बीजेपी में जारी नहीं होगी प्रत्याशियों की लिस्ट!:कैंडिडेट को सीधे सिंबल दे सकती है; कांग्रेस भी विवाद वाली जगहों पर यही फॉर्मूला अपनाएगी

निकाय चुनावों को लेकर भाजपा इस बार नया फार्मूला अपना सकती हैं। पार्टी ने तय किया है कि इस बार प्रत्याशियों की लिस्ट जारी नहीं करके सीधे जिला कार्यालय बुलाकर सिंबल दिया जाएगा। जिन संभागों की रायशुमारी हो चुकी है, उनके निकाय प्रभारी को प्रदेश अध्यक्ष का हस्ताक्षर किया हुआ खाली सिंबल देकर क्षेत्र में रवाना कर दिया गया है। वहीं अब प्रदेश भाजपा कार्यालय में जो नाम फाइनल होंगे, वह संबंधित जिला अध्यक्ष और विधायक को मेल किए जाएंगे। इसके बाद संबंधित जिला अध्यक्ष और विधायक पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को सूचना देंगे और उसे सिंबल देंगे। कांग्रेस में कई जगह सीधे सिंबल दिए जाएंगे उधर, कांग्रेस में भी कई जगहों पर सीधे उम्मीदवारों या रिटर्निंग ऑफिसर के पास सिंबल पहुंचाए जाएंगे। विवाद वाली जगहों पर पार्षद उम्मीदवारों के टिकटों की घोषणा की जगह सिंबल ही दिए जाएंगे। कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों को सिंबल भिजवाने शुरू कर दिए हैं। जिलाध्यक्षों को ही स्थानीय राजनीतिक हालात और सियासी समीकरणाों के हिसाब से पार्षद टिकटों की घोषणा का अधिकार दिया है। विवाद वाली जगहों पर टिकट सार्वजनिक करने की जगह उम्मीदवारों को सिंबल देने की रणनीति अपनाई गई है। कांग्रेस ने हर जगह के लिए यह फॉर्मूला लागू करने को बाध्य नहीं किया है। भीलवाड़ा में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष और पूर्व सभापति मंजू चेचानी ने महिला कार्यकर्ताओं को टिकट देने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर शनिवार दोपहर 3 बजे तक आत्मदाह की धमकी दी है। अजमेर की केकड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष कमलेश साहू ने भाजपा में शामिल होने के 2 दिन बाद ही यू-टर्न ले लिया। उन्होंने शुक्रवार को वीडियो जारी कर कांग्रेस में होने का दावा किया। साहू ने कहा- मैं कल भी कांग्रेस का था और आज भी कांग्रेस का हूं। मुझे धमकाकर और दबाव बनाकर ले गए थे और बीजेपी जॉइन करवा दी थी। धौलपुर की राजाखेड़ा नगर पालिका में वार्ड-22 से सगे भाइयों मुनेंद्र और श्रीकांत ने नामांकन दाखिल किया। अजमेर में बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत पत्नी हेमलता गहलोत को निर्दलीय चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं। वहीं बीजेपी से बागी होकर विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले ज्ञान सारस्वत और उनकी बेटी हर्षिता ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म लिया है। देवली, टोंक और नागौर के नामों पर हुआ था विवाद बीजेपी में अजमेर और उदयपुर संभाग के निकायों को लेकर गुरुवार को मंथन हुआ। अजमेर संभाग में देवली, टोंक और नागौर के निकायों की रायशुमारी के समय विवाद भी सामने आया। सीएम भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के सामने स्थानीय विधायक व जिलाध्यक्ष ने एक-दूसरे पर चहेतों को टिकट देने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों की आपसी सहमति से टिकट फाइनल किए गए। देरी और केंद्रीय मंत्री के नहीं पहुंचने पर गुरुवार को बीकानेर संभाग के टिकटों को लेकर मंथन नहीं हो सका था। … निकाय चुनाव से जुड़ी जिलों की खबरें यहां क्लिक कर पढ़ें… जयपुर | …… पल-पल का अपडेट जानने के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
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