिशा भटक गई और लॉ एंड आर्डर बिगड़ने के हालात पैदा हो गए। अब हालात संभालने के लिए सरकार इस केस को किसी जांच एजेंसी- सीआईडी (सीबी) या सीबीआई सौंप सकती है। लोहावट पुलिस और इंटेलिजेंस सूचनाएं जुटाने वाली डीएसबी (जिला विशेष शाखा) और सीआईडी जोन के अफसर अंदाजा नहीं लगा पाए कि मामला तूल पकड़ लेगा। 6 अगस्त को पूर्व विधायक की एंट्री के बाद होने वाले हालात को पुलिस और इंटेलिजेंस भांप नहीं पाई और भीड़ पहुंच गई। भास्कर ने मामले में एसपी सतनाम सिंह से बात कर पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। एसआईटी बेनतीजा, डीएसपी को शामिल करने से और भड़के लोग 15 दिन बाद यानी 11 अगस्त को राज्य सरकार ने इस केस की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की। इसकी कमान आरपीटीसी जोधपुर के डीआईजी देवेंद्र विश्नोई को दी गई। साथ ही साइबर क्राइम पुलिस के एसपी सुमित मेहरड़ा, फलोदी एसपी सतनामसिंह, महिला अत्याचार यूनिट जालोर के एएसपी कैलाश विश्नोई, सीआईडी सीबी जोधपुर जोन के एएसपी सुभाष खोजा और साइबर ब्रांच के डीएसपी भवानीसिंह को शामिल किया गया। एसआईटी गठन के दूसरे दिन 12 अगस्त को धरना स्थल से सैकड़ों लोगों ने नंगे पैर रैली निकाली। एसआईटी एक सप्ताह बाद भी हत्याकांड से जुड़ा कोई सुराग नहीं जुटा पाई। एसआईटी में पहले के जांच अधिकारी डीएसपी भवानीसिंह को शामिल करने से लोग और ज्यादा भड़क गए। 18 अगस्त को हजारों लोगों की भीड़ ने फलोदी कलेक्ट्रेट का घेराव किया। लोग नागौर रोड, नगरपरिषद, अंबेडकर सर्किल होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वे लोग आरोपियों की गिरफ्तारी डीएसपी भवानीसिंह और एसएचओ हरिसिंह राजपुरोहित को हटाने की मांग पर अड़ गए। अब आगे क्या : जयपुर कूच का ऐलान भंवरी की हत्या के खुलासे की मांग को लेकर लोहावट थाने के आगे प्रदर्शन किया जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक किशनाराम विश्नोई का आरोप है कि पुलिस शुरू से ही आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। उन्होंने ऐलान किया कि यदि अब भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो पैदल जयपुर कूच किया जाएगा और सीधे मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचेंगे। … यह खबर भी पढ़ें… भंवरी देवी 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