एमपी की यूनिवर्सिटी के कुलपति समेत तीन अरेस्ट:राजस्थान में फर्जी डॉक्यूमेंट से बना PTI, 66 कैंडिडेट्स की डिग्री पर संदेह

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप(SOG) ने शारीरिक शिक्षक(PTI) भर्ती में डमी अभ्यर्थी बैठाकर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ा खुलासा किया है। एसओजी की टीम ने मामले में सीहोर, मध्य प्रदेश की यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को सोमवार को गिरफ्तार किया। तीनों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से 3 दिन के रिमांड पर भेज दिया। जांच में 66 कैंडिडेट्स की डिग्री भी संदेह के घेरे में आ गई है। अब एसओजी की टीम भर्ती प्रक्रिया, डिग्रियों और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। ये पूरा मामला PTI भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी और बैकडेट में BP.Ed. डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का है। हालांकि मामले में आरोपी मूल अभ्यर्थी भारमल राम पुत्र नरंगा राम धानता, जिला सांचौर को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड(RSSB), जयपुर की ओर से 25 दिसंबर 2022 को शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में सांचौर जिले के धानता निवासी भारमल राम पुत्र नरंगा राम ने आवेदन किया था। फर्जी और बैकडेट में डिग्री का खुलासा एडीजी एसओजी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद SOG ने मामले की जांच शुरू की। जांच में भारमल राम की ओर से पेश किए गए BP.Ed. डिग्री के फर्जी और बैकडेट में जारी होने के तथ्य सामने आए। मामले में SOG थाना जयपुर में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान भारमल राम ने आवेदन में जिस विश्वविद्यालय की डिग्री दर्शाई थी, उसके अलावा सीहोर की यूनिवर्सिटी की BP.Ed. डिग्री भी थी। जांच में यह डिग्री भी बैकडेट में जारी होना सामने आया। विश्वविद्यालय में सर्च, रिकॉर्ड और कंप्यूटर डाटा जब्त SOG ने कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर विश्वविद्यालय में तलाशी की। इस दौरान विश्वविद्यालय से संबंधित रिकॉर्ड और कंप्यूटर डाटा जब्त किया गया। जब्त रिकॉर्ड और डिजिटल डॉक्यूमेंट का फॉरेंसिक फाइनेंशियल एक्सपर्ट से परीक्षण और ऑडिट कराया गया। ऑडिट में सामने आया कि भारमल राम के नाम से विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग फीस लेजर अकाउंट बनाए गए थे। इन लेजर अकाउंट की एंट्री बाद की तारीख में किए जाने और रिकॉर्ड को बैकडेट में तैयार किए जाने के तथ्य सामने आए। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी हुआ था, जबकि फीस लेजर में एंट्री इसके बाद की तारीखों में की गई थीं। इससे रिकॉर्ड को पूर्व तारीख का दिखाने की गंभीर अनियमितता सामने आई। 66 अभ्यर्थियों की डिग्री जांच के घेरे में एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में कुल 66 अभ्यर्थियों ने इसी विश्वविद्यालय की BP.Ed. डिग्री लगाई थी। इनमें से अधिकांश डिग्रियां प्रथम दृष्टया बैकडेट में जारी होना सामने आया है। विश्वविद्यालय में BP.Ed. की 100 सीटें हैं। परीक्षा से पहले के सालों में इस विश्वविद्यालय से BP.Ed. करने वाले स्टूडेंट्स में राजस्थान के अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा होना भी SOG की जांच में संदेह का विषय बना है।
Back To Top